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दुनिया

जंग के बीच खामेनेई का शव दफनाने के लिए चुना गया ईरान का ये पवित्र शहर, यहीं हुआ था जन्म

Iran-Israel War: ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर मशहद शिया मुसलमानों के लिए अत्यंत पवित्र है, जहां इमाम रजा की दरगाह स्थित है. हर साल लाखों तीर्थयात्री यहां पहुंचते हैं.

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Written By: Akarsh Shukla Updated: Mar 4, 2026 16:27
Ali Khamenei
इजरायल और अमेरिका का टारगेट ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई थे।

अमेरिका और इजरायल संग जंग के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का शव देश के सबसे पवित्र शहरों में शुमार मशहद में दफनाने की तैयारी चल रही है. ईरान की सेमी-ऑफिशियल फार्स न्यूज एजेंसी के हवाले से AFP ने सूचना दी है कि उत्तर-पूर्वी ईरान स्थित इस शहर में खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा, जो उनकी जन्मभूमि भी है. खास बात यह है कि इसी मशहद में उनके पिता को इमाम रजा की पवित्र दरगाह के अंदर दफनाया गया था.

86 वर्ष की उम्र में हुआ निधन


36 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व करने वाले खामेनेई हाल ही में शुरू हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के दौरान 86 वर्ष की आयु में शहीद हो गए. उनकी मृत्यु का ऐलान सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर किया, जिसकी बाद में ईरानी शासन ने आधिकारिक पुष्टि कर दी. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने टेलीग्राम चैनल पर बताया कि तेहरान में एक भव्य विदाई समारोह का आयोजन होगा, उसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

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आज रात से शुरू होगा अंतिम संस्कार का सिलसिला


तेहरान टाइम्स की खबर के अनुसार, ईरानी समय के हिसाब से आज रात 10 बजे से खामेनेई के शव को अंतिम विदाई दी जाएगी. इमाम खुमैनी मस्जिद में तीन दिवसीय समारोह आयोजित होगा, जबकि सुपुर्द-ए-खाक का सटीक कार्यक्रम अभी अंतिम रूप ले रहा है और जल्द ऐलान किया जाएगा. यह समारोह ईरान के इतिहास में ऐतिहासिक होगा, क्योंकि खामेनेई 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद दूसरे सबसे लंबे समय तक सुप्रीम लीडर रहे. उनके पास रक्षा, अर्थव्यवस्था और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार था.

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शिया इस्लाम का प्रमुख तीर्थस्थल


ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर मशहद शिया मुसलमानों के लिए अत्यंत पवित्र है, जहां इमाम रजा की दरगाह स्थित है. हर साल लाखों तीर्थयात्री यहां पहुंचते हैं. खामेनेई ने तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान के राजनीतिक तंत्र पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी और मध्य पूर्व में देश का प्रभाव बढ़ाया. उनकी विरासत इस क्षेत्र की भू-राजनीति में लंबे समय तक गूंजती रहेगी.

First published on: Mar 04, 2026 04:27 PM

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