क्या सच में खामेनेई शासन की चाल में फंसे ट्रंप? फांसी देने के लिए प्रदर्शनकारियों के आरोप बदलेगा ईरान

दिसंबर 2025 से ईरान में शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल प्रदर्शनकारियों को फांसी न दी गई हो और ट्रंप ईरान पर हमले से पीछे हट गए हों, खामेनेई शासन इन प्रदर्शनकारियों को बख्शने के मूड में तो बिल्कुल नहीं है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में इरादे स्पष्ट कर दिए हैं.

Iran and America

Credit: Social Media

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ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट कहा कि तेहरान के पास प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की कोई योजना नहीं है. “हैंगिंग आउट ऑफ द क्वेश्चन है… कोई प्लान फॉर हैंगिंग एट ऑल नहीं है.” मतलब साफ है कि प्रदर्शनकारियों को सजा देने का तरीका बदलेगा, न कि उनके खिलाफ सख्ती कम की गई है. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्हें पुख्ता सूत्रों से जानकारी मिली है कि ईरान में 800 प्रदर्शनकारियों को होने वाली फांसी टल गई है. व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ईरान के प्रदर्शनकारियों को राहत देने का फैसला US स्ट्राइक से पीछे हटने में बड़ा फैक्टर था.

भ्रामक हो सकती है राहत

ईरान इंटरनेशनल और अन्य ह्यूमन राइट्स रिपोर्ट्स के अनुसार, यह राहत भ्रामक हो सकती है. ईरानी शासन प्रदर्शनकारियों को फांसी के आरोप से इनकार कर रहा है, लेकिन प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों को ‘आतंकी’, ‘देशद्रोही’ जैसी गंभीर कैटेगरी में रीक्लासिफाई कर रहा है –जहां मौत की सजा का प्रावधान है. ईरान के इस्लामिक पीनल कोड में शांतिपूर्ण या अवैध प्रदर्शन के लिए मौत की सजा का प्रावधान नहीं है, आमतौर पर जेल या जुर्माना होता है, लेकिन प्रदर्शनकारियों को पहले ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी’ या ‘उपद्रवी’ कैटेगरी में रखा जाता है, फिर आरोप बदलकर ‘आतंकवाद’ जैसी धाराओं में डाला जाता है.

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ईरान में कानूनी खेल क्या है?

राज्य का दावा तकनीकी रूप से सही है कि प्रदर्शनकारियों को फांसी नहीं दी जाती, क्योंकि आरोप बदलने के बाद वे ‘प्रदर्शनकारी’ नहीं रहते. मौत की सजा तभी लगती है जब गतिविधि को ज्यादा गंभीर अपराध में रीक्लासिफाई किया जाता है. उदाहरण देखा जाए तो एरफान सोल्तानी के मामले में मौत की सजा की खबरें आईं, लेकिन न्यायपालिका ने इनकार किया और कहा कि आरोप राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ साजिश है, जो मौत की सजा नहीं देते. लेकिन परिवार और ह्यूमन राइट्स ग्रुप्स ने इसे पोस्टपोनमेंट बताया. लेकिन असल में शासन की सख्ती जारी है – सिर्फ शब्दों का खेल है. प्रदर्शनों में हजारों मौतें हो चुकी हैं, और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है.

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Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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