'बस बहुत हुआ, अब समय आ गया', ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की लास्ट वार्निंग, रूस-चीन का भी लिया नाम

Donald Trump News: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर सख्त रुख अपना लिया है और एक पोस्ट लिखकर विरोधियों को लास्ट वार्निंग भी दे दी है. राष्ट्रपति ट्रंप ने आक्रामक तेवर के साथ एक सोशल मीडिया पोस्ट लिखकर नाटो और यूरोपीय देशों पर दबाव बनाया है और यह जताया है कि अब पानी सिर से ऊपर हो गया है.

Donald Trump

राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो देशों के प्रति बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है.

Donald Trump vs Greenland: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर आखिरी वार्निंग दे दी है. उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर और सख्त रूख अपना लिया है. ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर दावा किया कि नाटो ने डेनमार्क को चेतावनी दी थी कि वह ग्रीनलैंड में रूस की दखलंदाजी को खत्म करे, लेकिन डेनमार्क ने कोई एक्शन नहीं लिया. लेकिन अब यह होकर रहेगा, इसे करने का समय आ गया है और यह अब अमेरिका करेगा, ग्रीनलैंड पर कब्जा करके रहेगा. ट्रंप की इस पोस्ट से डेनमार्क समेत विरोधियों पर दबाव बढ़ सकता है.

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यूरोपीय संघ का अमेरिका पर टैरिफ का ऐलान

बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप ने यह पोस्ट यूरोपीय संघ की आपात बैठक में लिए गए फैसलों के बाद लिखी हैं, जिसमें यूरोपीय संघ ने फैसला किया कि वह यूरोप के बाजारों से अमेरिका को बाहर करेगा. 6 फरवरी से अमेरिका पर 9767 करोड़ रुपये का टैरिफ लगाएगा. इससे पहले ट्रंप ने 1 फरवरी 2026 से डेनमार्क समेत 7 नाटो देशों नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया, जो 1 जून से 25 प्रतिशत हो जाएगा.

पहले ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश करेंगे

बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है. अमेरिका के गोल्डन डोम के सपने को पूरा करने के लिए अहम भौगोलिक क्षेत्र बताया है. हालांकि वर्ष 1700 से ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का कब्जा है, लेकिन अमेरिका कई सालों से ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब अगर अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीद नहीं पाया तो उस पर कब्जा करने के अलावा अमेरिका के पास कोई ऑप्शन नहीं है.

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नाटो और यूरोपीय देश ट्रंप से सहमत नहीं

बता दें कि डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री म्यूटे बोरुप एगेडे राष्ट्रपति ट्रंप से कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और यूरोपीय-नाटो देश चाहते हैं कि ग्रीनलैंड को अपने भविष्य का फैसला खुद लेने का हक है. वहीं ग्रीनलैंड को लोग भी डेनमार्क से निकलकर अमेरिका की दास्ता में नहीं रहना चाहते. विरोध होते देख ट्रंप ने एक्शन लेने की कोशिश की तो नाटो देशों ने किसी ने न डरने की चेवानी ट्रंप को दे डाली.

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बता दें कि अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच बातचीत के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति बनी है, लेकिन ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर तीनों के बीच तनाव बरकरार है.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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