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बांग्लादेश में हिंदुओं के हत्यारों को नहीं मिलेगी कोई सजा? यूनुस सरकार ने प्रदर्शनकारियों को दी कानूनी सुरक्षा

बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने जुलाई-अगस्त के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई भी आरोप तय होने से रोकने के लिए एक अध्यादेश जारी किया है, जबकि शेख हसीना और उनके साथियों के खिलाफ अलग-अलग अदालतों में मामले चल रहे हैं, इस अध्यादेश का मतलब है कि कई पुलिसकर्मियों, हिंदू अल्पसंख्यकों और राजनीतिक विरोधियों की हत्याओं के लिए किसी को भी सजा नहीं मिलेगी.

Author Edited By : Versha Singh
Updated: Jan 27, 2026 17:18

बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने जुलाई-अगस्त के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई भी आरोप तय होने से रोकने के लिए एक अध्यादेश जारी किया है, जबकि शेख हसीना और उनके साथियों के खिलाफ अलग-अलग अदालतों में मामले चल रहे हैं, इस अध्यादेश का मतलब है कि कई पुलिसकर्मियों, हिंदू अल्पसंख्यकों और राजनीतिक विरोधियों की हत्याओं के लिए किसी को भी सजा नहीं मिलेगी.

बांग्लादेशी न्यूज एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (UNB) की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरिम सरकार ने जुलाई विद्रोह (सुरक्षा और जिम्मेदारी निर्धारण) अध्यादेश, 2026 जारी किया है, जो जुलाई विद्रोह में भाग लेने वाले लोगों को इम्यूनिटी देता है. UNB ने बताया कि कानून मंत्रालय द्वारा रविवार रात को एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया.

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हिंदुओं के हत्यारों को नहीं मिलेगी कोई सजा?

UNB ने रिपोर्ट किया कि ‘इस अध्यादेश से विद्रोह से जुड़े सभी मौजूदा सिविल और क्रिमिनल केस वापस ले लिए जाएंगे और इसमें हिस्सा लेने वालों के खिलाफ कोई भी नया केस दर्ज नहीं किया जा सकेगा.’

इससे पुलिसकर्मियों, हिंदुओं सहित अल्पसंख्यकों और अवामी लीग कार्यकर्ताओं के हत्यारों को कोई सजा नहीं मिलेगी और वो बच जाएंगे. इन हत्यारों में इस्लामिस्ट और कट्टरपंथियों के शामिल होने की भी संभावना है, जिनके प्रति मुहम्मद यूनुस सरकार ने नरम रुख अपनाया है.

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इस तरह के मुआवजे को बांग्लादेश के मौजूदा संविधान से कोई समर्थन नहीं मिलेगा और इसे कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, देश में मौजूद कानूनी सिस्टम की वजह से यह अध्यादेश कानूनी चुनौती से बच सकता है.

बांग्लादेश में अब तक नहीं सामान्य हुई स्थिति

जैसे ही कोटा आंदोलन शेख हसीना सरकार के खिलाफ एक बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गया, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए बल का इस्तेमाल किया. तब तक, विरोध प्रदर्शनों में राजनीतिक तत्वों और इस्लामी कट्टरपंथियों की घुसपैठ हो चुकी थी.

जैसे ही विरोध प्रदर्शन हिंसक हुए, पुलिस स्टेशनों को जला दिया गया और पुलिसकर्मियों को पीट-पीटकर मार डाला गया. पुलिसकर्मियों की टारगेटेड हत्याएं इस बात का एक और संकेत था कि कोटा विरोध प्रदर्शनों को हाईजैक कर लिया गया था.

रिपोर्ट्स से पता चला कि टारगेटेड हमलों के बीच दर्जनों पुलिसकर्मी मारे गए थे और कई पुलिस चौकियों को छोड़ दिया गया था, जो साफ दिखाता है कि हसीना के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के 1.5 साल बाद भी बांग्लादेश में पुलिस व्यवस्था अभी तक सामान्य नहीं हो पाई है.

हालांकि, ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, अक्टूबर 2024 में पुलिस हेडक्वार्टर द्वारा जारी एक लिस्ट में कहा गया था कि जुलाई-अगस्त के विरोध प्रदर्शनों के दौरान 44 पुलिस अधिकारी मारे गए थे.

इससे पहले जनवरी में, एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट के नेताओं का एक क्लिप वायरल हुआ था, जिन्होंने हसीना की सरकार को गिरा दिया था. इस क्लिप में वे आगजनी के हमले में एक हिंदू पुलिस अधिकारी, संतोष चौधरी को मारने का दावा कर रहे थे. वे एक पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मियों को धमकाकर अपने एक साथी को हिरासत से रिहा करवाने की मांग करते हुए किए गए क्रूर हमले का जिक्र कर रहे थे.

First published on: Jan 27, 2026 04:35 PM

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