चौड़ी सड़क, एक भी सिग्नल नहीं, फिर भी नोएडा-अक्षरधाम रूट पर हर शाम क्यों लगता है जाम?

Akshardham–Noida Road Evening Traffic: अगर आप शाम को दिल्ली से नोएडा अक्षरधाम होकर जाते हैं, तो यहां लंबा ट्रैफिक जाम देखना पड़ता है, लेकिन हैरानी की बात ये है कि ये सड़क चौड़ी और पूरी तरह सिग्नल फ्री है, फिर ऐसी परेशानी क्यों पेश आती है.

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Evening Traffic At Akshardham–Noida Road (AI Image)

मुख्य बिंदु

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  • अक्षरधाम-नोएडा रोड पर शाम को भारी ट्रैफिक रहता है, जबकि यहां कोई ट्रैफिक सिग्नल नहीं है.
  • सड़क किनारे बस में चढ़ने, कैब पिकअप करने और गैर-कानूनी तरीके से रुकने से सड़क पर जगह कम हो जाती है.
  • बार-बार लेन बदलने से ‘ट्रैफिक शॉकवेव’ बनती है जिससे लंबी दूरी तक जाम फैल जाता है.
  • एक्सपर्ट्स खास बस बे, टैक्सी पिकअप जोन और बेहतर लेन मैनेजमेंट की सलाह देते हैं.
  • ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई जारी रखे हुए है, लेकिन बार-बार होने वाले उल्लंघन एक बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं.

Evening Traffic At Akshardham–Noida Road: अक्षरधाम-नोएडा कॉरिडोर दिल्ली के खास रोड लिंक में से एक है, जिसे सेंट्रल दिल्ली, ईस्ट दिल्ली और नोएडा के बीच आसान और बिना रुकावट वाला सफर देने के लिए बनाया गया है. कई लेन, फ्लाईओवर और बहुत कम ट्रैफिक सिग्नल होने की वजह से, यह हिस्सा भारी ट्रैफिक को अच्छे से संभालने में काबिल लगता है. हालांकि, हर शाम, रेड लाइट न होने के बावजूद, आने-जाने वालों को लंबी लाइनों और धीमी गति से चलने वाली गाड़ियों का सामना करना पड़ता है.

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रुकती गाड़ियों की वजह से जाम

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस रोड कॉरिडोर देखने से पता चला कि जाम किसी एक बड़ी रुकावट की वजह से नहीं है. इसके बजाय, कई छोटी-छोटी रुकावटें मिलकर पीक आवर्स में सड़क की कैपेसिटी को कम कर देती हैं. गाड़ियों का अचानक रुकना, बार-बार लेन बदलना, पैसेंजर को उठाना और सड़क किनारे बसों का रुकना धीरे-धीरे ट्रैफिक को धीमा कर देता है, जब तक कि लंबा जाम न लग जाए.

पैसेंजर पिकअप से होती है परेशानी

सबसे ज्यादा भीड़ शाम को शुरू होती है जब ऑफिस जाने वाले लोग, पास के मंदिर एरिया में आने-जाने वाले लोग, मेट्रो यूजर, कैब और इंटरस्टेट बसें सभी इसी हिस्से का इस्तेमाल करते हैं. प्राइवेट बसें अक्सर सड़क किनारे से सीधे पैसेंजर को पिक करने के लिए रुकती हैं. शहर की बसों के उलट, इन स्टॉप पर आमतौर पर ज्यादा वक्त लगता है क्योंकि मुसाफिर अपनी बसें ढूंढते हैं, सामान रखते हैं और परिवार के सदस्यों के साथ बसों पर चढ़ते हैं. इस प्रोसेस के दौरान, एक या ज्यादा लेन थोड़ी ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे दूसरी गाड़ियों को स्लो चलना पड़ता है.

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लेन बदलने से भी दिक्कत

पैसेंजर का इंतजार कर रही राइड-हेलिंग कैब सड़क पर मौजूद जगह को और कम कर देती हैं. एग्जिट और मर्जिंग पॉइंट के पास आखिरी समय में लेन बदलने से भी गाड़ियों का फ्लो ठीक से नहीं हो पाता. अगर आप कई दिनों तक इसको ऑब्जर्व करेंगे तो पता चलेगा कि जब एक लेन ब्लॉक हो जाती है, तो ड्राइवर तुरंत पास की लेन में चले जाते हैं. इससे एक चेन रिएक्शन होता है जिसमें आस-पास की गाड़ियों को ब्रेक लगाना पड़ता है, जिससे जाम तेजी से कई किलोमीटर तक फैल जाता है. इंजीनियर इसे ‘ट्रैफिक शॉकवेव इफेक्ट’ कहते हैं.

ट्रैफिक मैनेजमेंट की गड़बड़ी

रोड सेफ्टी स्पेशलिस्ट के मुताबिक, ये प्रॉब्लम सिर्फ बेसब्र ड्राइवरों की वजह से नहीं है, बल्कि ट्रैफिक मैनेजमेंट और रोड डिजाइन की दिक्कतों की वजह से भी है. जब खड़ी गाड़ियों या सड़क किनारे एक्टिविटी की वजह से कई लेन अचानक छोटी हो जाती हैं, तो गाड़ी चलाने वाले आसानी से मर्ज होने के बजाय कम जगह के लिए जद्दोजहद करते हैं, जिससे देरी बढ़ जाती है और कभी-कभी अग्रेसिव ड्राइविंग भी हो जाती है.

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कैसे निकलेगा समाधान?

एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि कई प्रैक्टिकल तरीकों से ट्रैफिक फ्लो बेहतर हो सकता है. प्राइवेट बसों के लिए खास पिकअप बे, ऐप-बेस्ड टैक्सियों के लिए खास वेटिंग एरिया, बेहतर लेन मार्किंग, सड़क किनारे अतिक्रमण पर ज्यादा सख्ती, और गैर-कानूनी तरीके से गाड़ी रोकने के खिलाफ सख्त कार्रवाई से जाम काफी कम हो सकता है.

बढ़ानी पड़ेगी सख्ती

ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिना इजाजत पार्किंग, सड़क किनारे कब्जे और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ रेगुलर कार्रवाई पहले से ही चल रही है. खबर है कि अधिकारी हर दिन कई बसों और कैब पर पेनल्टी लगाते हैं और और बस बे बनाने पर भी विचार कर रहे हैं. हालांकि, जब तक बार-बार होने वाले उल्लंघन को हमेशा के लिए ठीक नहीं किया जाता, तब तक अक्षरधाम-नोएडा रोड पर शाम का ट्रैफिक जाम रोजाना एक चैलेंज बना रहेगा.

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निष्कर्ष

अक्षरधाम-नोएडा कॉरिडोर पर रोजाना लगने वाला जाम यह दिखाता है कि कैसे छोटी-मोटी ट्रैफिक रुकावटें भी एक बिजी शहरी सड़क पर काफी असर डाल सकती हैं. हालांकि सड़क का इंफ्रास्ट्रक्चर आसान आवाजाही के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन बार-बार सड़क किनारे रुकना, खराब लेन डिसिप्लिन और बिना इजाजत पिकअप पीक आवर्स में इसकी एफिशिएंसी को कम कर देते हैं. बेहतर ट्रैफिक इंजीनियरिंग, सख्ती से लागू करना, और सही तरीके से तय पिकअप और पार्किंग एरिया जाम को कम करने में मदद कर सकते हैं. इन ऑपरेशनल दिक्कतों को ठीक करना रोड ट्रैवलर्स की सेफ्टी को बेहतर बनाने, ट्रैवल टाइम कम करने और फ्यूल की खपत और पॉल्यूशन को कम करने के लिए जरूरी है.

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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