ईरान के झंडे की कहानी… नए-पुराने में क्या है अंतर? इस्लामी क्रांति ने बदल दिया इतिहास

झंडे में नजर आने वाले रंगों का भी अपना अलग महत्व था, जिसमें हरा रंग इस्लाम-समृद्धि, सफेद रंग शांति और लाल रंग साहस-बलिदान का प्रतीक था. ध्वज 1979 की इस्लामी क्रांति तक शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासनकाल का आधिकारिक प्रतीक रहा.

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ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच अब देश का राष्ट्रीय ध्वज सुर्खियों में है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पुराने ईरानी झंडे का ईमोजी नजर आने लगा है, वहीं, लंदन स्थित ईरानी दूतावास पर बीते दिनों एक व्यक्ति ने नया झंडा हटाकर पुराना फहरा दिया. प्रदर्शनकारी ईरान के पुराने झंडे फहरा रहे हैं और जगह-जगह उसे लगा रहे हैं. नए और पुराने झंडे के बीच शुरू हुई ये जंग इतिहास की दिलचस्प कहानी बयां करती है.

ईरान का नए और पुराने झंडे के बीच जंग


ईरान में मुख्य रूप से दो झंडों की चर्चा है, पहला राजशाही काल का पुराना ध्वज जिसमें ध्वज के बीच शेर की आकृति बनी हुई है और दूसरा 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद का वर्तमान ध्वज. आपको जानकर हैरानी होगी कि पुराने झंडे का इतिहास लगभग 3000 वर्ष पुराना है. हरा, सफेद और लाल रंग के इस झंडे के बीच में सफेद पट्टी के ऊपर शेर और सूर्य का प्रतीक बना था. ये आकृति शक्ति-साहस और ईरानी धर्मों में दिव्यता का प्रतीक थी. शेर के पंजे में तलवार न्याय और रक्षा का प्रतीक मानी जाती थी.

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इस्लामी क्रांति के बाद बदल गया इतिहास


झंडे में नजर आने वाले रंगों का भी अपना अलग महत्व था, जिसमें हरा रंग इस्लाम-समृद्धि, सफेद रंग शांति और लाल रंग साहस-बलिदान का प्रतीक था. यह ध्वज 1979 की इस्लामी क्रांति तक शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासनकाल का आधिकारिक प्रतीक रहा. इस्लामी क्रांति के बाद धार्मिक नेतृत्व ने झंडे से शेर और सूर्य का प्रतीक हटा दिया, साथ में कई और बदलाव किए. वर्तमान ध्वज में हरा, सफेद और लाल रंग बरकरार हैं, लेकिन सफेद पट्टी पर ‘अल्लाहु अकबर’ 22 बार लिखा हुआ है.

पुराने झंडा क्यों चाहते हैं प्रदर्शनकारी?


यह संख्या इस्लामी क्रांति की सफलता के ईरानी कैलेंडर के अनुसार बहमन मास की 22 तारीख को रेफर करती है. प्रदर्शनकारी पुराने झंडे को इसलिए वापस लाना चाहते हैं, क्योंकि वो धार्मिक कट्टरता से मुक्ति और प्राचीन गौरवशाली पहचान की वापसी चाहते हैं. निर्वासित ईरानी राजकुमार के आह्वान पर चल रहा ये विरोध खामेनेई के खिलाफ है. वहीं, खामेनेई ने राजकुमार को अमेरिकी साजिश करार दिया है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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