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उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड

माघ मेले में हंगामा! लाठी-डंडों से लैस युवकों ने किया अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर का घेराव, पुलिस कार्रवाई की मांग

शिविर व्यवस्थापक ने तहरीर में स्पष्ट किया है कि शरारती तत्वों ने शिविर की संपत्ति और वहां ठहरने वाले श्रद्धालुओं को गंभीर खतरे में डाल दिया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्वयं अपनी जान को खतरा बताया है.

Author Written By: Akarsh Shukla Updated: Jan 25, 2026 00:20

संगम नगरी के पावन माघ मेले में तनाव चरम पर पहुंच गया है. शनिवार की शाम शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के बाहर लाठी-डंडों से लैस असामाजिक तत्वों ने हंगामा मचा दिया. कल्पवासी थाने में शिविर व्यवस्थापक पंकज पांडेय की ओर से दी गई तहरीर के अनुसार, शाम छह बजे से सात बजे के बीच भगवा झंडे लहराते युवक शिविर परिसर में घुसने की कोशिश करने लगे. इन उपद्रवियों ने न केवल जबरन प्रवेश का प्रयास किया, बल्कि मारपीट पर भी उतारू हो गए. शंकराचार्य के सेवकों ने इन्हें खदेड़ा तो हाथापाई की नौबत आ गई. यह घटना उस समय घटी जब स्वामीजी पिछले सात दिनों से शिविर के बाहर धरना दे रहे थे.

अविमुक्तेश्वरानंद की जान को खतरा!


शिविर व्यवस्थापक ने तहरीर में स्पष्ट किया है कि शरारती तत्वों ने शिविर की संपत्ति और वहां ठहरने वाले श्रद्धालुओं को गंभीर खतरे में डाल दिया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्वयं अपनी जान को खतरा बताया है. तहरीर में मांग की गई है कि एफआईआर दर्ज हो, दोषियों पर कठोर वैधानिक कार्रवाई हो और शिविर परिसर व आसपास पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में ऐसी कोई अनहोनी घटित होती है तो मेला प्रशासन व स्थानीय पुलिस जिम्मेदार होगी. घटना के बाद स्वामीजी ने पालकी छोड़कर वैनिटी वैन में शरण ली है, जो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है.

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क्या है पूरा विवाद?


यह विवाद मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान पालकी के साथ स्वामीजी को रोकने से उपजा था. तब से वे त्रिवेणी मार्ग उत्तरी पटरी पर सेक्टर चार स्थित शिविर के बाहर अनशनरत थे. सातवें दिन यह नया संकट आ खड़ा हुआ. माघ मेले के दौरान संगम रेती पर लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बीच ऐसी घटनाएं सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा रही हैं. मेला प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन स्थानीय पुलिस ने तहरीर संज्ञान में ले ली है. धार्मिक आयोजनों में इस तरह के तनाव से माहौल खराब होने का अंदेशा है.

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First published on: Jan 24, 2026 11:43 PM

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