Delhi Water Crisis: दिल्ली में गहराया पानी का संकट, इस इलाके के प्लांट में बिजली गुल होने से बड़ी दिल्लीवालों की परेशान
Delhi Pani Ki Dikkat: दिल्ली में बढ़ती गर्मी के बीच जल संकट और गहरा गया है. एक प्रमुख वॉटर प्लांट में बिजली गुल होने से कई इलाकों में पानी की सप्लाई प्रभावित हुई, जबकि कम दबाव के कारण दूषित पानी की शिकायतें भी बढ़ने लगी हैं.
भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही देश की राजधानी दिल्ली में पीने के पानी की किल्लत लगातार गंभीर होती जा रही है. यमुना नदी के घटते जलस्तर के कारण पहले से ही परेशान दिल्ली के नागरिकों पर अब एक और नई मुसीबत आ गई है. दिल्ली के उत्तर-पूर्वी, पूर्वी और दक्षिणी इलाकों को पानी सप्लाई करने वाले 'सोनिया विहार वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट' में अचानक बिजली गुल होने से पानी का उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है. इस तकनीकी खराबी के कारण पानी की सप्लाई प्राभवित हो गई और लोग पानी के लिए परेशान रहे.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सोनिया विहार प्लांट को कच्चा पानी उत्तर प्रदेश की अपर गंगा नहर से मिलता है, जहां पानी की मात्रा अमूमन स्थिर रहती है. लेकिन पिछले दो-तीन दिनों से चल रही लगातार बिजली कटौती और तकनीकी ट्रिपिंग के कारण प्लांट की तीन मुख्य मोटरें बंद हो गईं, जिससे बीती रात लगभग 5 से 6 घंटे तक पानी की छंटाई और सप्लाई का काम पूरी तरह रुका रहा. अधिकारियों का कहना है कि अगर बिजली सिर्फ 15 मिनट के लिए भी कटती है, तो पूरे सिस्टम के प्रेशर को दोबारा सामान्य करने में घंटों का समय लग जाता है.
दिल्ली के इन इलाकों में ठप हुई पानी की सप्लाई
इस प्लांट से दिल्ली में हर दिन लगभग 140 मिलियन गैलन (MGD) पानी की सप्लाई की जाती है. इस संकट की वजह से उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार, यमुना विहार, गोकलपुरी और दिलशाल गार्डन; पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार, लक्ष्मी नगर, पटपड़गंज और गीता कॉलोनी; और दक्षिणी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश, साकेत, मालवीय नगर तथा वसंत कुंज जैसे दर्जनों बड़े इलाकों में पानी की भारी किल्लत हो गई है. इसके अलावा वजीराबाद और चंद्रावल प्लांट में भी यमुना का जलस्तर घटने से पहले ही 20 प्रतिशत पानी का उत्पादन कम चल रहा है.
कम दबाव के कारण नलों में आ रहा है गंदा पानी
पानी की कमी के साथ-साथ अब दिल्ली के घरों में दूषित और गंदे पानी की शिकायतें भी तेजी से बढ़ने लगी हैं. जब मुख्य पाइपलाइनों में पानी का दबाव (प्रेशर) कम होता है, तो पुरानी और जर्जर लाइनों के लीकेज पॉइंट से बाहरी गंदगी अंदर समा जाती है. इसके अलावा, जब लोग अपने घरों में पानी खींचने के लिए प्रेशर पंप (मोटर) चलाते हैं, तो वे पाइपलाइन से गंदा पानी खींच लेते हैं. इस गंदे पानी की वजह से हौज खास, लाजपत नगर, गोविंदपुरी और गुलमोहर पार्क जैसे इलाकों से लगातार शिकायतें आ रही हैं.
लगेंगे 500 नए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
इस गहरे जल संकट से दिल्ली को भविष्य में बचाने के लिए सरकार ने अब दीर्घकालिक योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है. जल मंत्री परवेश साहिब सिंह ने घोषणा की है कि दिल्ली की जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड बहुत जल्द 500 नए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (बारिश के पानी को जमा करने की प्रणाली) का निर्माण करेगा. इसके साथ ही, सरकारी इमारतों में पहले से मौजूद लेकिन खराब पड़े 1,000 पुराने सिस्टम को भी पहले चरण में ठीक किया जाएगा. जून के पहले हफ्ते में ही इसके टेंडर जारी कर दिए जाएंगे ताकि आने वाले मानसून के पानी को सहेजकर जमीन के वाटर लेवल को सुधारा जा सके.
भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही देश की राजधानी दिल्ली में पीने के पानी की किल्लत लगातार गंभीर होती जा रही है. यमुना नदी के घटते जलस्तर के कारण पहले से ही परेशान दिल्ली के नागरिकों पर अब एक और नई मुसीबत आ गई है. दिल्ली के उत्तर-पूर्वी, पूर्वी और दक्षिणी इलाकों को पानी सप्लाई करने वाले ‘सोनिया विहार वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट’ में अचानक बिजली गुल होने से पानी का उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है. इस तकनीकी खराबी के कारण पानी की सप्लाई प्राभवित हो गई और लोग पानी के लिए परेशान रहे.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सोनिया विहार प्लांट को कच्चा पानी उत्तर प्रदेश की अपर गंगा नहर से मिलता है, जहां पानी की मात्रा अमूमन स्थिर रहती है. लेकिन पिछले दो-तीन दिनों से चल रही लगातार बिजली कटौती और तकनीकी ट्रिपिंग के कारण प्लांट की तीन मुख्य मोटरें बंद हो गईं, जिससे बीती रात लगभग 5 से 6 घंटे तक पानी की छंटाई और सप्लाई का काम पूरी तरह रुका रहा. अधिकारियों का कहना है कि अगर बिजली सिर्फ 15 मिनट के लिए भी कटती है, तो पूरे सिस्टम के प्रेशर को दोबारा सामान्य करने में घंटों का समय लग जाता है.
दिल्ली के इन इलाकों में ठप हुई पानी की सप्लाई
इस प्लांट से दिल्ली में हर दिन लगभग 140 मिलियन गैलन (MGD) पानी की सप्लाई की जाती है. इस संकट की वजह से उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार, यमुना विहार, गोकलपुरी और दिलशाल गार्डन; पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार, लक्ष्मी नगर, पटपड़गंज और गीता कॉलोनी; और दक्षिणी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश, साकेत, मालवीय नगर तथा वसंत कुंज जैसे दर्जनों बड़े इलाकों में पानी की भारी किल्लत हो गई है. इसके अलावा वजीराबाद और चंद्रावल प्लांट में भी यमुना का जलस्तर घटने से पहले ही 20 प्रतिशत पानी का उत्पादन कम चल रहा है.
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कम दबाव के कारण नलों में आ रहा है गंदा पानी
पानी की कमी के साथ-साथ अब दिल्ली के घरों में दूषित और गंदे पानी की शिकायतें भी तेजी से बढ़ने लगी हैं. जब मुख्य पाइपलाइनों में पानी का दबाव (प्रेशर) कम होता है, तो पुरानी और जर्जर लाइनों के लीकेज पॉइंट से बाहरी गंदगी अंदर समा जाती है. इसके अलावा, जब लोग अपने घरों में पानी खींचने के लिए प्रेशर पंप (मोटर) चलाते हैं, तो वे पाइपलाइन से गंदा पानी खींच लेते हैं. इस गंदे पानी की वजह से हौज खास, लाजपत नगर, गोविंदपुरी और गुलमोहर पार्क जैसे इलाकों से लगातार शिकायतें आ रही हैं.
लगेंगे 500 नए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
इस गहरे जल संकट से दिल्ली को भविष्य में बचाने के लिए सरकार ने अब दीर्घकालिक योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है. जल मंत्री परवेश साहिब सिंह ने घोषणा की है कि दिल्ली की जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड बहुत जल्द 500 नए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (बारिश के पानी को जमा करने की प्रणाली) का निर्माण करेगा. इसके साथ ही, सरकारी इमारतों में पहले से मौजूद लेकिन खराब पड़े 1,000 पुराने सिस्टम को भी पहले चरण में ठीक किया जाएगा. जून के पहले हफ्ते में ही इसके टेंडर जारी कर दिए जाएंगे ताकि आने वाले मानसून के पानी को सहेजकर जमीन के वाटर लेवल को सुधारा जा सके.