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क्या बदलती जीवनशैली समय से पहले लोगों को मौत के मुंह में धकेल रही है?

Bharat Ek Soch: साल 2019 के World Health Organization के आंकड़ों के मुताबिक भारत में हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या 18 करोड़ 80 लाख है। पिछले तीस वर्षों में बीपी के मरीजों की संख्या डबल हो चुकी है। दुनिया में हर तीन में से एक व्यक्ति बीपी का मरीज है। बीपी के हर दो में से एक मरीज को पता नहीं है कि उसे इस तरह की कोई बीमारी भी है।

Anurradha Prasad
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Bharat Ek Soch: गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस में एक चौपाई है – दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, रामराज काहू नहीं व्यापा। मतलब, त्रेतायुग में श्रीराम के राज्य में लोगों को दैहिक यानी बीमारी, दैविक यानी प्राकृतिक आपदा और भौतिक यानी आर्थिक परेशानियां नहीं थीं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि जिंदगी जीने का वो कौन सा सलीका था, जिसमें इंसान बीमारियों से आजाद था। इतिहास के किसी कालखंड में कभी ऐसा दौर था भी या नहीं। ये एक रिसर्च का विषय है- लेकिन, हजारों साल पहले लिखा गया आयुर्वेद इस बात का सबूत है कि भारत एक बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली को लेकर कितना सचेत और कितनी आगे की सोच रखता था।

लोग बीमारियों को अपने शरीर में पाल-पोस रहे 

चुनावी माहौल को देखते हुए राजनेता बात जाति के जोड़-तोड़ की कर रहे हैं। हिंदू-मुस्लिम की कर रहे हैं। राष्ट्रवाद की कर रहे हैं। फ्रीबीज की कर रहे हैं। मुफ्त दवाई की बात कर रहे हैं। लेकिन इस बात पर ईमानदारी से मंथन नहीं हो रहा है कि भारत के लोग तेजी से बीमार होते जा रहे हैं। कोई ज्यादा नमक खाने से बीमार हो रहा है। किसी की खुशियां चीनी छीन रही है। किसी की आंखों से दिनों-दिन नींद कम होती जा रही है। कोई स्मार्टफोन में इतना घुसा है कि परिवार और दोस्तों के बीच भी तन्हा है। भारत में करोड़ों लोग कई ऐसी गंभीर बीमारियों को अपने शरीर में पाल-पोस रहे हैं- जो उनकी उम्र तेजी से कम कर रही हैं। जो अकाल मृत्यु की भी बड़ी वजह बन रही हैं।

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First published on: Mar 02, 2024 09:23 PM

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About the Author

Anurradha Prasad

अनुराधा प्रसाद के लिए पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं...मिशन है। अपनी साढ़े तीन दशक की टेलीविजन पत्रकारिता में हर तरह का प्रयोग देखा...हर बदलाव की साक्षी रहीं... एक तेज-तर्रार रिपोर्टर से सफल मीडिया उद्यमी बनीं....अपनी तेज नज़र, दूरदर्शी सोच और कलम के दम पर मीडिया जगत में एक दमदार हस्ताक्षर हैं। अनुराधा प्रसाद जी न्यूज़ 24 की एडिटर-इन-चीफ और बीएजी नेटवर्क की सीएमडी हैं  । बतौर टेलीविजन पत्रकार हर भारतीय की आवाज बुलंद करने की ईमानदार कोशिश किया और हमेशा Think First के फलसफे पर आगे बढ़ने में यकीन करती हैं। न्यूज़ 24 पर इतिहास गवाह है...सीरीज के जरिए दर्शकों को अतीत के पन्नों से रू-ब-रू करवाती रही हैं.. तो भारत भाग्य विधाता जैसी सीरिज के जरिए उन संस्थाओं और व्यक्तियों से दर्शकों का परिचय कराया- जो आजाद भारत में लोकतंत्र को  मजबूत और गणतंत्र को बुलंद बनाने में खामोशी से कर्मयोगी की भूमिका में हैं। इसी तरह भारत एक सोच के जरिए वक्त से आगे की सोच से भी दर्शकों का साक्षात्कार कराती रही हैं । ये अनुराधा प्रसाद की मुखर और प्रखर सोच का ही नतीजा है कि न्यूज़ 24 पर माहौल क्या है-कार्यक्रम में आम आदमी की आवाज को  पूरी तवज्जो मिलती है...तो India’s Tiger जैसी टेली सीरीज के जरिए उन गुमनाम जासूसों के योगदान से भी दर्शकों तो मिलवाने का भगीरथ प्रयास हो रहा है, जो खामोशी से अपना काम कर नेपथ्य में चले गए । मंथन का मंच सजा कर समाज और सिस्टम के असरदार लोगों की सोच से दर्शकों का साक्षात्कार कराती रही हैं । 1990 के दशक में प्रसारित आपके The horse's mouth और Let’s Talk शो ने भारतीय टेलीविजन को चर्चित शख्सियतों के इंटरव्यू का नया अंदाज दिया...तो आमने-सामने में आपके तीखे सवालों का देश के ज्यादातर सियासतदानों ने सामना किया। आपकी अगुवाई में बीएजी नेटवर्क ने सामाजिक सरोकार और जागरूकता के संदेश वाले कई कार्यक्रम बनाए तो चुनावी मौसम में नेताओं के चाल, चरित्र और चेहरे को भी रोचक अंदाज में दर्शकों के सामने रखने का सफल प्रयोग किया । अनुराधा प्रसाद भारत में टेलीविजन पत्रकारिता में पहली पीढ़ी की पत्रकार हैं...जिन्होंने अपनी बुलंद सोच और नए-नए शोज से भारतीय टेलीविजन न्यूज़ का चेहरा बदला । अनुराधा प्रसाद भारत को समर्पित एक ऐसी शख्सियत हैं... जो पत्रकारिता के जरिए हमेशा समाज को कुछ नया देने के मिशन में पूरी शिद्दत से जुटी रहती हैं...जुटी हुई हैं और जुटी रहेंगी।

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