Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तानी सरकार को 48 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया है. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी 38 मांगें समय रहते पूरी नहीं की गईं, तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा.
इस विरोध-प्रदर्शन के बैकग्राउंड में 27 जुलाई को पीओके में होने वाले क्षेत्रीय चुनाव हैं. इन चुनाव के लिए 9 जुलाई से नॉमिनेशन शुरू हो गए हैं, इसके साथ ही जेएएसी ने मुजफ्फराबाद तक बड़े स्तर के प्रदर्शन मार्च का ऐलान किया है. साथ ही संकेत दिए हैं कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो यह पिछले कुछ वर्षों का सबसे बड़ा प्रदर्शन हो सकता है.
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इस प्रदर्शन के पीछे मांग की जा रही है कि पाकिस्तान में बस गए कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म किया जाए. इसके पीछे तर्क है कि इन सीटों की वजह से इस्लामाबाद PoK की राजनीति पर जरूरत से ज्यादा असर बनाए रखता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये 12 सीटें करीब 4.36 लाख रजिस्टर्ड वोटरों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि बाकी 33 सीधे चुनी गई सीटें PoK में रहने वाले लगभग 33 लाख वोटरों का प्रतिनिधित्व करती हैं. इसको लेकर यह भी कहा जाता है कि इसकी वजह से रिफ्यूजी वाली सीटों को दूसरी सीटों की तुलना में ज्यादा तवज्जो मिलती है.
इन सीटों को लेकर 7 जून को PoK सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि 12 आरक्षित सीटें संवैधानिक रूप से सुरक्षित हैं और उन्हें किसी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता. इनके खत्म करने के लिए संवैधानिक संशोधन की जरूरत होगी.
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शरणार्थी सीटों का मुद्दा तो ताजा है. इसके अलावा जेएएसी की और कई मांगे हैं. हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर पुनर्विचार, बढ़ती महंगाई के बीच आटे जैसी जरूरी चीजों पर ज्यादा सब्सिडी और बिजली की कीमतें कम करने की मांग की गई है. उनका कहना है, जिस क्षेत्र में बिजली पैदा हो रही है, वहीं के लोग बिजली की कीमत ज्यादा क्यों दें.
JAAC साल 2023 में बनी थी. यह संस्था पीओके के मुद्दों को उठाती है. पहली बार मई 2024 के बड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान यह संगठन चर्चा में आया था. उस वक्त बड़े विरोध प्रदर्शनों के चलते कई इलाके ठप पड़ गए थे. उस वक्त भी महंगाई पर काबू और सब्सिडी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया था. इसके बाद भी यह संगठन कई प्रदर्शन कर चुका है.
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