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Gold Rate: पिछली अक्षय तृतीया से अब तक 50% महंगा हुआ सोना; 1.57 लाख के पार पहुंचे भाव

Akshay Tritiya Gold Rate: पिछली अक्षय तृतीया से अब तक सोने ने 50% से ज्यादा का रिटर्न दिया है। 99500 रुपये से 1.57 लाख रुपये तक भाव पहुंच गया है।

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सोना (Gold) एक बार फिर साबित कर रहा है कि इसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) क्यों कहा जाता है। पिछले एक साल में सोने की कीमतों में आई 50% से अधिक की तेजी ने निवेशकों को हैरान भी किया है और उत्साहित भी। 30 अप्रैल 2025 (पिछली अक्षय तृतीया) को जो सोना ₹99,500 प्रति 10 ग्राम था, वह आज 16 अप्रैल 2026 को दिल्ली में ₹1,57,255 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की चमक अभी और बढ़ सकती है।

सोने की कीमतों में इजाफा क्‍यों:

भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions): अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक स्तर पर असुरक्षा का माहौल बनाया है। शेयर बाजार में अस्थिरता के कारण निवेशकों ने सोने को सबसे सुरक्षित विकल्प माना है।

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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर संकट के चलते कच्चे तेल के दाम $60 से बढ़कर $115 प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। इससे महंगाई (Inflation) का डर बढ़ा है, जिसका सीधा फायदा सोने को मिला है।

ETF में भारी निवेश: शेयर बाजार की गिरावट से बचने के लिए संस्थागत निवेशकों ने ‘गोल्ड ईटीएफ’ (Gold ETF) का रुख किया है। वित्त वर्ष 2026 में गोल्ड ईटीएफ में करीब ₹70,000 करोड़ का रिकॉर्ड निवेश देखा गया।

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डॉलर और रुपये की कमजोरी: वैश्विक स्तर पर डॉलर की कमजोरी और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (INR) की गिरावट ने घरेलू बाजार में सोने की कीमतों को और ऊपर धकेला है।

पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन: महंगाई और युद्ध जैसे जोखिमों के खिलाफ सुरक्षा (Hedge) के तौर पर लोगों ने अपने पोर्टफोलियो में सोने और चांदी की हिस्सेदारी बढ़ाई है।

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अगले एक साल का क्या है टारगेट?
एक्सिस सिक्योरिटीज (Axis Securities) के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट देवेया गगलानी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सोना $5,300–$5,500 प्रति औंस के स्तर को दोबारा छू सकता है। वहीं घरेलू बाजार में अगले एक साल में सोना ₹1,70,000 से ₹1,85,000 प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।

निवेशकों के लिए सलाह: अब क्या करें?
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि सोने को शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के बजाय पोर्टफोलियो स्टेबलाइजर (Stabiliser) के रूप में देखें। अनुशासन के साथ किया गया निवेश ही बेहतर रिटर्न देगा। फिजिकल गोल्ड के मुकाबले ईटीएफ (ETF) अधिक लोकप्रिय हो रहे हैं। यह कम लागत वाला, शुद्धता की चिंता से मुक्त और आसानी से खरीदा-बेचा जाने वाला विकल्प है। इसमें चोरी या बीमा का कोई झंझट नहीं होता।

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अगर कीमतों में थोड़ी गिरावट (Correction) आती है, तो यह लंबी अवधि के लिए सोने और चांदी को अपने पोर्टफोलियो में जोड़ने का सही मौका होगा।

First published on: Apr 16, 2026 04:57 PM

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