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1953 में क्या हुआ था ईरान में और क्यों ताजा हुईं ‘ऑपरेशन एजेक्स’ की यादें, अमेरिका से कैसे है कनेक्शन?

Operation Ajax in Iran: ईरान में अमेरिका 1953 का इतिहास दोहराने की फिराक में है, जिसमें अली खामेनेई की सरकार को उखाड़ फेंका गया था और ऑपरेशन एजेक्स चलाया गया था. क्योंकि अब फिर अली खामेनेई सत्ता में हैं, बल्कि ईरान का सुप्रीम लीडर है, जिसकी मर्जी के बिना ईरान में पत्ता तक नहीं हिलता, अमेरिका फिर उसकी सत्ता उखाड़ना चाहता है.

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Iran 1953 History and Operation Ajax: ईराक में जंग छिड़ी तो अमेरिका के हमले में ईरान पिसा, इजरायल से युद्ध हुआ तो ईरान को अमेरिका का गुस्सा सहना पड़ा और अब जब ईरान के अपने लोग सड़कों पर उतरे तो अमेरिका ने मौका तलाशते हुए ईरान में इस्लामिक शासन को उखाड़ फेंकने का प्रयास किया. अमेरिका हमेशा ईरान के खिलाफ कोई न कोई मौका ढूंढता रहता है. कहीं अमेरिका 1953 का इतिहास दोहराने की फिराक में तो नहीं? कहीं फिर से ऑपरेशन एजेक्स तो नहीं चलाना है.

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72 साल पहले भी हुआ था तख्तापलट

बता दें कि अगर अमेरिका को ईरान के इस्लामिक शासन और सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को सत्ता से उखाड़ फेंकने का मौका मिला जाए और वह उखाड़ फेंके तो ऐसा पहली बार नहीं होगा, क्योंकि आज से 72 साल पहले 1953 में अमेरिका ऐसा कर चुका है और तब ऑपरेशन एजेक्स चलाकर अमेरिका और इंग्लैंड ने मिलकर ईरान में तख्तापलट करवाया था और मोहम्मद मोसादक को सत्ता से हटाकर रेजा पहलवी ने सरकार बनाई थी. तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण को रोकने के लिए सत्ता पलटी गई थी.

खामेनेई को हटाकर पहलवी शासक बने

बता दें कि मोहम्मद मोसादक उस समय जनता के द्वारा चुने गए थे, लेकिन अमेरिका-इंग्लैंड के जरिए उसे सत्ता से हटाकर निरंकुश शासक मोहम्मद रेजा पहलवी शाह खुद सरकार बन गए और उसने अमेरिका के साथ अच्छे संबंध स्थापित कर लिए. अमेरिका ने ईरान की सेना को समर्थन और वित्तीय मदद देकर प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेक की सरकार को पलट दिया. अमेरिका और इंग्लैंड की खुफिया एजेंसी ने इस पूरे कैंपेन को अंजाम दिया था, जिसे ऑपरेशन एजेक्स नाम दिया गया था.

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अमेरिका को क्यों चलाना पड़ा ऑपरेशन?

1951 की बात है, मोहम्मद मोसादेक कट्टर राष्ट्रवादी था और ईरान में ब्रिटिश तेल कंपनियों को निशाना बना रहा था. वह ऑयल प्लांट के अधिग्रहण और राष्ट्रीयकरण की मांग करने लगा था. इसी वजह से उसका टकराव ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी के साथ टकराव हुआ तो मोसादक को 1952 में शाह ने पद से हटा दिया, लेकिन इसके विरोध में ईरान में दंगे हुए, क्योंकि वह जनता के द्वारा चुना गया प्रधानमंत्री था और हालातों को देखते हुए शाह को मोसादेक को पद पर फिर से बहाल करना पड़ा.

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रूस से बचाने के लिए चलाया ऑपरेशन

अमेरिका की नजर ईरान के घटनाक्रमों पर थी और अमेरिका-ब्रिटेन के खुफिया सूत्रों को पता चला कि मोसादेक साम्यवादी विचारधारा का समर्थक है और अगर वह सत्ता में रहा तो ईरान पर सोवियत संघ (रूस) के प्रभाव में आकर उसके अधिकार में आ जाएगा और ईरान के तेल पर रूस का कब्जा हो जाएगा, इसलिए अमेरिका-ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों ने शाह के साथ मिलकर साजिश रची, जिसकी भनक ईरान के प्रधानमंत्री मोसादेक को लग गई. उसने लोगों को भड़काकर सड़कों पर उतार दिया.

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ब्रिटेन पीछे हटा, अमेरिका आगे बढ़ा

ईरान के हालात देखकर शाह मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए बाहर चला गया और अमेरिका ने इसका फायदा उठाया. अमेरिका ने शाह समर्थकों और ईरान की सेना को साथ लेकर आगे बढ़ा. हालांकि ब्रिटेन फाइनल ऑपरेशन के समय पीछे हट गया, लेकिन अमेरिका ने ऑपरेशन जारी रखा और शाह के समर्थकों को लालच देखकर अपने पक्ष में कर लिया. फिर मिलकर ऑपरेशन एजेक्स चलाया गया और मोसादेक को पद से हटाकर तख्तापलट कर दिया. 19 अगस्त 1953 को ऑपरेशन पूरा हुआ.

शाह की सत्ता में वापसी हुई और उसने आभार स्वरूप ईरान के तेल पर 40 प्रतिशत अधिकार अमेरिका की कंपनियों को सौंप दिया. मोसादेक को गिरफ्तार करके 3 साल जेल में रखा गया और 1967 में नजरबंदी के दौरान उनकी मृत्यु हो गई.

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First published on: Jan 17, 2026 12:07 PM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

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