People Life in Crisis in Afghanistan: गाजा की तरह अफगानिस्तान में भी मानवीय जीवन पर संकट गहराया है. गाजा में लोग इजरायल और हमास की जंग के कारण भुखमरी और गरीबी का शिकार थे, लेकिन अफगानिस्तान में जलवायु परिवर्तन का दंश लोग झेल रहे हैं. जी हां, अफगानिस्तान में लोग पिछले 5 साल से मौसम की मार झेल रहे हैं. करीब 25 राज्य सूखे की चपेट में हैं और 2 करोड़ लोग भुखमरी झेल रहे हैं. वहीं अब बर्फबारी और फ्लैश फ्लड लोगों को मौत के मुंह में धकेल रही है.
🔴 Severe flooding overturns a truck on the highway between Herat and Kandahar in Afghanistan, near Dasht-e Bakwa. pic.twitter.com/ER89GSjROf
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5 साल के सूखे के बाद बारिश-बर्फबारी
दिसंबर 2025 के आखिर में अफगानिस्तान के मध्य, उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों में सीजन की पहली बारिश और बर्फबारी हुई. करीब 5 साल से सूखे की मार झेल रहे इलाकों में भारी बारिश के कारण अचानक फ्लैश फ्लड आ गई, जिसने हेरात स्टेट में भारी तबाही मचाई. करीब 17 लोगों की मौत हुई है और 1800 परिवार बेघर हो गए हैं. फ्लैश फ्लड से जहां खेती-बाड़ी को नुकसान पहुंचा, वहीं लोगों के पालतू पशु-पक्षी भी मारे गए. अकेले कबकान जिले में एक परिवार घर समेत मलबे में दब गया.
जलवायु परिवर्तन के कारण बदले हालात
नेशनल डिसास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (ANDMA) के अनुसार, अफगानिस्तान में 5 साल के सूखे के बाद अचानक बारिश-बर्फबारी जलवायु परिवर्तन का कारण है. देश का कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और जंगलों की कटाई ने जलवायु परिवर्तन को और गंभीर बना दिया है. अफगानिस्तान के हालातों को देखते हुए यूनाइटेड नेशन्स ने साल 2026 में 1.7 अरब डॉलर की आर्थिक मदद देने की अपील अफगानिस्तान से की है, क्योंकि देश के करीब 21 मिलियन यानी 2 करोड़ लोग मदद के मोहताज हैं.
#Flooding has severely affected western & south-western provinces of #Afghanistan. Shindand in #Herat 👇, among other areas, has been particularly hard hit by last night’s heavy #rainfall. With proper infrastructure, these precious rains could have brought prosperity. #water https://t.co/2fOKLT1Odu pic.twitter.com/vvEiHOT3yX
— Najibullah Sadid 🇦🇫 (@NajibSadid) December 30, 2025
ग्लोबल ग्रीन हाउस उत्सर्जन में योगदान नहीं
अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मदद के साथ वाटर मैनेजमेंट और रिन्यूएबल एनर्जी की भी जरूरत है, लेकिन अफगानिस्तान के राजनीतिक हालात इंटरनेशनल फंडिंग के लिए बाधा हैं. ग्लोबल ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में अफगानिस्तान का योगदान न के बराबर है, इसलिए अफगानिस्तान जलवायु परिवर्तन से बहुत ज्यादा प्रभावित है. अफगानिस्तान पहाड़ों और पत्थरों का देश है, इसलिए वहां हरियाणा कम है. 1950 से अब तक देश के तापमान में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है.
एक तिहाई आबादी है भूखमरी का शिकार
बता दें कि अफगानिस्तान में साल 2025 में 19 राज्यों में सूखा था. देश की करीब 80 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर करती है, लेकिन पिछले 5 साल से सूखे के कारण साल 2026 में एक तिहाई से ज्यादा आबादी भुखमरी का शिकार है. जलवायु परिवर्तन के कारण साल 2024 में सूखे के बीच अचानक हुई बारिश से 5 लाख लोग प्रभावित हुए, वहीं साल 2025 में 90 लाख लोग बेघर हुए. सूखे के कारण लोग भुखमरी झेलते हुए संक्रामक रोगों, कुपोषण और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं.
Latest Flash Floods in Afghanistan as of January 1, 2026)
— Abhijit Pathak (@aajtakabhijit) January 1, 2026
The season's first heavy rains and snowfall have brought relief to a prolonged dry spell in Afghanistan but triggered deadly flash floods across multiple regions. According to Afghanistan's National Disaster Management… pic.twitter.com/ntnyfZ5DD4










