'शराब घोटाला' मामले में दिल्ली HC पहुंची CBI, केजरीवाल-सिसोदिया पर निचली अदालत के फैसले को दी चुनौती

राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि अभियोजन पक्ष कोई सुपरिम कोर्ट साजिश या आपराधिक मंशा साबित करने में नाकाम रहा.

arvind kejriwal and manish sisodia
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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को शराब घोटाला मामले में शुक्रवार को दिल्ली की दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया. उनके साथ अन्य 21 आरोपियों को भी न्यायालय ने बरी कर बड़ी राहत दी. हालांकि सीबीआई इस मामले में चुप बैठने वाली नहीं है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया, जहां निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी गई.

दरअसल, राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि अभियोजन पक्ष कोई साजिश या आपराधिक मंशा साबित करने में नाकाम रहा. कोर्ट ने आरोप-पत्र को न्यायिक जांच का सामना न करने वाला बताते हुए सभी पर आरोप तय करने से इंकार कर दिया. न्यायालय ने सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी की, जिसमें स्वीकारोक्ति वाले गवाहों के बयानों पर अत्यधिक निर्भरता और जांच के खामियों को उजागर किया.

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जज जितेंद्र सिंह ने कहा कि आरोपी को क्षमा देकर गवाह बनाना और उसके बयान से जांच के अंतराल को भरना संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है. इसके अलावा, कोर्ट ने सार्वजनिक सेवक कुलदीप सिंह को आरोपपत्र में प्रथम आरोपी बनाने के लिए सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश भी की. बीआरएस नेता के. कविता, बीजय नायर और दुर्गेश पाठक जैसे अन्य आरोपी भी इस फैसले से लाभान्वित हुए. सीबीआई के अधिकारियों ने कहा कि अपील में निचली अदालत द्वारा जांच के कई पहलुओं को नजरअंदाज करने का मुद्दा उठाया जाएगा.

क्या है पूरा मामला?


मामला 2021-22 की अब रद्द हो चुकी दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसे आम आदमी पार्टी सरकार ने पेश किया था. सीबीआई ने अगस्त 2022 में दिल्ली उपराज्यपाल वीके सक्सेना की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की, जिसमें नीति निर्माण में साजिश का आरोप लगाया गया. जांच एजेंसी का दावा था कि लाइसेंस शुल्क घटाकर और लाभ मार्जिन तय कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया, जिससे दिल्ली सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ. कोर्ट ने इसे मात्र अनुमान पर टिकी साजिश बताते हुए मुकदमे की शुरुआत ही रोक दी.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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