आमतौर पर किसी मंदिर में मांस-मछली खाना पाप माना जाता है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मंदिरों में ये आम बात है. उनके लिए ये एक परंपरा है. लेकिन जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी कोलकाता के जाने-माने कालीघाट मंदिर में मछली खाते नजर आए, तो वो चर्चा का विषय बन गए. वो गुरुवार शाम कोशिकी अमावस्या के मौके पर वो मंदिर पहुंचे थे, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है. सीएम सुवेंदु वीडियो में जमीन पर बैठकर भोग खा रहे थे और उनकी थाली में साफ दिखाई दे रहा था मछली का सिर, जोकि कालीघाट के भोग की खास पहचान है.
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बीजेपी का क्या कहना है?
दरअसल, कालीघाट में मां काली को मछली और बकरे की बलि चढ़ावे में दी जाती है. फिर इसी को प्रसाद के तौर पर बांटा जाता है. बीजेपी को अकसर ये कहा जाता है कि वो बार-बार बंगाल के लोगों को नॉनवेज खाने से रोकते हैं, लेकिन बीजेपी ने हमेशा से इन आरोपों को नकारा है. सीएम सुवेंदु का वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी का कहना है कि शाकाहारी-मांसाहारी वाली बहस खत्म होनी चाहिए. बीजेपी के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, ''इस विवाद को वहीं खत्म हो जाना चाहिए. कालीघाट में सीएम सुवेंदु मां काली के पारंपरिक मछली भोग में शामिल होते हैं- जो बंगाल की आस्था, परंपराओं और जीवन शैली के प्रति सम्मान दिखाता है. उनके नेतृत्व में BJP हमेशा बंगाल के हितों, बंगाल की परंपराओं और बंगाल के लिए जो सही है, उसके लिए मजबूती से खड़ी रहेगी.''
बाबा बागेश्वर ने उठाया था मुद्दा
जन्माष्टमी के मौके पर बाबा बागेश्वर के नाम से मशहूर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हनुमान कथा सुनाने के लिए पश्चिम बंगाल के लिलुआ में पधारे थे. इस दौरान उनके लोगों से अपील की है कि दुर्गा पूजा के वक्त वो माता की मूर्ति के आसपास मांस-मछली के स्टॉल ना लगाएं. उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान मांस खाने वाले हिंदू धर्म का अपमान कर रहे हैं. कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान के बाद इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि क्या अब सुवेंदु सरकार दुर्गा पूजा के दौरान मांस-मछली बैन करने वाली है. बाबा बागेश्वर का कहना था कि दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों के आसपास नॉन-वेज खाना, पकाना या बेचना उन्हें कतई अच्छा नहीं लगता. उन्होंने हनुमंत कथा सुनाते हुए दौरान बंगाल में रहने वाले हिंदुओं से अपील की है कि वो नवरात्रि मनाएं.
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