America News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को तांबे के आयात पर संभावित नए टैरिफ की जांच का आदेश दिया है। इस पर व्हाइट हाउस के एक अधिकारी का बयान सामने आया। जिसमें कहा गया कि किसी भी संभावित टैरिफ दर का निर्धारण जांच के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप कोटा की तुलना में टैरिफ को प्राथमिकता देते हैं। जानिए क्या होता है टैरिफ और इससे किन लोगों की जेब पर असर पड़ता है?
क्यों दिया गया आदेश?
डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ दर तय करने के लिए नई जांच का आदेश दिया। जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों, सैन्य हार्डवेयर, अर्धचालकों और उपभोक्ता वस्तुओं (Consumer goods) बनाने के लिए धातु के अमेरिकी उत्पादन को फिर से शुरू किया जा सके। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने नई राष्ट्रीय सुरक्षा जांच शुरू करने का निर्देश देने वाले आदेश पर साइन किए हैं। यह साइन 1962 के व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत किए गए हैं।
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किन देशों पर पड़ेगा असर?
कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक का इस पर कहना है कि ‘अमेरिकी उद्योग और राष्ट्रीय रक्षा तांबे पर निर्भर हैं, इसे अमेरिका में ही बनाया जाना चाहिए। जिसमें किसी तरह की छूट या अपवाद नहीं होना चाहिए। लुटनिक ने कहा, अब तांबे के घर आने का समय आ गया है। कहा जा रहा है कि नए अमेरिकी तांबा टैरिफ से कई देशों पर प्रभाव पड़ेगा। प्रभावित होने वाले देशों में चिली, कनाडा और मैक्सिको का नाम शामिल है।
क्या होता है टैरिफ?
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में टैरिफ या कस्टम ड्यूटी किसी भी सामान के आयात पर लगाया जाने वाले चार्ज होता है। यह चार्ज सरकार को दिया जाता है, जिसका बोझ आमतौर पर उपभोक्ता पर पड़ता है। आसान भाषा में समझें तो, मान लीजिए अगर किसी चीज की कीमत 100 रुपये है, अगर उस पर 10 फीसदी टैरिफ लगाया जाता है, तो उसकी कीमत 110 रुपये तक पहुंच जाएगी। एक तरह से टैरिफ इनडायरेक्ट टैक्स ही होता है। इसे देश की इनकम का सोर्स माना जाता है।
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