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ट्रंप टैरिफ से भारत के कृषि सेक्टर को नहीं होगा बड़ा नुकसान, एक्सपर्ट ने समझाई वजह

डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 26% जवाबी टैरिफ का ऐलान किया है। माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कदम से भारत के कुछ सेक्टर्स पर सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि, कृषि निर्यात के इससे ज्यादा प्रभावित होने की संभावना बेहद कम है। कृषि एक्सपर्ट ने इसकी वजह भी समझाई है।

Author Edited By : Neeraj Updated: Apr 4, 2025 14:01
Donald Trump Tariff

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान कर दिया है। ट्रंप की घोषणा के बाद से यह गुणा-भाग शुरू हो गया है कि कौन सा सेक्टर टैरिफ से ज्यादा प्रभावित हो सकता है। कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी का कहना है कि ट्रंप के जवाबी टैरिफ से भारत के कृषि क्षेत्र को किसी बड़े नुकसान की आशंका नहीं है।

भारत के पास एक मौका

अशोक गुलाटी का यहां तक कहना है कि अगर भारत द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के दौरान समझदारी से बातचीत करता है, तो उसे कुछ लाभ भी हो सकता है। यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ के ऐलान के साथ यह भी स्पष्ट किया है कि वह संबंधित देशों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार हैं। यानी टैरिफ पर मोलभाव संभव है। ऐसे में यदि भारत ट्रंप की नाराजगी दूर करने में कामयाब रहता है, तो एक अच्छी स्थिति में पहुंच सकता है।

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…तो संभव था नुकसान

कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी ने कहा कि भारत नए टैरिफ के बावजूद अमेरिका को अपना कृषि निर्यात बनाए रख सकता है या बढ़ा भी सकता है, क्योंकि प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारत पर टैरिफ अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि इसके उलट अगर प्रतिस्पर्धी देशों को भारत की तुलना में कम टैरिफ का सामना करना पड़ता, तो भारत को निर्यात में नुकसान हो सकता था।

एक जैसा प्रभाव नहीं

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टैरिफ का प्रभाव सभी कृषि उत्पादों पर एक जैसा नहीं होगा। उदाहरण के लिए, यदि भारतीय चावल पर 26% टैरिफ लगता है, लेकिन वियतनाम और थाईलैंड जैसे प्रतिस्पर्धियों के चावल पर इससे भी अधिक टैरिफ लगता है, तो भारत को वास्तव में लाभ हो सकता है। दूसरी ओर, यदि उन देशों पर टैरिफ कम लगाया जाता है, तो भारत अमेरिका में अपनी बाजार हिस्सेदारी गंवा सकता है। गुलाटी ने आगे कहा कि ट्रंप टैरिफ का प्रभाव विभिन्न कृषि-वस्तुओं पर अलग-अलग होगा।

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बाकियों पर इतना टैरिफ

कृषि अर्थशास्त्री ने कहा कि संभावित प्रभाव का अनुमान लगाने के लिए, न केवल भारतीय निर्यात पर टैरिफ दर को देखना होगा, बल्कि प्रतिस्पर्धी देशों की टैरिफ दरों को भी देखना होगा। भारत को 26 प्रतिशत शुल्क का सामना करना पड़ रहा है, जबकि चीन पर यह काफी ज्यादा है। इसी तरह, वियतनाम पर 46 प्रतिशत, बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत, थाइलैंड पर 36 प्रतिशत और इंडोनेशिया पर 32 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है। उनका मानना है कि कुल मिलाकर भारत के कृषि क्षेत्र को ज्यादा नुकसान की आशंका नहीं है। साथ ही यदि हम द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) को अपने पक्ष में मोड़ने में सफल होते हैं, तो हमें लाभ हो सकता है।

यह भी पढ़ें – भारत के इन 5 सेक्टर्स पर दिखेगा रेसिप्रोकल टैरिफ का सबसे ज्यादा असर, बड़े नुकसान की आशंका

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Neeraj

First published on: Apr 04, 2025 02:01 PM

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