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बिजनेस

Digital Gold vs Physical Gold: निवेश के लिए कौन सा तरीका है ज्यादा सुरक्षित? खरीदारी से पहले जानें दोनों के नफे-नुकसान

Digital Gold vs Physical Gold: सोने में निवेश का कौन सा तरीका है आपके लिए बेस्ट है? डिजिटल गोल्ड की सुविधा या फिजिकल गोल्ड का भरोसा? खरीदारी से पहले सुरक्षा के ये 5 बड़े अंतर जरूर जान लें।

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Written By: Vandana Bharti Updated: Apr 20, 2026 08:13

भारत में सोना हमेशा से केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का सबसे बड़ा प्रतीक रहा है। लेकिन समय के साथ सोना खरीदने का तरीका बदल गया है। अब लोग सिक्के या गहने खरीदने के बजाय मोबाइल ऐप्स के जरिए डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) में निवेश कर रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि सुरक्षा के लिहाज से डिजिटल गोल्ड बेहतर है या पुराना पारंपरिक फिजिकल गोल्ड?

इसका जवाब सीधा हां या ना में नहीं है, क्योंकि दोनों के फायदे और जोखिम बिल्कुल अलग हैं।

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डिजिटल गोल्ड क्यों लगता है ज्यादा सुरक्षित?

डिजिटल गोल्ड की सबसे बड़ी खूबी इसकी सुविधा (Convenience) है। आपको इसे घर में रखने या बैंक लॉकर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। चोरी होने या खो जाने का डर शून्य होता है। डिजिटल गोल्ड आमतौर पर 24 कैरेट (99.9% शुद्धता) का होता है, इसलिए इसकी क्वालिटी पर कोई संदेह नहीं रहता। आप ₹10 या ₹100 जैसी छोटी राशि से भी सोना खरीदना शुरू कर सकते हैं, जो फिजिकल गोल्ड में संभव नहीं है।

डिजिटल गोल्ड का वह जोखिम जिसे लोग अक्सर भूल जाते हैं
डिजिटल गोल्ड के साथ सबसे बड़ी चुनौती काउंटरपार्टी रिस्क (Counterparty Risk) है। यहां सोना आपके हाथ में नहीं, बल्कि एक प्लेटफॉर्म के पास होता है। आप उस कंपनी पर भरोसा कर रहे हैं कि उसने आपके नाम का सोना सुरक्षित रखा है। भारत में म्यूचुअल फंड या बैंक डिपॉजिट की तुलना में डिजिटल गोल्ड अभी उतना कड़ाई से रेगुलेटेड नहीं है। अगर प्लेटफॉर्म को कोई तकनीकी या कानूनी समस्या आती है, तो आपके सोने तक पहुंच मुश्किल हो सकती है।

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फिजिकल गोल्ड: सीधा नियंत्रण, लेकिन व्यावहारिक चुनौतियां
जब आप भौतिक रूप से सोना (सिक्का या गहना) खरीदते हैं, तो आप इसके सीधे मालिक होते हैं। बीच में कोई कंपनी या ऐप नहीं होता। इसे घर में रखना सुरक्षित नहीं है और बैंक लॉकर के लिए आपको सालाना चार्ज देना पड़ता है। अगर आप गहने खरीदते हैं, तो मेकिंग चार्ज और टैक्स के कारण निवेश की वैल्यू कम हो जाती है। बेचते समय भी ज्वेलर्स शुद्धता के नाम पर कटौती कर सकते हैं।

लिक्विडिटी (पैसे में बदलना) कितनी आसान?
डिजिटल गोल्ड को आप कुछ ही क्लिक में बेच सकते हैं और पैसा सीधे बैंक खाते में आ जाता है। आप चाहें तो इसे फिजिकल गोल्ड में भी कन्वर्ट करवा सकते हैं। वहीं फिजिकल गोल्ड बेचना भी आसान ही है, लेकिन आपको खुद जौहरी के पास जाना होगा। अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट्स में अंतर हो सकता है।

आपके लिए क्या बेहतर है?
यह आपकी प्राथमिकता पर निर्भर करता है। अगर आप चोरी के डर और लॉकर के खर्च से बचना चाहते हैं और छोटे-छोटे निवेश करना चाहते हैं, तो डिजिटल गोल्ड आपके लिए सुरक्षित और बेहतर है। अगर आप पूरी तरह कंट्रोल चाहते हैं और किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना चाहते, तो फिजिकल गोल्ड आपके लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है। निवेश चाहे डिजिटल हो या फिजिकल, हमेशा भरोसेमंद और सर्टिफाइड संस्थानों से ही खरीदारी करें।

First published on: Apr 20, 2026 08:13 AM

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