राजस्थान में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद खौफनाक आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है. एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की टीम जिसे आम ड्रग्स की तस्करी समझकर ट्रैक कर रही थी, मौके पर पहुंचने पर उसके होश उड़ गए. पाकिस्तानी ड्रोन से नशीले पदार्थों की जगह RDX, तैयार IED बम और अत्याधुनिक हथियारों की बड़ी खेप भारतीय सीमा में गिराई गई थी. यह कार्रवाई 12 और 13 अक्टूबर की रात को श्रीगंगानगर जिले के रावला क्षेत्र स्थित गांव 12 केडी के पास की गई, जो सीमा से मात्र पांच किलोमीटर दूर है.
पाकिस्तान के भीतर 5 से 10 किलोमीटर अंदर से लॉन्च किए गए तीन ड्रोनों ने रात के अंधेरे में खेत में तीन पैकेट गिराए. जैसे ही पंजाब के रहने वाले दो युवक इन पैकेट्स को उठाने पहुंचे, घात लगाए बैठी ANTF की टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया.
IGP विकास कुमार ने किया मामले का खुलासा
एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के IGP विकास कुमार ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह ऑपरेशन रावला इलाके में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास अंजाम दिया गया. बरामद सामान में कोई ड्रग्स नहीं थी, बल्कि 7.75 किलोग्राम आरडीएक्स, टाइमर डिवाइस, डेटोनेशन सर्किट, रिमोट उपकरण, तुर्की में बनी दो जिगाना पिस्तौलें और 867 जिंदा कारतूस शामिल थे. ANTF के आईजी विकास कुमार ने बताया कि यह पूरी तरह तैयार बम था, जिसमें केवल सर्किट जोड़ना बाकी था. इसमें भरे छर्रे विस्फोट के वक्त 9.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से फैलकर भारी तबाही मचा सकते थे. इसे डिफ्यूज करने के लिए स्पेशल बम निरोधक दस्ते को बुलाना पड़ा. पैकेटों को एयरटाइट और कई परतों में पैक किया गया था ताकि खोजी कुत्ते भी इन्हें न सूंघ सकें.
ग्रेनेड हमले में भी वांछित थे पकड़े गए आरोपी
पकड़े गए दोनों आरोपियों की पहचान पंजाब के फिरोजपुर निवासी लखविंदर और जालंधर निवासी सुखविंदर सिंह के रूप में हुई है, जिनकी उम्र करीब 19 वर्ष है. दोनों 13 सितंबर को पंजाब के जलालाबाद पुलिस स्टेशन पर हुए ग्रेनेड हमले में भी वांछित थे. वे पिछले एक महीने से मजदूर बनकर खेत में रह रहे थे और बीएसएफ की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे. जांचकर्ताओं के अनुसार, वे ‘आरएस’ नामक रिश्तेदार के इशारे पर डिलीवरी एजेंट के रूप में काम कर रहे थे. पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी पहले भी पंजाब में इसी तरह की गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और वहां दर्ज मामलों में वांछित चल रहे थे.
डिलीवरी लेते वक्त ही दोनों तस्करों को धर दबोचा
आईजीपी विकास कुमार ने बताया कि टास्क फोर्स को पिछले करीब एक महीने से सीमावर्ती इलाकों में कुछ संदिग्ध लोगों की आवाजाही की गुप्त सूचना मिल रही थी. इसके बाद टीम लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी. मुखबिरों के नेटवर्क, मानवीय इनपुट और तकनीकी निगरानी के जरिए उनकी हर चाल को ट्रैक किया गया. जैसे ही सीमा पार से खेप आने की तारीख और सुरक्षित जगह तय हुई, सुरक्षा बलों ने तुरंत घेराबंदी कर दी. डिलीवरी लेते वक्त ही दोनों तस्करों को धर दबोचा गया. प्राथमिक जांच के अनुसार यह मामला आतंकवाद और नशे के अवैध कारोबार के खतरनाक नेटवर्क से जुड़ा हुआ है. फिलहाल दोनों आरोपियों से नेटवर्क के अन्य संपर्कों को लेकर पूछताछ की जा रही है.