Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की निराला एस्टेट सोसायटी में लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या ने निवासियों का जीना मुश्किल कर दिया है। स्थिति यह है कि लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को सोसायटी परिसर में अकेले बाहर भेजने से घबरा रहे हैं। कई बार यह कुत्ते राह चलते लोगों पर अचानक हमला कर देते है जिससे डर और तनाव का माहौल बना हुआ है।
बेसमेंट में सबसे ज्यादा समस्या
निवासी विशाल और सौरभ ने बताया कि सोसायटी में लावारिस कुत्तों की समस्या अब एक गंभीर खतरा बन चुकी है। आए दिन किसी न किसी पर कुत्तों के काटने या हमला करने की घटनाएं सामने आती है। सबसे ज्यादा समस्या बेसमेंट और पार्किंग एरिया में होती है जहां कुत्ते वाहनों के नीचे या पास में बैठ जाते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति वाहन के पास जाता है उन पर झपट पड़ते हैं।
कई बार कर चुके है शिकायत
सोसायटी के निवासियों ने कई बार इस मुद्दे को लेकर प्राधिकरण और संबंधित विभागों में शिकायत की है। अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों ने बताया कि कुत्तों को पकड़ने या उनकी संख्या नियंत्रित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। परिस्थिति ऐसी हो चुकी है कि कुछ निवासी रात को बाहर निकलने या सुबह टहलने से भी परहेज करने लगे है।
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Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की निराला एस्टेट सोसायटी में लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या ने निवासियों का जीना मुश्किल कर दिया है। स्थिति यह है कि लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को सोसायटी परिसर में अकेले बाहर भेजने से घबरा रहे हैं। कई बार यह कुत्ते राह चलते लोगों पर अचानक हमला कर देते है जिससे डर और तनाव का माहौल बना हुआ है।
बेसमेंट में सबसे ज्यादा समस्या
निवासी विशाल और सौरभ ने बताया कि सोसायटी में लावारिस कुत्तों की समस्या अब एक गंभीर खतरा बन चुकी है। आए दिन किसी न किसी पर कुत्तों के काटने या हमला करने की घटनाएं सामने आती है। सबसे ज्यादा समस्या बेसमेंट और पार्किंग एरिया में होती है जहां कुत्ते वाहनों के नीचे या पास में बैठ जाते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति वाहन के पास जाता है उन पर झपट पड़ते हैं।
कई बार कर चुके है शिकायत
सोसायटी के निवासियों ने कई बार इस मुद्दे को लेकर प्राधिकरण और संबंधित विभागों में शिकायत की है। अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों ने बताया कि कुत्तों को पकड़ने या उनकी संख्या नियंत्रित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। परिस्थिति ऐसी हो चुकी है कि कुछ निवासी रात को बाहर निकलने या सुबह टहलने से भी परहेज करने लगे है।
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