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छत्तीसगढ़

‘भारत माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त होने की कगार पर…’ छत्तीसगढ़ में बोले PM मोदी

Raipur News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल नगर-नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव में शनिवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा हाल ही में नक्सलियों के सामूहिक आत्मसमर्पण को देखते हुए भारत के विभिन्न जिलों में माओवादी पकड़ का प्रतिनिधित्व करने वाले 'लाल झंडे' की जगह तिरंगे ने ले ली है.

Author Written By: News24 हिंदी Updated: Nov 1, 2025 21:04
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पीएम नरेन्द्र मोदी

Raipur News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल नगर-नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव में शनिवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा हाल ही में नक्सलियों के सामूहिक आत्मसमर्पण को देखते हुए भारत के विभिन्न जिलों में माओवादी पकड़ का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘लाल झंडे’ की जगह तिरंगे ने ले ली है. नक्सलियों ने हथियार छोड़ दिए हैं और संविधान को स्वीकार कर लिया है. हालात बदल गए हैं. बीजापुर के चिक्कापाली गांव में सात दशक बाद बिजली आई है. अबूझमाड़ के एक गांव में आजादी के बाद एक स्कूल बन रहा है. तिरंगे ने लाल झंडे की जगह ले ली है.”

हमने भारत को माओवाद से मुक्त कराने का लिया संकल्प

पीएम मोदी ने नक्सलवाद के कारण छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय द्वारा झेली गई पीड़ा पर दुख व्यक्त किया. उन्होंने दावा किया कि जो लोग संविधान का पालन करने और सामाजिक न्याय की बात करने का दावा करते हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए आदिवासियों के खिलाफ अन्याय किया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि “छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज ने देश के विकास में अभूतपूर्व योगदान दिया है. मुझे खुशी है कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद और माओवादी आतंकवाद के चंगुल से मुक्त हो रहा है. पिछले 55 वर्षों में नक्सलवाद के कारण आपने जो कष्ट सहे हैं, वे बहुत कष्टदायक हैं. जो लोग संविधान का पालन करने का दिखावा करते हैं, जो लोग सामाजिक न्याय के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाते हैं, उन्होंने अपने राजनीतिक लाभ के लिए आपके साथ अन्याय किया.” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि माओवाद की उपस्थिति के कारण छत्तीसगढ़ में सड़क अवसंरचना का विकास नहीं हो पाया. जिसके कारण क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों और डॉक्टरों की हत्याएं हुईं. उन्होंने आगे कहा कि “इसीलिए, जब हम 2014 में सत्ता में आए, तो हमने भारत को माओवाद से मुक्त कराने का संकल्प लिया था.”

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माओवादियों के नियंत्रण वाले जिलों की संख्या घटकर 3 रह गई

प्रधानमंत्री ने कहा कि “माओवाद के कारण, लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में सड़कों का बुनियादी ढांचा विकसित नहीं हो पाया. न तो शिक्षा थी और न ही अस्पताल. शिक्षक और डॉक्टर मारे गए. दशकों तक, जिन्होंने राज किया, उन्होंने आपको अपने हाल पर छोड़ दिया और एसी कमरों में बैठकर अपनी ज़िंदगी का आनंद लेते रहे. लेकिन, मोदी आदिवासी भाइयों को हिंसा के इस खेल में खुद को बर्बाद नहीं करने दे सकते.” कहा कि माओवादियों के नियंत्रण वाले जिलों की संख्या घटकर तीन रह गई है, जबकि 11 साल पहले यह संख्या 150 थी. उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों ने हथियार उठाए थे और जिन पर करोड़ों-लाखों रुपये का इनाम था. वे आत्मसमर्पण करके मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं. उन्होंने कहा कि “आज नतीजे दिख रहे हैं. ग्यारह साल पहले, भारत के 150 ज़िले माओवादियों के कब्ज़े में थे. उनमें से अब सिर्फ़ तीन ज़िले ही उनके कब्ज़े में हैं.. मैं गारंटी देता हूँ कि वो दिन दूर नहीं जब भारत और छत्तीसगढ़ माओवाद से मुक्त हो जाएंगे. जिन्होंने हिंसा का रास्ता चुना, वे आत्मसमर्पण कर रहे हैं. कुछ दिन पहले कांकेर में 20 से ज़्यादा नक्सली मुख्यधारा में लौट आए.

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17 अक्टूबर को बस्तर में 200 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

17 अक्टूबर को बस्तर में 200 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया. हाल के दिनों में देश भर में दर्जनों नक्सलियों ने हथियार डाले हैं.” इससे पहले अक्टूबर 2025 में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा था कि वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित (LWE) ज़िलों की संख्या इस साल की शुरुआत में 18 से घटकर अब 11 हो गई है. सरकार द्वारा सबसे ज़्यादा प्रभावित बताए गए तीन ज़िले छत्तीसगढ़ में हैं. बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर. 2013 में, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 126 जिले थे और निरंतर अभियानों के बाद, अप्रैल 2025 में यह संख्या 18 तक सीमित कर दी गई. प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 से पहले की स्थिति की तुलना में उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त होने की कगार पर है. एक ऐसा लक्ष्य जिसे सरकार ने 31 मार्च, 2026 तक हासिल करने का संकल्प लिया है. सरकार इस सफलता का श्रेय सुरक्षा अभियानों, बुनियादी ढांचे के विकास और पुनर्वास प्रयासों को मिलाकर एक बहुआयामी रणनीति को देती है. उन्होंने कहा, “बस्तर में डर नहीं, बल्कि जश्न का माहौल है. आप कल्पना कर सकते हैं कि नक्सलवाद के उन्मूलन के बाद हम कितनी प्रगति करेंगे.”

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First published on: Nov 01, 2025 09:04 PM

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