Gaurav Pandey
लिखने-पढ़ने का शौक है। राजनीति में दूर-दूर से रुचि है। अखबार की दुनिया के बाद अब डिजिटल के मैदान में हूं। आठ साल से ज्यादा समय से देश-विदेश की खबरें लिख रहा हूं। दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे संस्थानों में सेवाएं दी हैं।
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उत्तर प्रदेश के हाथरस में बीते दिनों स्वयंभू भोले बाबा के सत्संग में मची भगदड़ में 123 लोगों की जान चली गई थी। यह मामला तब से ही सुर्खियों में बना हुआ है। मामले में एक्शन लिया जा रहा है लेकिन जिस बाबा का कार्यक्रम था उसे लेकर कोई कुछ नहीं बोल रहा है। बता दें कि इस बाबा को साकार विश्व हरि उर्फ भोले बाबा के नाम से जाना जाता है और उसका असली नाम सूरज पाल है। घटना में प्रशासन से लेकर आयोजकों तक सब पर सवाल उठाए जा रहे हैं लेकिन चमत्कारी बाबा को लेकर किसी के मुंह से बोल नहीं फूट रहे।
न तो इस घटना को लेकर दर्ज की गई एफआईआर में बाबा का नाम था और न ही कोई सीधे तौर पर बाबा को दोषी ठहरा रहा है। सत्ता पक्ष अपनी नाकामी की वजह से शांत हो यह तो समझ आता है लेकिन हर मुद्दे पर सरकार की आलोचना करने वाले विपक्षी नेता भी इस मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसा वोट बैंक की राजनीति को देखते हुए किया जा रहा है? बता दें कि बाबा के जिस कार्यक्रम में मौत का तांडव मचा उसमें करीब ढाई लाख लोग मौजूद थे जबकि अनुमति केवल 80,000 लोगों की ली गई थी।
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