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ताजमहल पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा, पहली बार सुरक्षा दीवारों तक पहुंचा यमुना नदी का पानी

मुगल बादशाह शाहजहां के प्यार की निशानी ताजमहल पर इन दिनों बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। दरअसल मानसून के चलते इस बार बारिश ने पिछले कुछ सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। भारी बारिश और हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी की वजह से यमुना नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है।

मुगल बादशाह शाहजहां के प्यार की निशानी ताजमहल पर इन दिनों बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। ताजमहल की दीवारों के करीब से यमुना नदी बहती है। यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि पिछले करीब 50 सालों में पहली बार नदी का पानी ताजमहल की पिछली सुरक्षा दीवारों तक पहुंच गया है। इससे पुरातत्व विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। प्रशासन लगातार यमुना के जलस्तर पर नजर रख रही है।

बारिश और बैराज का पानी से खड़ा हुआ संकट

मानसून के चलते इस बार बारिश ने पिछले कुछ सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। भारी बारिश और हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी की वजह से यमुना नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। जिसकी वजह से नदी का पानी ताजमहल की पिछली सुरक्षा दीवारों तक पहुंच गया है। जिससे ताजमहल को नुकसान होने का डर है। बताया जा रहा है कि यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से आगरा और मथुरा के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं।

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खतरे के निशान से ऊपर बह रही यमुना

यमुना का जलस्तर 495.5 फीट तक पहुंचने वाला है, जो 2023 की बाढ़ के स्तर के करीब है। 2023 में भी ताजमहल की दीवारों से पानी टकराया था। यहां बाढ़ का उच्च स्तर 508 फीट है। जलस्तर और बढ़ने के संकेत हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए, ताजमहल की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ ने अपना कैंप हटा लिया है और बाढ़ प्रभावित इलाके को बंद कर दिया गया है।

यमुना से सटे 40 गांवों में बाढ़ का अलर्ट

यमुना के बढ़ते जलस्तर से आगरा और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने आगरा के करीब 40 गांवों में अलर्ट जारी कर दिया है। लोगों को यमुना की ओर न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। यमुना का पानी खेतों में भी घुस रहा है। 80-85 किलोमीटर दूर तीर्थस्थल बटेश्वर में घाट की सीढ़ियां भी डूब गई हैं और वहां स्नान पर रोक लगा दी गई है। स्थानीय पुलिस इन इलाकों में लगातार गश्त कर रही है।

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1978 आई थी भयानक बाढ़

स्थानीय लोगों को 1978 की भयानक बाढ़ याद आ रही है, जब यमुना का जलस्तर 508 फीट तक पहुंच गया था और पानी ताजमहल के द्वार तक पहुंच गया था। उस समय कई मंदिर भी जलमग्न हो गए थे। हालांकि अब तक इतनी बड़ी बाढ़ नहीं आई है, लेकिन मौजूदा हालात खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं।

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ताजमहल को नहीं है खतरा

पुरातत्व विभाग का कहना है कि ताजमहल को कोई खतरा नहीं है, क्योंकि यह एक ऊंचे चबूतरे पर बना है और इसे बाढ़ को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था। फिर भी, स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

First published on: Aug 19, 2025 04:56 PM

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