
पहले चमगादड़ अब बंदर से जान का खतरा! क्या है Monkey Fever, जो ले रहा जान
Edited By Deepti Sharma

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Monkey Fever: मंकी फीवर या क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (Kyasanur Forest Disease) ने कर्नाटक में दो लोगों की जान ले ली है। यह एक टिक-एक्वायर्ड हेमोरेजिक फीवर, जो आमतौर पर बंदरों को होता है, केएफडी वायरस की वजह से होता है, जो फ्लेविविरिडे फैमिली का एक अर्बोवायरस है। राज्य में अबतक 49 पॉजिटिव मामलों में से अब तक एक 18 साल की लड़की और 79 साल व्यक्ति की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। इसके मामले पश्चिमी घाट के पड़ोसी राज्यों जैसे केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु तक भी फैल गए हैं।
मंकी फीवर जिसे आमतौर पर बंदर बुखार के रूप में जाना जाता है, जिसे पहली बार 1957 में भारत के पश्चिमी घाट में क्यासानूर फॉरेस्ट में पहचाना गया था।
बंदर बुखार का संक्रमण वायरस टिक काटने से होता है या आमतौर पर संक्रमित जानवरों, मुख्य रूप से बंदरों के संपर्क में आने से होता है। लक्षणों में न्यूरोलॉजिकल विशेषताओं के साथ बुखार शामिल है। जबकि लगभग 80% मरीज वायरल के बाद के लक्षणों के बिना ठीक हो जाते हैं। लगभग 20% गंभीर हेमोरेजिक या नर्व संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
टिक काटने के बाद 3 से एक सप्ताह की ऊष्मायन अवधि (Incubation Period) के बाद, बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द और गंभीर थकावट के साथ मंकीफीवर अचानक से शुरू हो जाता है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, इसके लक्षणों में मतली, वोमिटिंग, पेट दर्द, लूज मोशन, मेनिनजाइटिस, भ्रम और यहां तक नाक से खून आना और मसूड़ों से खून आना शामिल हो सकता है।
Monkey Fever क्या है?
वायरस की ऊष्मायन अवधि 3 से लेकर 8 दिन होती है और यह दो या शायद ही कभी चार चरणों में होता है। पहले चरण में, लक्षणों में अचानक बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कंजंक्टिवा में सूजन, वोमिटिंग, पेट में दर्द और लूज मोशन शामिल हैं। क्लिनिकल ट्रायल से लिम्फैडेनोपैथी (Lymphadenopathy), हेपेटो-स्प्लेनोमेगाली(Enlarged Liver), कमजोरी और थकान का पता चलता है।
शुरुआती लक्षणों में अक्सर ठंड लगने के साथ अचानक तेज बुखार आना शामिल है। गंभीर सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द आम है, जिससे संक्रमित व्यक्ति अनहेल्दी महसूस कर सकता है। मतली, वोमिटिंग और लूज मोशन हो सकते हैं, जिससे पाचन पर असर हो सकता है।
कई बार वायरस अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे ऑर्गन फेलियर हो सकता है। गंभीर मामलों में हेमोरेजिक फीवर में बदल सकते हैं। अगर हेमोरेजिक लक्षण बने रहते हैं, तो दूसरी स्टेज में उनींदापन (Excess Sleepiness), भटकाव, भ्रम, ऐंठन जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं आ सकती हैं। हालांकि, ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं, लेकिन कमजोर इम्यूनिटी या अधिक उम्र वाले लोगों को ज्यादा खतरा होता है।
Disclaimer: उपरोक्त जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या हेल्थ एक्सपर्ट की राय अवश्य ले लें। News24 की ओर से कोई जानकारी का दावा नहीं किया जा रहा है।
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