Monday, January 30, 2023
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Dattatreya Jayanti: भगवान दत्तात्रेय की पूजा से मिलती हैं समस्त तांत्रिक सिद्धियां, ऐसे करें पूजा

Dattatreya Jayanti: भगवान दत्तात्रेय की आराधना से समस्त तांत्रिक सिद्धियों को बहुत ही आसानी से पाया जा सकता है। जानिए उनके मंत्रों के बारे में

Dattatreya Jayanti: हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को भगवान दत्तात्रेय का प्रकटोत्सव अथवा दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष दत्तात्रेय जयंती 7 दिसंबर 2022 को मनाई जाएगी। इस दिन पूर्णिमा होने के कारण दत्तात्रेय जयंती का विशेष महात्म्य बताया गया है।

शास्त्रों में दत्तात्रेय को समस्त तांत्रिक ग्रंथों का रचियता माना गया है। यदि उनकी साधना की जाए तो व्यक्ति को बहुत जल्दी सिद्धि प्राप्त होती है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। भगवान दत्तात्रेय की आराधना से समस्त तांत्रिक सिद्धियों को बहुत ही आसानी से पाया जा सकता है।

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कौन है भगवान दत्तात्रेय

पुराणों में दी गई एक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने ही महर्षि अत्रि तथा माता अनुसूया की इच्छा पूर्ण करने के लिए उनके पुत्र के रूप में जन्म लिया था। इनका नाम दत्त रखा गया तथा महर्षि अत्रि के पुत्र होने के कारण इन्हें आत्रेय कहा गया, इस प्रकार दत्त और आत्रेय के मिलने से दत्तात्रेय नाम बना। ये समस्त शास्त्रों के प्रवर्तक और गुरुओं के गुरु माने गए हैं। यदि इन्हें प्रसन्न कर लिया जाए तो भक्तों को बुद्धि, ज्ञान, बल तथा ऐश्वर्य की प्राप्त होती है। उसके सभी शत्रु स्वतः ही परास्त हो जाते हैं।

दत्तात्रेय जयंती पर बन रहे हैं ये पूजा के मुहूर्त और शुभ चौघड़िया (Dattatreya Jayanti Puja Muhurat)

दत्तात्रेय जयंती – 7 दिसंबर 2022 (बुधवार)
पूर्णिमा तिथि का आंरभ – 7 दिसंबर 2022 को सुबह 8.01 बजे
पूर्णिमा तिथि का समापन – 8 दिसंबर 2022 को सुबह 9.37 बजे

दत्तात्रेय जयंती पर आप शुभ, लाभ और अमृत के चौघडिया में पूजा कर सकते हैं। उस दिन सुबह 7.01 बजे से 9.37 बजे तक क्रमशः लाभ व अमृत के चौघड़िया रहेंगे। इसके बाद सुबह 10.55 बजे से दोपहर 12.12 बजे तक शुभ का चौघड़िया रहेगा। दोपहर 4.06 बजे से सायं 5.24 बजे तक लाभ का चौघड़िया रहेगा।

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कैसे करें भगवान दत्तात्रेय की पूजा (Dattatreya Jayanti Puja Vidhi and Mantra)

मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि को सुबह जल्दी स्नान कर व्रत का संकल्प करें। इसके बाद भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा अथवा चित्र का पूजन करें। उन्हें निशिगंधा के पुष्प अर्पित करें धूप, चंदन, केवड़ा, चमेली आदि समर्पित करें। सुगंधित इत्र चढ़ाएं। पूजा के बाद उनके निम्न मंत्रों में से किसी एक मंत्र का 108 बार जप करें

ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नम:
ॐ द्रां दत्तात्रेयाय स्वाहा
श्री दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा
ॐ दिगंबराय विद्महे योगीश्रारय् धीमही तन्नो दत: प्रचोदयात

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।

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