महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के सुप्रीमो राज ठाकरे ने शनिवार को मराठी मानुस के मुद्दे पर कार्यकर्ताओं को दोबारा पत्र लिखा। ठाकरे ने कहा कि मराठी सर्वप्रथम महाराष्ट्र में मराठी मानुस के मुद्दे के लिए आपने फिर से जो जोरदार आवाज उठाई है, उसके लिए आपका दिल से अभिनंदन। मैंने गुढी पाडवा की रैली में आपको आदेश दिया था कि महाराष्ट्र के बैंकों में मराठी में लेन-देन हो रहा है या नहीं, यह देखें। अगर नहीं हो रहा है तो उस बैंक के प्रशासन को इसके बारे में जानकारी दें। दूसरे दिन से ही आपने महाराष्ट्र के विभिन्न बैंकों में जाकर मराठी में कामकाज का आग्रह किया, यह बहुत अच्छा हुआ।
खुद जनता भी उठाए कदम
ठाकरे ने कहा कि इससे मराठी भाषा और मराठी व्यक्ति को कोई भी हल्के में नहीं ले सकता, यह संदेश गया। वैसे ही महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की संगठनात्मक ताकत भी दिखी, लेकिन अब इस आंदोलन को रोकने में कोई हर्ज नहीं है, हमने इस विषय में पर्याप्त जागरूकता फैलाई है। और क्या हो सकता है, इसकी एक झलक भी दिखाई है। अब मराठी जनता को खुद आग्रह करना चाहिए और अगर हमारे मराठी समाज ने ही चुप्पी साधी तो फिर ये आंदोलन किसके लिए करना चाहिए? सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सरकार की है। रिजर्व बैंक का नियम उन्हें पता है और उस नियम का कार्यान्वयन कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
Maharashtra: Maharashtra Navnirman Sena (MNS) Chief Raj Thackeray participated in the annual Gudi Padwa rally at Shivaji Park
He says, “Despite being the ruler of a vast region, Aurangzeb remained in Maharashtra even after the death of Chhatrapati Shivaji Maharaj because he… pic.twitter.com/jVVMdwtIt9
---विज्ञापन---— IANS (@ians_india) March 30, 2025
फिलहाल मुद्दे से न हटाएं ध्यान
ठाकरे ने कहा कि कल कहीं मीडिया से बात करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि हम किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं देंगे। हम भी ऐसा कुछ नहीं चाहते, लेकिन अगर आप कानून के रक्षक हैं, तो क्या रिजर्व बैंक के नियम का कार्यान्वयन करना भी आपका काम नहीं है? आप बैंकों और अन्य संस्थाओं से मराठी का सम्मान कराएं, फिर हम कानून हाथ में नहीं लेंगे, यह निश्चित है। इसलिए महाराष्ट्र के पार्टी सैनिक फिलहाल आंदोलन रोक दें, लेकिन इस मुद्दे से अपना ध्यान न हटने दें। सरकार को भी मेरा संदेश है कि अगर फिर कहीं नियमों का पालन नहीं किया गया और मराठी आदमी को हल्के में लिया गया या अपमानित किया गया तो फिर वहां मेरे महाराष्ट्र सैनिक जरूर जाएंगे और उनसे बातचीत करेंगे।
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