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झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL और CDPO परीक्षाओं को रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक

झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL और CDPO परीक्षाओं को रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है. मिली जानकारी के अनुसार, अदालत के इस आदेश से उन अभ्यर्थियों और चयनित उम्मीदवारों को फिलहाल राहत मिली है, जिनकी नौकरी या नियुक्ति पर सरकार के फैसले के बाद संकट खड़ा हो गया था.

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झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से JPSC और JSSC की कई परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है. अदालत के इस आदेश से उन अभ्यर्थियों और चयनित उम्मीदवारों को फिलहाल राहत मिली है, जिनकी नौकरी या नियुक्ति पर सरकार के फैसले के बाद संकट खड़ा हो गया था.

मामला खास तौर पर 11वीं और 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर भी अहम है. सरकार के फैसले के बाद चयनित अधिकारियों की नियुक्ति रद्द होने का रास्ता साफ हो गया था. अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल इस फैसले पर अमल नहीं किया जा सकेगा. रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में करीब 342 चयनित अधिकारियों को राहत मिली है.

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल, झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से छात्र आंदोलन कर रहे थे. इसके बाद राज्य सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर JSSC-CGL, 11वीं-13वीं JPSC, CDPO और Food Safety Officer समेत कुल 22 भर्ती प्रक्रियाओं और परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था. सरकार के इस कदम के पीछे भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आए विवाद और जांच को आधार बनाया गया.

यह भी पढ़ें- झारखंड में रद्द हुईं 44 भर्ती परीक्षाएं, 2014 से 2026 तक कौन-कौन से एग्जाम हुए कैंसिल? सोरेन सरकार ने जारी की लिस्ट

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कोर्ट ने मामले पर क्या कहा?

सरकार के फैसले से वो अभ्यर्थियों भी असमंजस में थे, जो इन परीक्षाओं में चयनित होकर नियुक्त हो चुके थे या फिर उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही थी. इसी के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया. अदालत ने सुनवाई के दौरान सरकार से जवाब मांगा और फिलहाल रद्दीकरण संबंधी आदेशों के अमल पर रोक लगा दी है.

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि नियमित नियुक्तियों को खत्म करने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और तय कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है. अदालत के मुताबिक, केवल आरोपों के आधार पर पहले से हो चुकी नियुक्तियों को खत्म नहीं किया जा सकता, जब तक इसके लिए ठोस आधार और संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर न दिया जाए.

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First published on: Aug 21, 2026 01:03 PM

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