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उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड

Greater Noida News: यूपी रेरा ने बिल्डरों पर कसा शिकंजा, जानें किस नियम में हुआ बदलाव

Greater Noida News: उत्तर प्रदेश रेरा ने बिल्डरों की मनमानी पर लगाम कसते हुए प्रोजेक्ट पंजीकरण की शर्तों में बड़ा बदलाव किया है। अब बिल्डर को हर फेज का अलग डेवलपमेंट प्लान जमा करना होगा। उसी के अनुसार निर्माण करना अनिवार्य होगा। हर फेज को अलग प्रोजेक्ट माना जाएगा।

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Written By: News24 हिंदी Updated: Sep 15, 2025 12:15

Greater Noida News: उत्तर प्रदेश रेरा ने बिल्डरों की मनमानी पर लगाम कसते हुए प्रोजेक्ट पंजीकरण की शर्तों में बड़ा बदलाव किया है। अब बिल्डर को हर फेज का अलग डेवलपमेंट प्लान जमा करना होगा। उसी के अनुसार निर्माण करना अनिवार्य होगा। हर फेज को अलग प्रोजेक्ट माना जाएगा। वहां रहने वालों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराना बिल्डर की जिम्मेदारी होगी।

हर फेज में लेनी होगी एनओसी

इस बदलाव के तहत अब यदि कोई बिल्डर पंजीकरण कराना चाहता है तो उसे हर फेज के लिए अग्निशमन व्यवस्था, पेयजल, आपात निकास, बिजली, एसटीपी, स्ट्रीट लाइट और सड़क जैसी सुविधाओं का पूरा खाका यूपी रेरा को देना होगा। इसके लिए एनओसी भी लेनी होगी। नियमों की अनदेखी करने पर न केवल पंजीकरण रोका जाएगा बल्कि जुर्माना भी लगाया जाएगा।

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लगातार मिल रही थी शिकायतें

रेरा के मुताबिक लगातार यह देखने में आ रहा था कि बिल्डर प्रोजेक्ट को फेज में बांटकर निर्माण तो कर रहे हैं लेकिन हर चरण में सुविधाएं देने से बच रहे है। इससे खरीदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। कहीं लिफ्ट चालू नहीं, तो कहीं पीने के पानी की व्यवस्था नहीं।

सुविधाओं को लेकर विवाद

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई हाउसिंग सोसायटी इसका उदाहरण है जहां पहले और दूसरे फेज के निवासियों के बीच सुविधाओं को लेकर विवाद सामने आए। हाल ही में निराला एस्टेट में भी ऐसी स्थिति बनी थी। लोगों का कहना है कि अगर शुरुआत में पूरी सुविधा बना दी जाती है तो वह अगले फेज तक पुरानी हो जाती है।

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हर फेज में पूरी सुविधा देना अनिवार्य

रेरा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब हर फेज को स्वतंत्र प्रोजेक्ट की तरह देखा जाएगा। इसका मतलब है कि हर चरण में रह रहे लोगों को सभी बुनियादी सुविधाएं मिलनी ही चाहिए। लोगों को सुविधा मिलने से उनका आम जनजीवन सुखद होगा।

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4000 से अधिक पंजीकृत प्रोजेक्ट

फिलहाल यूपी रेरा में करीब 4000 प्रोजेक्ट पंजीकृत है। हर महीने लगभग 200 नए प्रोजेक्ट जुड़ रहे है। शिकायतों के आधार पर यह जरूरी हो गया था कि पंजीकरण प्रक्रिया को और सख्त किया जाए। ऐसे में बिल्डरों की जवाबदेही तय की जा सके।

एसओपी पहले से लागू

यूपी रेरा के सचिव महेंद्र वर्मा ने बताया कि पिछले साल सितंबर में जो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर एसओपी जारी की गई थी वह अब भी प्रभावी है। इसके साथ ही नए नियमों को भी तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। बिल्डरों को अब प्रोजेक्ट के पंजीकरण के समय ही विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं का फेजवाइज प्लान जमा करना होगा। नए आदेश जारी कर दिए गए है।

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First published on: Sep 15, 2025 12:12 PM

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