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उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड

UP: औद्योगिक राजधानी में ई-रिक्शा बने सिरदर्द, ट्रैफिक नियमों की उड़ा रहे धज्जियां

Noida News: परिवहन विभाग के अनुसार जिले में साल 2019 में सिर्फ 1946 ई-रिक्शा ही पंजीकृत थे। जबकि, 2025 में अब तक 3842 ई-रिक्शा पंजीकृत हो चुके हैं।

Author Edited By : Amit Kasana Updated: Feb 28, 2025 15:30

Noida News : गौतमबुद्ध नगर में 22 हजार से अधिक ई-रिक्शा पंजीकृत हैं, जो विभिन्न मार्गों पर चल रहे हैं। ई-रिक्शा की तेजी से बढ़ती संख्या लोगों के लिए सिरदर्द बन गई है। छोटे बच्चों को भी ई-रिक्शा चलाते हुए देखा जाता है। सवारी के लिए बनाए गए ई-रिक्शा को सामान ले जाने और कभी-कभी खतरनाक तरीके से सरिया को ले जाने के लिए देखा जाता है। साथ ही इन रिक्शा ड्राइवरों के लिए कोई स्थायी स्टैंड नहीं है। इसके कारण, वे सड़क के किनारे, बस स्टैंड और मेट्रो स्टेशनों पर खड़े होते हैं। इसके अलावा सवारी के इंतजार में भीड़ भरे बाजारों के पास खड़े होते हैं। इस वजह से, इन मार्गों से गुजरने वाले अन्य ड्राइवरों को जाम की समस्या का सामना करना पड़ता है।

शहर से लेकर देहात तक ट्रैफिक नियमों की उड़ा रहे धज्जियां

पिछले पांच वर्षों में गौतमबुद्ध नगर जिले में यानी नोएडा, ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, दादरी और जेवर इलाके में ई-रिक्शा की संख्या में चार गुना बढ़ोतरी हुई है। यह संख्या तेजी से बढ़ती चली जा रही है। एक ओर ई-रिक्शा की संख्या तेजी से बढ़ रही है और दूसरी ओर ई-रिक्शा चालक ट्रैफिक नियमों का धड़ल्ले से उल्लंघन करते हैं, जिससे लोगों को सड़क पर जाम के साथ ही अन्य कई मुसीबतों से गुजरना पड़ता है। नोएडा के सेक्टर-16, सेक्टर-15, सेक्टर-18, सेक्टर-59, सेक्टर-62 मेट्रो स्टेशन के नीचे, नया बांस, रजनीगंधा चौराहा, अट्टापीर, अट्टा चौक, बॉटनिकल गार्डन, सेक्टर-37, सेक्टर-12-22 तिराहा, ईएसआईसी अस्पताल के सामने, खोड़ा लेबर चौक, निठारी बाजार आदि इलाकों में ई-रिक्शा का जमावड़ा देखने को मिल रहा है।

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परिमट जरूरी नहीं

ई-रिक्शा के लिए परमिट जरूरी नहीं है। ई-रिक्शा के लिए परमिट की अनुमति नहीं हैं, जैसा कि वे बैटरी द्वारा चलाते हैं। यही कारण है कि बैटरी रिक्शा किसी भी मार्ग पर चलती है। परिवहन विभाग द्वारा छूट मिलने के कारण ही पुलिसकर्मी इन ई-रिक्शा को भी नहीं रोकते हैं। बता दें कि ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक ऑटो दोनों के लिए रूट परमिट का कोई प्रतिबंध नहीं है। यही कारण है कि ये वाहन जिले की किसी भी सड़क पर दौड़ते मिल जाते हैं।

लाइसेंस बनाते नहीं

जिले की सड़कों पर ई-रिक्शा लाइसेंस के चल रहे हैं। ई-रिक्शा ड्राइवरों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस की आवश्यकता होती है, लेकिन कई ड्राइवर लाइसेंस के बिना अंधाधुंध जिले की सड़कों पर ई-रिक्शा चला रहे हैं। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की टीम समय -समय पर एक जांच अभियान आयोजित करती है और इस दौरान कई ड्राइवरों के पास लाइसेंस नहीं मिलता है। बिना लाइसेंस के ई-रिक्शा चलाने वाले ड्राइवरों को चालान किया जाता है, लेकिन लोगों को बिना लाइसेंस वाले ई-रिक्शा से आतंक से छुटकारा नहीं मिल रहा है।

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जिले में तेजी से बढ़ रही ई-रिक्शा की संख्या

परिवहन विभाग के अनुसार जिले में साल 2019 में सिर्फ 1946 ई-रिक्शा ही पंजीकृत थे। जबकि, 2025 में अब तक 3842 ई-रिक्शा पंजीकृत हो चुके हैं। जिसके बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि इस साल जिले में इनकी 25 हजार से ज्यादा हो सकती है। इसके अलावा लोगों की शिकायतें रहती हैं कि बिना पंजीकृत के भी ई-रिक्शा चल रहे हैं। सूत्रों से पता चला है कि बिना पंजीकृत भी करीब हजारों ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग का दावा है कि इन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। वहीं, जिले में वर्तमान में 22514 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं।

वर्ष ई-रिक्शा पंजीकृत

साल संख्या
2019 1703
2020 811
2021 1149
2022 4084
2023 7825
2024 3100
2025 3842

अधिकारी की सुनिए

एआरटीओ प्रशासन डॉ. सियाराम वर्मा के का कहना है कि कुछ साल पहले तक शहर की सड़कों पर बिना पंजीकृत ई-रिक्शा दौड़ रहे थे, लेकिन कार्रवाई के बाद इन्हें इन्हें हटा दिया गया। अब केवल पंजीकृत ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यह प्रवर्तन टीम की सख्ती के कारण संभव हो गया है। उन्होंने बताया कि ई-रिक्शा बेचने वाले केंद्रों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा रही है।

 

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Edited By

Amit Kasana

First published on: Feb 28, 2025 02:54 PM

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