नई दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक स्टूडेंट पीजी की इमारत गिरने से हुई मौतों ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है. हादसे में दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र अर्पित की भी जान चली गई. सबसे दर्दनाक बात यह है कि हादसे से कुछ दिन पहले ही अर्पित की मां ने उसे दिल्ली वापस आने से रोकने की कोशिश की थी. उन्हें अनजाने डर का एहसास हो रहा था, लेकिन अर्पित ने पढ़ाई और कॉलेज शुरू होने की वजह से दिल्ली वापस लौटने का फैसला किया.

मध्य प्रदेश के देवास के रहने वाले अर्पित दिल्ली यूनिवर्सिटी के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज में बीकॉम के दूसरे वर्ष के छात्र थे. वह रक्षाबंधन मनाने के लिए अपने घर गए थे और रविवार सुबह ही दिल्ली लौटे थे. दोपहर करीब 12:30 बजे उनकी मां से आखिरी बार फोन पर बात हुई थी. इसके लगभग एक घंटे बाद सत्य निकेतन में पीजी की बिल्ड़िंग ढह गई. इस हादसे में अर्पित की भी मौत हो गई थी.

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मां ने अर्पित को दिल्ली जाने से रोका था

वहीं, अर्पित जब दिल्ली के लिए वापस लौट रहे थे तब भी उनकी मां ने उन्हें रोका था क्योंकि उन्हें बेटे के साथ किसी अनहोनी होने का डर था. अर्पित की मां ने पीटीआई को बताया, 'बेटे के दिल्ली लौटने से पहले ही उनके मन में बेचैनी थी. रेलवे स्टेशन पर उसकी बहन को छींक आई जिसे अशुभ संकेत माना और उन्होंने अर्पित से यात्रा टालने के लिए कहा. लेकिन अर्पित ने कहा कि टिकट पहले से कन्फर्म है और कॉलेज की क्सासेस भी शुरू होने वाली हैं. इसके बाद वह दिल्ली के लिए रवाना हो गया.' मां की गुहार के बावजूद अर्पित दिल्ली चले गए और यह उनकी आखिरी यात्रा साबित हुई. अब बेटे की मौत के बाद मां खुद को उस फैसले के लिए जिम्मेदार मान रही हैं और पूरी तरह से टूट चुकी हैं.

दोपहर करीब 1:30 बजे, दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में लड़कों के लिए 'पेइंग गेस्ट' (PG) की बिल्डिंग ढह गई. मलबे में दबे लोगों में अर्पित भी शामिल थे. मलबे से बारह लोगों को निकाला गया था, जिनमें से सात की मौत हो चुकी थी.

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अर्पित के दोस्त भी सदमे में

अर्पित के दोस्तों के लिए भी यह खबर किसी सदमे से कम नहीं थी. उन्हें हादसे की जानकारी मिलते ही दोस्तों ने अर्पित को तलाशना शुरू कर दिया. अस्पतालों से लेकर घटनास्थल तक उसकी जानकारी जुटाई गई. बाद में परिवार ने अस्पताल में उसकी पहचान की. रिपोर्टों के मुताबिक, शव की स्थिति बेहद खराब थी और पहचान करना आसान नहीं था.

अर्पित पढ़ाई के साथ चार्टर्ड अकाउंटेंसी की तैयारी भी कर रहे थे. उनके दोस्तों ने बताया कि वह पढ़ाई को लेकर गंभीर थे और कॉलेज की गतिविधियों में भी हिस्सा लेते थे. हादसे से पहले उन्होंने दोस्तों के साथ कॉलेज जाने और कॉन्सर्ट में शामिल होने का प्लान बनाया था, लेकिन ये सभी प्लान अधूरे रह गए.

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बेटे का शव देखकर मां का बुरा हाल

घटना के बाद जब उन्होंने आखिरकार अपने बेटे का शव देखा, तो वह गिर पड़ीं और उन्हें AIIMS में भर्ती कराना पड़ा. होश में आने के बाद भी, वह बेटे की मौत को स्वीकार नहीं कर पा रही थीं. फूट-फूटकर रोते हुए वह कहती रहीं कि जब तक अर्पित घर वापस आकर अपने हाथों से उन्हें खाना नहीं खिलाएगा, तब तक वह कुछ नहीं खाएंगी. उन्होंने रोते हुए कहा, 'मैंने उसे दिल्ली क्यों आने दिया? मुझे लग रहा था कि कुछ बुरा होगा.'

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पीजी मालिक गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने बताया कि इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता को सोमवार को राजस्थान के भिवाड़ी इलाके से गिरफ्तार कर लिया है. डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (साउथ-वेस्ट) अमित गोयल ने बताया कि गुप्ता को भिवाड़ी से पकड़ा गया और मामले की आगे की जांच चल रही है.

हरिराम के साथ-साथ उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को भी गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया गया. पति-पत्नी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है. इस बीच, हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अपने सभी जोन में इमारतों की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं.

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MCD ने सोमवार को सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों (बिल्डिंग) को निर्देश दिया कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली इमारतों की जांच करें और 10 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपें. अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान जुटाई गई जानकारी को एक हलफनामे में शामिल किया जाएगा, जिसे 10 दिनों के अंदर दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किया जाएगा.

सत्य निकेतन बिल्डिंग में हुआ था हादसा

दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास लड़कों की PG बिल्ड़िंग (पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन) रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे मरम्मत के काम के दौरान ढह गई थी, जिसके कारण कई छात्र मलबे के नीचे दब गए थे. सोमवार को 27 घंटे चले बचाव अभियान के बाद सात लोगों की मौत हुई थी और पांच लोग घायल हुए थे.