बांग्लादेश में तारिक रहमान की अगुवाई वाली नई सरकार के शपथ ग्रहण से पहले मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने एक प्रस्ताव रखा था जिसके तहत सभी नवनिर्वाचित सांसदों को ‘कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल’ के सदस्य के तौर पर एक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने थे. हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत में ही BNP ने इस फैसले को ‘मनमानी’ करार देते हुए खारिज कर दिया. BNP के इस फैसले से यूनुस की उन कोशिशों को करारा झटका लगा है, जिनके जरिए वे संविधान में बड़े बदलाव करना चाहते थे. काउंसिल का उद्देश्य संसद चुनाव के साथ हुए रेफरेंडम के आधार पर बांग्लादेश के संविधान को संशोधित करना था.
Swearing-in ceremony of the Honorable Prime Minister and the Members of the Cabinet.🇧🇩#SwearingIn #NewCabinet #Bangladesh #Democracy #ShobarAgeyBangladesh #BNP pic.twitter.com/d3nWKpPjpg
---विज्ञापन---— BNP Media Cell (@BNPBdMediaCell) February 17, 2026
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BNP नेता सलाउद्दीन अहमद ने स्पष्ट की स्थिति
BNP नेता सलाउद्दीन अहमद ने तारिक रहमान की मौजूदगी में स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख तारिक रहमान के निर्देश पर सभी नवनिर्वाचित BNP सांसदों को बताया गया है कि वे कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल के फॉर्म पर हस्ताक्षर न करें, क्योंकि ये सांसद जनता द्वारा संसद सदस्य के रूप में चुने गए हैं, न कि किसी सुधार परिषद के सदस्य के रूप में. कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल वर्तमान संविधान का हिस्सा नहीं है. पार्टी का मानना है कि संविधान में किसी भी तरह का बदलाव या नई परिषद का गठन जनमत संग्रह के नतीजों और संसदीय विचार-विमर्श के आधार पर होना चाहिए.
शपथ ग्रहण समारोह की खास बातें
BNP के सांसदों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल बांग्लादेश संसद के सदस्य के तौर पर शपथ ली है. तारिक रहमान अपनी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी ज़ाइमा रहमान के साथ समारोह में पहुंचे. चीफ इलेक्शन कमिश्नर एएमएम नासिर उद्दीन ने 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनाव में जीते सांसदों को शपथ दिलाई. भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस समारोह में शामिल होने के लिए ढाका पहुंचे हैं. उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी मौजूद रहे.
बिरला ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “तारिक रहमान के नेतृत्व में नयी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए ढाका में उपस्थित होना मेरे लिए सम्मान की बात है. यह एक महत्वपूर्ण क्षण है जो हमारे दोनों देशों के बीच जन-संबंधों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगा.”










