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‘बस बहुत हुआ, अब समय आ गया’, ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की लास्ट वार्निंग, रूस-चीन का भी लिया नाम

Donald Trump News: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर सख्त रुख अपना लिया है और एक पोस्ट लिखकर विरोधियों को लास्ट वार्निंग भी दे दी है. राष्ट्रपति ट्रंप ने आक्रामक तेवर के साथ एक सोशल मीडिया पोस्ट लिखकर नाटो और यूरोपीय देशों पर दबाव बनाया है और यह जताया है कि अब पानी सिर से ऊपर हो गया है.

Author Edited By : khushbu.goyal
Updated: Jan 19, 2026 12:59
Donald Trump
राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो देशों के प्रति बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है.
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Donald Trump vs Greenland: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर आखिरी वार्निंग दे दी है. उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर और सख्त रूख अपना लिया है. ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर दावा किया कि नाटो ने डेनमार्क को चेतावनी दी थी कि वह ग्रीनलैंड में रूस की दखलंदाजी को खत्म करे, लेकिन डेनमार्क ने कोई एक्शन नहीं लिया. लेकिन अब यह होकर रहेगा, इसे करने का समय आ गया है और यह अब अमेरिका करेगा, ग्रीनलैंड पर कब्जा करके रहेगा. ट्रंप की इस पोस्ट से डेनमार्क समेत विरोधियों पर दबाव बढ़ सकता है.

यह भी पढ़ें: ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ क्या है? गाजा में शांति के लिए भारत को मिला न्योता, जानिए क्या है US का पूरा प्लान

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यूरोपीय संघ का अमेरिका पर टैरिफ का ऐलान

बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप ने यह पोस्ट यूरोपीय संघ की आपात बैठक में लिए गए फैसलों के बाद लिखी हैं, जिसमें यूरोपीय संघ ने फैसला किया कि वह यूरोप के बाजारों से अमेरिका को बाहर करेगा. 6 फरवरी से अमेरिका पर 9767 करोड़ रुपये का टैरिफ लगाएगा. इससे पहले ट्रंप ने 1 फरवरी 2026 से डेनमार्क समेत 7 नाटो देशों नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया, जो 1 जून से 25 प्रतिशत हो जाएगा.

पहले ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश करेंगे

बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है. अमेरिका के गोल्डन डोम के सपने को पूरा करने के लिए अहम भौगोलिक क्षेत्र बताया है. हालांकि वर्ष 1700 से ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का कब्जा है, लेकिन अमेरिका कई सालों से ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब अगर अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीद नहीं पाया तो उस पर कब्जा करने के अलावा अमेरिका के पास कोई ऑप्शन नहीं है.

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नाटो और यूरोपीय देश ट्रंप से सहमत नहीं

बता दें कि डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री म्यूटे बोरुप एगेडे राष्ट्रपति ट्रंप से कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और यूरोपीय-नाटो देश चाहते हैं कि ग्रीनलैंड को अपने भविष्य का फैसला खुद लेने का हक है. वहीं ग्रीनलैंड को लोग भी डेनमार्क से निकलकर अमेरिका की दास्ता में नहीं रहना चाहते. विरोध होते देख ट्रंप ने एक्शन लेने की कोशिश की तो नाटो देशों ने किसी ने न डरने की चेवानी ट्रंप को दे डाली.

बता दें कि अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच बातचीत के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति बनी है, लेकिन ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर तीनों के बीच तनाव बरकरार है.

First published on: Jan 19, 2026 12:15 PM

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