Yashodhan Sharma
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नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में नगर निगम चुनाव (MCD Election 2022) का बिगुल बज चुका है। 4 दिसंबर को 250 वार्डों में वोट डाले जाएंगे। राज्य चुनाव आयोग द्वारा शुक्रवार को (MCD Election Schedule) का ऐलान किया गया था।
इसके अलावा नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 14 नवंबर है। 19 नवंबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापसे ले सकेंगे। वहीं एमसीडी चुनाव का परिणाम 7 दिसंबर को घोषित किया जाएगा।
बता दें कि इस बार तीनों नगर निगमों के एक होने के बाद पहली बार चुनाव हो रहे हैं। 2022 का एमसीडी चुनाव 250 सीटों पर होगा। इससे पहले पूर्वी दिल्ली नगर निगम (EDMC), दक्षिणी दिल्ली निगम (SCMC) और उत्तरी दिल्ली नगर निगम (NDMC) में कुल 272 वार्ड थे।
गौरतलब है, कि MCDमें पिछले 15 सालों से बीजेपी राज कर रही है। ऐसे में बीजेपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस तीनों मैदान अपनी पूरी ताकत झोंकेंगे।
जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग द्वारा MCD के 250 वार्डों में से 42 अनुसूचित जातियों आरक्षण दिया गया है। इन 42 में से आधे यानी 21 वार्ड महिलाओं के लिए रिजर्व होंगे। बाकी बचे वार्ड्स में से 104 को महिलाओं के लिए रिजर्व हैं।
दरअसल, ताजा परिसीमन के मुताबिक 22 वार्ड घटाए गए हैं। इस बार 250 वार्ड की लिस्ट में 42 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। 50 प्रतिशत सीटों पर महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगी। एमसीडी के सभी जोन के सहायक आयुक्त जोन में चुनाव के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ती की गई है।
वोट डालने से पहले जान लें कि चुनाव आयोग ने साफ किया है कि एमसीडी चुनाव में जनवरी में जारी वोटरों की संख्या को सिर्फ आधार माना गया है। इसमें पब्लिश फाइनल वोटर लिस्ट के बाद भी जिनका नाम लिस्ट में शामिल किया गया है, वह भी एमसीडी चुनाव में वोट दे सकते हैं। यहां तक कि नॉमिनेशन से पहले तक जिनका पहचान पत्र बन जाएगा, वे भी वोट दे सकेंगे।
देश के बाकी नगर निगमों की तरह ही MCD काम करता है। वाटर सप्लाई, ड्रेनेज सिस्टम, बाजारों की मेंटेनेंस, पार्क, पार्किंग लॉट्स, सड़कें और ओवरब्रिज, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, स्ट्रीट लाइटिंग की व्यवस्था इसके जिम्मे है।
जन्म-मृत्यु का रिकॉर्ड हो या प्रॉपर्टी और प्रफेशनल टैक्स का जमा करना। टोल टैक्स कलेक्शन सिस्टम हो या शवदाह गृहों का प्रबंधन रखना। इन सभी चीजों का ध्यान रखना एमसीडी की जिम्मेदारी है। इसके अलावा एमसीडी द्वारा प्राइमरी स्कूल, अस्पताल और डिस्पेंसरी भी चलाए जाते हैं।
बता दें कि दिल्ली नगर निगम के चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) के जरिए कराए जाएंगे। राज्य चुनाव आयुक्त विजय देव के अनुसार 55 हजार से ज्यादा EVMs का इंतजाम किया गया है। इस बार भी NOTA का विकल्प मिलेगा। एक लाख से ज्यादा स्टाफ एमसीडी चुनाव कराएगा। इसमें NOTA का भी विकल्प मिलेगा। चुनाव का ऐलान होते ही आचार संहिता लागू कर दी गई है।
MCD को दिल्ली की ‘छोटी सरकार’ कहा जाता है। लेकिन हम आपको इसके पीछे का कारण बताते हैं। दरअसल, दिल्ली की सरकार और नगर निगम के अधिकार ओवरलैप करते हैं। मसलन, एमसीडी और दिल्ली सरकार दोनों ही सड़कें और नाले मेंटेन करते हैं।
आपको बता दें कि अंतर कि 60 फीट से कम चौड़ी ज्यादातर सड़कें MCD संभालता है और दिल्ली सरकार उससे चौड़ी वाली सड़कों को जिम्मा उठाती है।
वहीं बड़े मोटराइज्ड वीइकल्स को दिल्ली सरकार लाइसेंस देती है तो एमसीडी साइकिल-रिक्शा, हाथगाड़ी को डील करता है। प्राइमरी स्कूल को MCD चलाती है तो वहीं हायर स्कूलिंग, कॉलेज और प्रफेशनल एजुकेशन को दिल्ली सरकार द्वारा देखा जाता है। एमसीडी कई डिस्पेंसरी और कुछ अस्पताल चलाता है। दिल्ली सरकार बड़े और स्पेशलाइज्ड अस्पताल को मैनेज करती है।
दिल्ली की सीमाओं पर टोल टैक्स, विज्ञापन राजस्व और भू-कर MCD के लिए कमाई का जरिया है। इसके साथ ही दिल्ली सरकार और केंद्र से भी MCD को मदद मिलती है। वहीं एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स और वैल्यू एडेड टैक्स से दिल्ली सरकार की कमाई होती है।
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