अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ को गैरकानूनी करार देकर उन्हें तगड़ा झटका दिया है. चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई में 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले में कहा गया कि राष्ट्रपति के पास इस तरह टैरिफ लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रंप ने टैरिफ लगाने के लिए साल 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ का गलत इस्तेमाल किया है. यह कानून राष्ट्रपति को केवल राष्ट्रीय आपातकाल के समय व्यापार नियंत्रित करने की शक्ति देता है, जबकि ट्रंप ने बिना किसी इमरजेंसी के इसका प्रयोग किया जो पूरी तरह से कानून का उल्लंघन है. सबसे अधिक रेवेन्यू साल 2022 में 108 अरब डॉलर दर्ज किया गया और सबसे कम रेवेन्यू साल 2016 में 33 अरब डॉलर था.
टैरिफ से ट्रंप सरकार को हुई कितनी कमाई?
भले ही अदालत ने ट्रंप के इस कदम को अवैध ठहराया हो, लेकिन इससे अमेरिकी खजाने में जमकर पैसा आया है. साल 2025 में ट्रंप के टैरिफ अटैक की वजह से अमेरिका के राजस्व में तूफानी उछाल देखने को मिला. आंकड़ों के अनुसार बीते साल टैरिफ से होने वाली कमाई 195 अरब डॉलर से लेकर 217 अरब डॉलर के बीच रही है. अगर पिछले सालों से तुलना करें तो साल 2016 में यह केवल 33 अरब डॉलर थी और 2024 में 77 अरब डॉलर तक पहुंची थी. ट्रंप की नीतियों ने महज एक साल में इस कमाई को ढाई गुना से ज्यादा बढ़ा दिया, जिसने अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए रेवेन्यू का एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया.
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| साल | टैरिफ रेवेन्यू |
| 2016 | 33 अरब डॉलर |
| 2017 | 34 अरब डॉलर |
| 2018 | 41 अरब डॉलर |
| 2019 | 71 अरब डॉलर |
| 2020 | 63 अरब डॉलर |
| 2021 | 85 अरब डॉलर |
| 2022 | 108 अरब डॉलर |
| 2023 | 89 अरब डॉलर |
| 2024 | 77 अरब डॉलर |
इमरजेंसी कानून का गलत इस्तेमाल
डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालते ही 2 अप्रैल को कई देशों पर ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ लगाने का एलान कर दिया था, जिसे उन्होंने ट्रेड वॉर में अमेरिका की मजबूती बताया था. कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि राष्ट्रपति ने आर्थिक लाभ के लिए जिस इमरजेंसी कानून को हथियार बनाया, वह उसकी मूल भावना के खिलाफ था. पेन-व्हार्टन बजट मॉडल के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक केवल इस विशेष कानून के तहत ही 175 अरब डॉलर से अधिक की राशि इकट्ठा की गई थी. ट्रंप को उम्मीद थी कि इन शुल्कों से आने वाले एक दशक में खरबों डॉलर की आय होगी, लेकिन कोर्ट के इस सख्त रुख ने अब उनकी सभी उम्मीदों और भविष्य की योजनाओं पर पानी फेर दिया है.
आर्थिक भविष्य पर मंडराता संकट
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि वसूले गए अरबों डॉलर का क्या होगा और क्या ट्रंप प्रशासन कोई नया रास्ता निकालेगा. ट्रंप ने इन शुल्कों को अमेरिका की ‘आर्थिक आजादी’ का नाम दिया था, लेकिन अब उन्हें कानूनी मोर्चे पर हार का सामना करना पड़ा है. इस फैसले से उन देशों को बड़ी राहत मिली है जो ट्रंप के टैरिफ अटैक की वजह से आर्थिक दबाव झेल रहे थे. अब देखना यह होगा कि व्हाइट हाउस इस कानूनी अड़चन से निकलने के लिए क्या कोई नया पैंतरा अपनाता है या फिर अमेरिका को अपनी इस भारी भरकम कमाई वाले रास्ते को हमेशा के लिए बंद करना पड़ेगा.










