Parmod chaudhary
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World Latest News: अमेरिका में नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुने जाने के बाद अब एच-1बी वीजा में बदलाव की मांग उठने लगी है। इसके पीछे अमेरिकी विश्लेषकों का तर्क है कि विदेशी कामगार (विशेषकर भारतीय) उनकी नौकरियां हथिया रहे हैं। जिसके कारण खुद के ही देश में उनके लिए काम के अवसर घट रहे हैं। अब सवाल ये उठता है कि अगर वीजा नियमों में बदलाव हुआ तो इसका भारतीय टेक कंपनियों पर कितना असर होगा? इसके बारे में जान लेते हैं।
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विशेषज्ञों के मुताबिक संभावित वीजा सुधारों से टीसीएस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियों को लाभ मिलेगा। भले ही इनका वीजा स्पॉन्सरशिप कम हो। वीजा नियमों में बदलाव से भारत में Offshoring Model (किसी कंपनी के कार्यों को विदेश में स्थानांतरित करने का एक तरीका) को बढ़ावा मिलेगा। ET की रिपोर्ट के मुताबिक यूएस फिलहाल Flat salary proposal और अच्छे स्थानीय एक्सपर्ट की कमी का सामना कर रहा है।
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Macquarie Research की ताजा रिपोर्ट चौंकाने वाली है। मैक्वेरी के अनुसार अमेरिका में स्थानीय स्किल्ड लेबर मिलना चुनौती है। तकनीकी प्रतिभा की कमी को दूर करने के लिए एच-1बी वीजा भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अमेरिका में रहने-सहने की लागत भारत से कई गुना अधिक है। एक समान वेतन के कारण आर्थिक असमानताएं बढ़ सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार अगर यूएस को वीजा नियमों में बदलाव के नुकसान से बचना है तो सैलरी स्लैब को स्थानीय खर्चों के हिसाब से तय करना होगा।
हाल ही में ब्रोकरेज ने H1-B वीजा में नॉर्वे की तरह बदलाव करने की सिफारिश की थी। जिसमें स्किल्ड वर्क परमिट सिस्टम को एक अस्थायी नॉन एंप्लॉयर स्पेसिफिक वर्क परमिट में बदलने की मांग शामिल थी। हवाला दिया गया था कि इससे लेबर के अधिकारों में सुरक्षा और पारदर्शिता आएगी। उनके अंदर प्रतिस्पर्धा की भावना भी बढ़ेगी।
वित्तीय वर्ष 2024 (अक्टूबर 2023 से सितंबर 2024) की बात करें तो H-1B वीजा जारी करने के लिए 61 हजार से अधिक फर्मों ने सामूहिक रूप से 79.6 फीसदी डिमांड की। Amazon ने सबसे अधिक 2.7 फीसदी स्पॉन्सरशिप की डिमांड की। उसके पास 3871 वीजा थे। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड (TCS) 1 फीसदी (1452 वीजा) और HCL टेक्नोलॉजीज लिमिटेड जैसी फर्म ने 0.9 फीसदी (1266 वीजा) स्पॉन्सर किए।
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