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फर्जी डिग्री के सहारे पाकिस्तानी HC में फैसले सुनाता रहा ‘मुन्ना भाई’ जज, 5 साल बाद खुली पोल

इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने 23 फरवरी को 116 पन्नों का विस्तृत फैसला सुनाते हुए अपने ही एक जज, तारिक महमूद जहांगीरी को पद से हटा दिया. जहांगीरी को दिसंबर 2020 में हाई कोर्ट में नियुक्त किया गया था.

Author Edited By : Arif Khan
Updated: Feb 24, 2026 23:44

पाकिस्तान का एक जज पांच साल तक कानून की फर्जी डिग्री के साथ इस्लामाबाद हाई कोर्ट में फैसले सुनाता रहा. फर्जी डिग्री वाले जज का पता पांच साल बाद चल पाया. जिस कोर्ट में वह 5 साल तक बैठता रहा, उसने उसकी डिग्री को अमान्य घोषित कर दिया है. पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने 23 फरवरी को 116 पन्नों का विस्तृत फैसला सुनाते हुए अपने ही एक जज, तारिक महमूद जहांगीरी को पद से हटा दिया. जहांगीरी को दिसंबर 2020 में हाई कोर्ट में नियुक्त किया गया था. पिछले साल सितंबर में उसे जज के रूप में न्यायिक कार्य करने से रोक दिया गया था.

हाई कोर्ट को कराची विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने जो मूल रिकॉर्ड मुहैया करवाए, उनके आधार पर फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि जहांगीरी के शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी थे.

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फैसले में कहा गया कि मई 1988 में जहांगीरी ने एक फर्जी एनरोलमेंट नंबर यूज करते हुए एग्जाम दिया था. उसे परीक्षा में नकल करते हुए पकड़ा गया था और 1989 में यूनिवर्सिटी ने उस पर तीन साल का बैन लगा दिया था. उसने फिर अगले साल धोखाधड़ी का सहारा लिया और ‘तारिक जहांगीरी’ के नाम से फिर से परीक्षा दी. इसके लिए उसने वो एनरोलमेंट नंबर यूज किया, जो दूसरे छात्र इम्तियाज अहमद नाम को दिया गया था.

इसके अलावा, गवर्नमेंट इस्लामिया लॉ कॉलेज के प्रिंसिपल ने कोर्ट को बताया कि उसने इस संस्थान में कभी एडमिशन लिया ही नहीं. फैसले में कोर्ट ने जिक्र किया है कि जहांगीरी को मूल दस्तावेज और लिखित जवाब देने के लिए कई मौके दिए गए, लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रहा.

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First published on: Feb 24, 2026 11:44 PM

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