पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची रविवार को सियासी तनाव का केंद्र बन गई. जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई और वर्तमान शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने ‘आर-पार की लड़ाई’ का ऐलान किया है. खैबर पख्तूनख्वा से शुरू हुआ हजारों समर्थकों का विशाल काफिला पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ते हुए शहर के सेंटर में पहुंच गया. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह रैली महज प्रदर्शन नहीं, बल्कि सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और गठबंधन सरकार के लिए निर्णायक चुनौती है.
पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री ने दी चेतावनी
आंदोलन का नेतृत्व खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर ने किया. एक वीडियो संदेश में उन्होंने कराचीवासियों से अपील की कि आज का दिन इतिहास रचेगा. अफरीदी ने प्रशासन को चेतावनी दी कि सरकारी प्रयास विफल हो चुके हैं और काफिला अप्रतिरोध्य रूप ले चुका है. काफिला बलदिया टाउन से प्रवेश कर केमारी बंदरगाह होते हुए गुरु मंदिर पहुंचेगा और मोहम्मद अली जिन्ना की मजार पर एकत्र होगा. PTI कार्यकर्ताओं को ‘टाइगर्स’ के नाम से संबोधित करते हुए उन्होंने हर गली से समर्थन जुटाने का आह्वान किया.
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जेल से इमरान ने दिया ये संदेश
प्रदर्शन का उद्देश्य साफ है कि PTI इमरान खान पर लगे 200 से अधिक मुकदमों को राजनीतिक प्रतिशोध बताती है. पार्टी का आरोप है कि फरवरी चुनावों में फॉर्म-45 के अनुसार उनके निर्दलीय उम्मीदवार विजयी थे, लेकिन फॉर्म-47 में धांधली कर नवाज शरीफ और PPP को लाभ पहुंचाया गया. इसे ‘चुराया गया जनादेश’ करार देते हुए रैली इसीकी वापसी की मांग कर रही है. इमरान ने जेल से संदेश दिया कि देश में अघोषित मार्शल लॉ है और सेना संविधान का उल्लंघन कर रही है.










