हिमाचल के ऊना और मंडी में गुरुवार को स्कूल बंद, सायर पर्व के चलते सरकारी दफ्तरों में भी छुट्टी
हिमाचल प्रदेश के ऊना और मंडी जिले में 17 सितंबर को स्कूल बंद रहेंगे. ऊना में CM सुक्खू ने छुट्टी का ऐलान किया, जबकि मंडी में सायर पर्व के चलते स्कूल-कॉलेज और सरकारी दफ्तर भी बंद रहेंगे.
ऊना में एंटी-चिट्टा वॉकथॉन के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने छुट्टी का ऐलान किया. (Image-@SukhuSukhvinder/X)
हिमाचल प्रदेश के ऊना और मंडी जिलों में गुरुवार, 17 सितंबर को स्कूल बंद रहेंगे. ऊना में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को एंटी-चिट्टा वॉकथॉन के दौरान छुट्टी का ऐलान किया. वहीं, मंडी जिले में स्थानीय त्योहार सायर के चलते स्कूल-कॉलेज के साथ सरकारी दफ्तर भी बंद रहेंगे.
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ऊना में एंटी-चिट्टा वॉकथॉन के बाद छुट्टी का ऐलान
ऊना में मुख्यमंत्री सुक्खू ने एंटी-चिट्टा वॉकथॉन के दौरान युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक किया. अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं को Gen-Z और Gen-Alpha बताते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है. इसमें माता-पिता और जागरूक युवाओं की भी अहम भूमिका है. करीब 40 डिग्री तापमान के बावजूद बड़ी संख्या में युवाओं के वॉकथॉन में शामिल होने पर मुख्यमंत्री ने उनके उत्साह की तारीफ की. इसके बाद उन्होंने गुरुवार को ऊना जिले के स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की.
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मंडी जिले में गुरुवार को सायर पर्व मनाया जाएगा. इसके चलते जिले में स्कूल-कॉलेज के अलावा सरकारी दफ्तर भी बंद रहेंगे. मंडी और कुल्लू में अश्विन महीने की संक्रांति पर सायर मनाने की परंपरा है. मान्यता है कि सायर पर्व के साथ बरसात का मौसम खत्म होने लगता है. इस समय खरीफ की फसलें पक जाती हैं और उनकी कटाई का समय शुरू हो जाता है. इस दिन सैरी माता को फसलों का एक हिस्सा और मौसमी फल चढ़ाए जाते हैं. इसके साथ ही लोग अपनी राखियां उतारकर सैरी माता को चढ़ाते हैं. यह त्योहार अनाज की पूजा और बैलों की खरीद-फरोख्त के लिए भी जाना जाता है. मंडी में इसे सिर्फ गांवों में ही नहीं, बल्कि शहरों में भी उत्साह के साथ मनाया जाता है.
एक महीने बाद मायके से ससुराल लौटती हैं नवविवाहिताएं
सायर पर्व से जुड़ी एक और परंपरा नवविवाहिताओं से जुड़ी है. मान्यता के अनुसार, करीब एक महीने बाद नवविवाहिताएं अपने मायके से वापस ससुराल लौट आती हैं. इसके पीछे भादो महीने से जुड़ी एक स्थानीय मान्यता भी है. कहा जाता है कि भादो के महीने में नवविवाहिताएं और उनकी सास एक-दूसरे का मुंह नहीं देखतीं. सायर पर्व के बाद यह परंपरा खत्म मानी जाती है और नवविवाहिताएं ससुराल लौट आती हैं.