भारतीय प्रवासियों के बेटे और अमेरिका के पूर्व एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल नील कात्याल उस ऐतिहासिक फैसले का चेहरा बन गए हैं, जिसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ राज को खत्म कर दिया है. कात्याल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि ट्रंप द्वारा साल 1977 के कानून का इस्तेमाल कर लगाए गए टैक्स पूरी तरह से असंवैधानिक और गलत हैं. कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने गर्व से कहा कि आज अमेरिका में कानून के शासन की जीत हुई है. उनके अनुसार यह फैसला संदेश देता है कि राष्ट्रपति शक्तिशाली हो सकते हैं, लेकिन हमारा संविधान उनसे भी ज्यादा ताकतवर है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका में केवल संसद ही जनता पर टैक्स लगाने का अधिकार रखती है.
नील कात्याल का शानदार करियर
शिकागो में एक भारतीय डॉक्टर और इंजीनियर माता-पिता के घर जन्मे नील कात्याल का करियर कानूनी लड़ाइयों के बड़े रिकॉर्ड से भरा हुआ है. येल लॉ स्कूल से ग्रेजुएट नील ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के साथ काम किया और बाद में ओबामा प्रशासन में अहम पदों पर रहे. उन्होंने अब तक सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा केस लड़े हैं, जो किसी भी अल्पसंख्यक वकील के लिए एक बड़ा रिकॉर्ड है. वे जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी हैं और उन्होंने वोटिंग राइट्स एक्ट की रक्षा से लेकर ट्रंप के ट्रैवल बैन को चुनौती देने तक कई बड़े मुकदमों में जीत हासिल की है. उनकी काबिलियत के लिए उन्हें कई बड़े पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है.
यह भी पढ़ें: Explainer: अगर ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध हुआ, तो किन 6 संकटों का सामना करेगी दुनिया?
शक्तियों के बंटवारे की लड़ाई
कात्याल ने इस केस को केवल राजनीति नहीं बल्कि संविधान के सिद्धांतों की लड़ाई बताया. उनका कहना था कि यह मामला किसी एक राष्ट्रपति के बारे में नहीं बल्कि राष्ट्रपति पद की शक्तियों और सीमाओं के बारे में था. ट्रंप ने टैरिफ को राष्ट्रीय सुरक्षा और नशीली दवाओं की समस्या से निपटने के लिए जरूरी बताया था, लेकिन कात्याल ने साबित किया कि बिना संसद की मंजूरी के ऐसे फैसले लेना अवैध है. कोर्ट ने उनकी हर दलील को स्वीकार किया जिससे अब भविष्य में कोई भी राष्ट्रपति अपनी मर्जी से आपातकालीन शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर जनता पर टैक्स या टैरिफ नहीं थोप पाएगा.
लोकतंत्र और बराबरी का उदाहरण
अपनी इस जीत पर खुशी जाहिर करते हुए नील कात्याल ने एक इंटरव्यू में कहा कि यह अमेरिका की खूबसूरती है कि एक प्रवासी का बेटा कोर्ट जाकर दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान को उसकी गलती बता सकता है. उन्होंने इसे अमेरिकी सिस्टम की मजबूती बताया जो खुद को सुधारने की ताकत रखता है. कात्याल ने कहा कि कोर्ट में उनसे बहुत मुश्किल सवाल पूछे गए और कड़ी बहस हुई, लेकिन आखिर में सच और संविधान की जीत हुई. यह मामला दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों के लिए एक मिसाल है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, संविधान और कानून से ऊपर कभी नहीं हो सकता है.
भारतीय प्रवासियों के बेटे और अमेरिका के पूर्व एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल नील कात्याल उस ऐतिहासिक फैसले का चेहरा बन गए हैं, जिसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ राज को खत्म कर दिया है. कात्याल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि ट्रंप द्वारा साल 1977 के कानून का इस्तेमाल कर लगाए गए टैक्स पूरी तरह से असंवैधानिक और गलत हैं. कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने गर्व से कहा कि आज अमेरिका में कानून के शासन की जीत हुई है. उनके अनुसार यह फैसला संदेश देता है कि राष्ट्रपति शक्तिशाली हो सकते हैं, लेकिन हमारा संविधान उनसे भी ज्यादा ताकतवर है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका में केवल संसद ही जनता पर टैक्स लगाने का अधिकार रखती है.
नील कात्याल का शानदार करियर
शिकागो में एक भारतीय डॉक्टर और इंजीनियर माता-पिता के घर जन्मे नील कात्याल का करियर कानूनी लड़ाइयों के बड़े रिकॉर्ड से भरा हुआ है. येल लॉ स्कूल से ग्रेजुएट नील ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के साथ काम किया और बाद में ओबामा प्रशासन में अहम पदों पर रहे. उन्होंने अब तक सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा केस लड़े हैं, जो किसी भी अल्पसंख्यक वकील के लिए एक बड़ा रिकॉर्ड है. वे जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी हैं और उन्होंने वोटिंग राइट्स एक्ट की रक्षा से लेकर ट्रंप के ट्रैवल बैन को चुनौती देने तक कई बड़े मुकदमों में जीत हासिल की है. उनकी काबिलियत के लिए उन्हें कई बड़े पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है.
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शक्तियों के बंटवारे की लड़ाई
कात्याल ने इस केस को केवल राजनीति नहीं बल्कि संविधान के सिद्धांतों की लड़ाई बताया. उनका कहना था कि यह मामला किसी एक राष्ट्रपति के बारे में नहीं बल्कि राष्ट्रपति पद की शक्तियों और सीमाओं के बारे में था. ट्रंप ने टैरिफ को राष्ट्रीय सुरक्षा और नशीली दवाओं की समस्या से निपटने के लिए जरूरी बताया था, लेकिन कात्याल ने साबित किया कि बिना संसद की मंजूरी के ऐसे फैसले लेना अवैध है. कोर्ट ने उनकी हर दलील को स्वीकार किया जिससे अब भविष्य में कोई भी राष्ट्रपति अपनी मर्जी से आपातकालीन शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर जनता पर टैक्स या टैरिफ नहीं थोप पाएगा.
लोकतंत्र और बराबरी का उदाहरण
अपनी इस जीत पर खुशी जाहिर करते हुए नील कात्याल ने एक इंटरव्यू में कहा कि यह अमेरिका की खूबसूरती है कि एक प्रवासी का बेटा कोर्ट जाकर दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान को उसकी गलती बता सकता है. उन्होंने इसे अमेरिकी सिस्टम की मजबूती बताया जो खुद को सुधारने की ताकत रखता है. कात्याल ने कहा कि कोर्ट में उनसे बहुत मुश्किल सवाल पूछे गए और कड़ी बहस हुई, लेकिन आखिर में सच और संविधान की जीत हुई. यह मामला दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों के लिए एक मिसाल है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, संविधान और कानून से ऊपर कभी नहीं हो सकता है.