महाराष्ट्र के बीड जिले के अंबाजोगाई शहर में प्रशासन की लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक खुला ड्रेनेज गड्ढा मां-बेटी के लिए जानलेवा साबित होते-होते रह गया। समय रहते स्थानीय लोगों की मदद से दोनों की जान बच गई, लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक उदासीनता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना स्वामी रामानंद तीर्थ ग्रामीण सरकारी अस्पताल के नर्सों के क्वार्टर की ओर जाने वाली सड़क पर हुई। जानकारी के मुताबिक, इस सड़क पर पिछले कई दिनों से करीब 12 फुट गहरा ड्रेनेज गड्ढा खुला पड़ा था। न तो वहां कोई बैरिकेड लगाया गया था और न ही कोई चेतावनी संकेत। मंगलवार शाम करीब 7 बजे एक महिला अपनी छोटी बेटी के साथ स्कूटी से घर जा रही थी। अंधेरा होने के कारण उसे सड़क पर मौजूद इस गड्ढे का अंदाजा नहीं हुआ और अचानक उसकी गाड़ी अनियंत्रित होकर सीधे गड्ढे में जा गिरी। मां और बेटी दोनों 12 फुट गहरे ड्रेनेज में गिर गईं।
स्थानीय लोगों ने बचाई जान
स्कूटी गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और बिना समय गंवाए रेस्क्यू शुरू किया। कुछ ही मिनटों में दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन घटना से वे काफी सहम गई हैं।
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प्रशासन पर उठे सवाल
यह सड़क अस्पताल स्टाफ और उनके परिवारों के लिए मुख्य मार्ग है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता है। इसके बावजूद इतना बड़ा और खतरनाक गड्ढा खुला छोड़ देना लोक निर्माण विभाग की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
स्थानीय नागरिकों में इस घटना के बाद भारी आक्रोश है। घटना के बाद नागरिकों ने पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही, तुरंत गड्ढे को बंद कर सड़क को सुरक्षित बनाने की भी मांग उठाई जा रही है। इस घटना के बाद सवाल यही है कि क्या प्रशासन तुरंत हरकत में आकर इस खतरे को खत्म करेगा या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा। फिलहाल, स्थानीय लोगों की सतर्कता से एक बड़ी त्रासदी टल गई है, लेकिन यह घटना सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर करती है।
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