Crude Oil Price Crash: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। वैश्विक तनाव के बीच एक समय 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका कच्चा तेल अब क्रैश होकर 70 डॉलर के करीब आ पहुंचा है। गुरुवार को इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) का दाम फिसलकर 70.60 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) भी गिरकर 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है। कच्चे तेल की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट से भारत समेत दुनिया भर के देशों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सच साबित हुई डोनाल्ड ट्रंप की भविष्यवाणी
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस गिरावट के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह भविष्यवाणी सच साबित हो गई है, जो उन्होंने मई के महीने में की थी। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा था कि ईरान समझौता करने के लिए बेताब है और उनके आते ही कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में भारी गिरावट आएगी। इसके बाद जून में अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर बात बनी, जिससे बाजार में सकारात्मक संदेश गया। इसके साथ ही दिग्गज ब्रोकरेज फर्म 'एमके ग्लोबल' का वह अनुमान भी समय से पहले सच साबित हो गया है, जिसमें उन्होंने चालू वित्त वर्ष के अंत तक तेल की कीमतें गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल तक आने की बात कही थी।
होर्मुज रूट बंद, फिर भी क्यों गिरा दाम?
हैरानी की बात यह है कि दुनिया की 20 फीसदी तेल सप्लाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) अभी भी पूरी तरह से नहीं खुला है। हाल ही में ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर किए गए हमलों से तनाव दोबारा बढ़ा था। इसके बावजूद तेल सस्ता होने की मुख्य वजह कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सकारात्मक बातचीत है। दोनों पक्ष अगली बैठक के लिए सहमत हो गए हैं, जिससे सप्लाई रुकने का खतरा कम हुआ है। इसके अलावा ओपेक प्लस (OPEC+) देशों द्वारा प्रोडक्शन बढ़ाना और यूएई व सऊदी अरब जैसे देशों से सप्लाई सुचारू रहने की उम्मीद ने तेल के दामों पर दबाव बनाया है।
Crude Oil Price Crash: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। वैश्विक तनाव के बीच एक समय 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका कच्चा तेल अब क्रैश होकर 70 डॉलर के करीब आ पहुंचा है। गुरुवार को इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) का दाम फिसलकर 70.60 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) भी गिरकर 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है। कच्चे तेल की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट से भारत समेत दुनिया भर के देशों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सच साबित हुई डोनाल्ड ट्रंप की भविष्यवाणी
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस गिरावट के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह भविष्यवाणी सच साबित हो गई है, जो उन्होंने मई के महीने में की थी। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा था कि ईरान समझौता करने के लिए बेताब है और उनके आते ही कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में भारी गिरावट आएगी। इसके बाद जून में अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर बात बनी, जिससे बाजार में सकारात्मक संदेश गया। इसके साथ ही दिग्गज ब्रोकरेज फर्म ‘एमके ग्लोबल’ का वह अनुमान भी समय से पहले सच साबित हो गया है, जिसमें उन्होंने चालू वित्त वर्ष के अंत तक तेल की कीमतें गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल तक आने की बात कही थी।
होर्मुज रूट बंद, फिर भी क्यों गिरा दाम?
हैरानी की बात यह है कि दुनिया की 20 फीसदी तेल सप्लाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) अभी भी पूरी तरह से नहीं खुला है। हाल ही में ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर किए गए हमलों से तनाव दोबारा बढ़ा था। इसके बावजूद तेल सस्ता होने की मुख्य वजह कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सकारात्मक बातचीत है। दोनों पक्ष अगली बैठक के लिए सहमत हो गए हैं, जिससे सप्लाई रुकने का खतरा कम हुआ है। इसके अलावा ओपेक प्लस (OPEC+) देशों द्वारा प्रोडक्शन बढ़ाना और यूएई व सऊदी अरब जैसे देशों से सप्लाई सुचारू रहने की उम्मीद ने तेल के दामों पर दबाव बनाया है।