मध्य पूर्व में जारी युद्ध अब और खतरनाक होता जा रहा है. ईरान ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर के अहम ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की खुली चेतावनी दी है. ये चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड पर इजरायल ने हमला बोल दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड और उससे जुड़े तेल-गैस ठिकानों पर अटैक हुआ. ये दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडारों में से एक माना जाता है, जिसे ईरान कतर के साथ शेयर करता है. ईरानी मीडिया के मुताबिक, हमले में गैस टेंकर्स और रिफाइनरी के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है. जैसे ही हमला हुआ, वहां काम कर रहे वर्कर्स को तुरंत सुरक्षित जगहों पर भेजा गया और आग पर काबू पाने के लिए इमरजेंसी टीमों को बुलाया गया.
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ईरान ने क्या कहा?
ये पहली बार है जब ईरान के ऊर्जा ढांचे पर सीधा हमला हुआ है. इस हमले के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए खाड़ी देशों के प्रमुख ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने साफ कहा है कि सऊदी अरब की रिफाइनरी, UAE के गैस फील्ड और कतर के LNG प्लांट जैसे अहम ऊर्जा केंद्र उनके निशाने पर हैं. इतना ही नहीं, इन देशों में मौजूद कुछ प्रमुख ऊर्जा ठिकानों को खाली करने की चेतावनी भी दी गई है. जानकारी के मुताबिक, इजरायल ने अमेरिका के समर्थन से ईरान के गैस क्षेत्र पर हमला किया, जिससे हालात और बिगड़ गए. हालांकि इजरायल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
कतर ने की हमले की निंदा
वहीं कतर ने इसे इजरायल का हमला बताते हुए इसे खतरनाक और गैर जिम्मेदाराना ठहराया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है. कतर जैसे देश, जो दुनिया के बड़े LNG निर्यातकों में शामिल हैं, वहां उत्पादन भी प्रभावित हुआ है. इससे ग्लोबल गैस सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है. इस तनाव का प्रभाव सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है और ये 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है. इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य जो दुनिया के लगभग 20% तेल व्यापार का रास्ता है, वो भी इस संघर्ष के कारण खतरे में है. अब ऐसे में अगर ईरान अपनी धमकी को अमल में लाता है, तो खाड़ी देशों के तेल और गैस ढांचे को भारी नुकसान हो सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा.
ये भी पढ़ें: सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की मौत से बिफरा ईरान, एक रात में इजरायल में क्लस्टर बम से मचाई तबाही
मध्य पूर्व में जारी युद्ध अब और खतरनाक होता जा रहा है. ईरान ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर के अहम ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की खुली चेतावनी दी है. ये चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड पर इजरायल ने हमला बोल दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड और उससे जुड़े तेल-गैस ठिकानों पर अटैक हुआ. ये दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडारों में से एक माना जाता है, जिसे ईरान कतर के साथ शेयर करता है. ईरानी मीडिया के मुताबिक, हमले में गैस टेंकर्स और रिफाइनरी के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है. जैसे ही हमला हुआ, वहां काम कर रहे वर्कर्स को तुरंत सुरक्षित जगहों पर भेजा गया और आग पर काबू पाने के लिए इमरजेंसी टीमों को बुलाया गया.
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ईरान ने क्या कहा?
ये पहली बार है जब ईरान के ऊर्जा ढांचे पर सीधा हमला हुआ है. इस हमले के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए खाड़ी देशों के प्रमुख ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने साफ कहा है कि सऊदी अरब की रिफाइनरी, UAE के गैस फील्ड और कतर के LNG प्लांट जैसे अहम ऊर्जा केंद्र उनके निशाने पर हैं. इतना ही नहीं, इन देशों में मौजूद कुछ प्रमुख ऊर्जा ठिकानों को खाली करने की चेतावनी भी दी गई है. जानकारी के मुताबिक, इजरायल ने अमेरिका के समर्थन से ईरान के गैस क्षेत्र पर हमला किया, जिससे हालात और बिगड़ गए. हालांकि इजरायल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
कतर ने की हमले की निंदा
वहीं कतर ने इसे इजरायल का हमला बताते हुए इसे खतरनाक और गैर जिम्मेदाराना ठहराया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है. कतर जैसे देश, जो दुनिया के बड़े LNG निर्यातकों में शामिल हैं, वहां उत्पादन भी प्रभावित हुआ है. इससे ग्लोबल गैस सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है. इस तनाव का प्रभाव सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है और ये 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है. इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य जो दुनिया के लगभग 20% तेल व्यापार का रास्ता है, वो भी इस संघर्ष के कारण खतरे में है. अब ऐसे में अगर ईरान अपनी धमकी को अमल में लाता है, तो खाड़ी देशों के तेल और गैस ढांचे को भारी नुकसान हो सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा.
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