BYD vs Tesla Sales: एक वक्त था जब टेस्ला के सीईओ एलन मस्क चीन की इलेक्ट्रिक कार कंपनी BYD को गंभीरता से लेने को तैयार नहीं थे. 2011 में मस्क खुले मंच पर BYD की गाड़ियों पर हंसते नजर आए थे. लेकिन आज, करीब 15 साल बाद हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. वही BYD अब दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी बन चुकी है और टेस्ला को बिक्री के मामले में पीछे छोड़ चुकी है. यह कहानी सिर्फ दो कंपनियों की नहीं, बल्कि पूरी ग्लोबल EV इंडस्ट्री में आए बड़े बदलाव की है.
BYD बनी दुनिया की नंबर-1 EV कंपनी
बिल्ड योर ड्रीम यानी BYD ने सालाना इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री में टेस्ला को साफ तौर पर पछाड़ दिया है. कंपनी की ग्लोबल EV बिक्री सालाना आधार पर करीब 28 फीसदी बढ़कर 22,54,714 यूनिट तक पहुंच गई. इसके मुकाबले टेस्ला की बिक्री में करीब 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और कंपनी सिर्फ 16,36,129 यूनिट ही बेच पाई. यानी BYD ने टेस्ला से 6,18,585 ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां बेचीं, जो करीब 38 फीसदी की बड़ी बढ़त मानी जा रही है.
हाइब्रिड सेगमेंट में भी BYD का दबदबा
BYD की ताकत सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों तक सीमित नहीं है. कंपनी ने प्लग-इन हाइब्रिड सेगमेंट में भी शानदार प्रदर्शन किया. साल भर में BYD ने 22,88,709 प्लग-इन हाइब्रिड वाहन बेचे. इस तरह कंपनी की कुल न्यू एनर्जी व्हीकल बिक्री 45,50,036 यूनिट तक पहुंच गई. खास बात यह रही कि पहली बार चीन के बाहर BYD की बिक्री 10 लाख यूनिट के आंकड़े को पार कर गई.
सब-ब्रांड्स ने बढ़ाई BYD की पहुंच
BYD की ग्रोथ में उसके अलग-अलग सब-ब्रांड्स का भी बड़ा योगदान रहा है. कंपनी यांगवांग, फैंगचेंगबाओ और डेंजा जैसे प्रीमियम और मास-मार्केट ब्रांड्स के जरिए अलग-अलग ग्राहकों तक पहुंच बना रही है. यही रणनीति BYD को कई सेगमेंट में एक साथ मजबूत बना रही है.
सस्ती कीमत और नए बाजार बने सफलता की वजह
BYD की सफलता के पीछे एग्रेसिव प्राइसिंग स्ट्रेटजी और नए बाजारों में तेजी से विस्तार को बड़ी वजह माना जा रहा है. कंपनी को चीन सरकार की सब्सिडी का भी फायदा मिला. एशिया, यूरोप और लैटिन अमेरिका BYD के सबसे बड़े एक्सपोर्ट मार्केट बनकर उभरे हैं. दूसरी ओर टेस्ला को कई बड़े बाजारों में बिक्री गिरने की चुनौती का सामना करना पड़ा.
क्यों फिसली टेस्ला की रफ्तार
टेस्ला की बिक्री में गिरावट के पीछे जानकार कई कारण गिनाते हैं. इनमें पुराना होता मॉडल लाइन-अप, अमेरिका में EV टैक्स क्रेडिट का खत्म होना, रोबोटैक्सी और ऑटोनॉमस ड्राइविंग पर जरूरत से ज्यादा फोकस और एलन मस्क की राजनीतिक गतिविधियों के चलते उनकी छवि को लगा झटका शामिल है. इन सभी बातों ने मिलकर टेस्ला की ग्रोथ पर असर डाला.
भारत में BYD बनाम Tesla की स्थिति
भारत में BYD की मौजूदगी टेस्ला से कहीं पुरानी है. कंपनी ने 2013 में भारत में इलेक्ट्रिक बस सेगमेंट से एंट्री की थी, जबकि पैसेंजर कारों की बिक्री उसने 2022 से शुरू की. दूसरी ओर टेस्ला के लिए भारतीय बाजार बिल्कुल नया है. कंपनी ने पिछले साल जुलाई में भारत में कदम रखा और फिलहाल केवल Model Y बेचती है, जिसकी शुरुआती कीमत करीब 58.9 लाख रुपये है.
भारत में आगे क्या होगा मुकाबला
BYD भारत में अपने व्हीकल पोर्टफोलियो को लगातार बढ़ा रही है. हाल ही में कंपनी ने अपनी नई 7-सीटर इलेक्ट्रिक कार भी लॉन्च की है. फिलहाल भारत में दोनों कंपनियों की कोई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट नहीं है, लेकिन BYD ने यहां EV और बैटरी प्लांट लगाने का प्रस्ताव जरूर दिया है, जो अभी सरकारी मंजूरी का इंतजार कर रहा है. आने वाले सालों में भारत में BYD और टेस्ला की यह टक्कर और भी दिलचस्प होने वाली है.
ये भी पढ़ें- नई Honda लेने की सोच रहे हैं? जनवरी के ये ऑफर जानकर रुक नहीं पाएंगे, मिल रही 1.71 लाख तक की छूट










