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बिहार

बिहार में 6 महीने में 9 बड़े कारोबारियों की हत्या, पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल, क्या ‘जंगलराज’ की हो रही वापसी?

Bihar Crime News: बिहार की राजधानी पटना में फिर एक कारोबारी की हत्या कर दी गई। गोपाल खेमका हत्याकांड के बाद इस नई वारदात से सनसनी फैल गई है। पिछले कुछ दिनों में व्यापारियों पर हो रहे हमलों की यह दूसरी बड़ी घटना है। गोपाल खेमका की हत्या की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि विक्रम झा मर्डर केस ने फिर से राजधानी की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पढ़िए हमारे संवाददाता सौरभ कुमार की पूरी रिपोर्ट।

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Written By: News24 हिंदी Updated: Jul 12, 2025 17:04
Crime in Bihar, Bihar Police।
पटना में गोपाल खेमका के बाद अब दुकानदार विक्रम झा की गोली मारकर हत्या।

बिहार की राजधानी पटना एक बार फिर अपराधियों की गिरफ्त में है। कारोबारी गोपाल खेमका की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या के बाद अब एक और चौंकाने वाली वारदात सामने आई है। रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र के जकरियापुर इलाके में किराना दुकानदार विक्रम झा की दुकान में घुसकर तीन अपराधियों ने गोलियां चला दीं। गंभीर रूप से घायल विक्रम झा को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पिछले कुछ दिनों में व्यापारियों पर हो रहे हमलों की यह दूसरी बड़ी घटना है। गोपाल खेमका की हत्या की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि विक्रम झा मर्डर केस ने फिर से राजधानी की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यह घटनाएं न केवल आम नागरिकों में भय का माहौल बना रही हैं, बल्कि शासन-प्रशासन की विफलता भी उजागर कर रही हैं।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार, जकरियापुर बाजार में शाम के समय तीन बाइक सवार अपराधी पहुंचे और सीधे दुकान के अंदर घुसकर विक्रम झा को गोली मार दी। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन अपराधियों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस की यह लचर व्यवस्था दर्शाती है कि अपराधी अब बेखौफ होकर राजधानी में वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

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इन हत्याओं के बाद बिहार की राजनीति भी गर्मा गई है। विपक्ष के साथ-साथ एनडीए के सहयोगी दलों ने भी सरकार को घेरना और सवाल उठाना शुरू कर दिया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि ‘बिहार अब और कितनी हत्याओं की भेंट चढेगें। समझ से परे है कि बिहार पुलिस की जिम्मेदारी क्या है?’ सीएम नीतीश कुमार सत्ताधारी पार्टी के साथ-साथ विपक्ष के निशाने पर हैं।

तेजस्वी यादव ने किया तीखा हमला

गिरती कानून व्यवस्था को लेकर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने कहा कि ‘यह घटना बिहार की अराजक स्थिति का प्रतीक है। डीजीपी, ट्रांसफर-पोस्टिंग और भ्रष्टाचार ही इस शासन का चेहरा बन चुका है।’ तेजस्वी ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री लगातार मौन क्यों हैं और रोज हो रही हत्याओं की जवाबदेही किसकी है? उन्होंने कहा, ‘भ्रष्ट भाजपा-जदयू सरकार को जनता से जवाब देना होगा।’

‘जंगलराज’ की वापसी की चर्चा

विपक्ष ने इसे ‘जंगलराज की वापसी’ बताया है। राजद, कांग्रेस समेत कई दलों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। राजद प्रवक्ता ने कहा, ‘पटना में व्यापारी सुरक्षित नहीं हैं तो बाकी बिहार की हालत क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।’

आंकड़ों की नजर से पटना की स्थिति

एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, पटना बिहार का सबसे अधिक अपराध प्रभावित जिला रहा है। साल 2024 में राजधानी में औसतन प्रति दिन 8 से 10 गंभीर अपराध दर्ज किए गए। 2025 की शुरुआत में ही अब तक 200 से अधिक हत्या की घटनाएं हो चुकी हैं।

राज्य में डर और अविश्वास का माहौल

पटना में हो रही इन हत्याओं ने आम जनता को डरा दिया है। व्यापारी वर्ग डरा हुआ है और लोग सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। एक तरफ चुनावी तैयारी की सरगर्मी है तो दूसरी ओर अपराध की घटनाएं लगातार सरकार की साख को नुकसान पहुंचा रही हैं।

बिहार में 6 महीने में 9 बड़े कारोबारियों की हत्या

1.   रमाकांत यादव – पटना में रानी बाजार थाना क्षेत्र के बालू कारोबारी रमाकांत यादव की 11 जुलाई 2025 को उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। अपराधियों ने दिनदहाड़े वारदात को अंजाम दिया। यह घटना गोपाल खेमका की हत्या के कुछ ही दिनों बाद हुई, जिससे पटना में कारोबारी सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

2.   ⁠गोपाल खेमका – पटना के मगध अस्पताल के मालिक और बड़े बिजनेसमैन गोपाल खेमका की हत्या गांधी मैदान थाना क्षेत्र में पनाशा होटल के पास 4 जुलाई की देर रात 11 बजे गोली मारकर की गई।

3.   ⁠अंजनी सिंह – पटना के जमीन कारोबारी अंजनी सिंह की पुनपुन के सोहगी-कुंदन पैक पर 22 जून 2025 की रात बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। अपराधी हाईटेक हथियारों से लैस थे और वारदात के बाद फरार हो गए।

4.   ⁠रजी अहमद उर्फ नन्हू मियां – 19 जून 2025 को मालेगांव के पनहस्सा गांव में जमीन कारोबारी रजी अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और हथियार भी बरामद किए हैं।

5.   ⁠विनय गुप्ता – भागलपुर के किराना व्यवसायी विनय गुप्ता की मई 2025 में नवगछिया बाजार में नकाबपोश अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

6.   ⁠रमेश चंद्रा – मार्च 2025 में मुजफ्फरपुर में मिट्टी कारोबारी रमेश चंद्रा की घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने दो संदिग्धों को पकड़ा, लेकिन मास्टरमाइंड फरार है।

7.   ⁠संजय अग्रवाल – अप्रैल 2025 में गया के एक नामी ज्वेलर संजय अग्रवाल की दुकान लूटने के बाद हत्या कर दी गई। पुलिस इसे गंगवार से जोड़ रही है।

8.   ⁠सुरभी – मार्च 2025 में एथिया हॉस्पिटल की संचालिका सुरभी की उनके चैंबर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनके पति सहित कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

9.   ⁠विनोद मेहता – जनवरी 2025 में भागलपुर के कपड़ा कारोबारी विनोद मेहता की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर की मौजूदगी में फायरिंग

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर की मौजूदगी में बिहार की राजधानी पटना में बोरिंग कैनाल रोड पर दिनदहाड़े 8 राउंड फायरिंग किया गया था। मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के सरकारी आवास के नजदीक अपराधियों ने दिनदहाड़े फायरिंग किया था। अकेले पटना में इस साल 116 हत्या, 41 बलात्कार के मामले सामने आए हैं। बीते वर्षों पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आंकड़ों में खुलासा हुआ है कि 151 दिनों में पुलिस पर 1297 बार हमले किए गए।

NCRB आंकड़ों से सामने आई सच्चाई (2006–2022):

1.    वर्ष 2005 में जहां बिहार में कुल अपराध 1,07,664 हुए थे, वहीं 2022 में यह संख्या बढ़कर 3,47,835 हो गई — यानी 323% की वृद्धि।
2.    बिहार राज्य हत्या के मामलों में उत्तर प्रदेश के बाद देश में दूसरे स्थान पर है। नीतिश शासन के 17 वर्षों में 53,150 हत्याएं दर्ज की गईं।
3.    हत्या की कोशिशों में भी बिहार देश में दूसरे नंबर पर है। कुल 98,169 घटनाएं हुईं, जो 262% की वृद्धि दर्शाती हैं।
4.    बिहार में जघन्य अपराध — जैसे हत्या, बलात्कार, अपहरण, फिरौती, डकैती — 206% बढ़े। 17 वर्षों में ऐसे 5,59,413 मामले दर्ज किए गए।
5.    महिला अपराधों में 336% की वृद्धि हुई है। कुल 2,21,729 महिलाएं अपराधों का शिकार बनीं। इनमें से 1,17,947 मामले आज भी अदालतों में लंबित हैं, और लंबित मामलों की दर 98.2% है।
6.    महिलाओं के अपहरण में 1,097% की भयावह वृद्धि हुई है।
7.    बच्चों के विरुद्ध अपराधों में 7,062% की चौंकानेवाली वृद्धि दर्ज हुई है। कुल 62,830 मासूम इस दौर में अपराध के शिकार बने।
8.    दलित उत्पीड़न के मामले में बिहार उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे नंबर पर है।

2025 की ताजा जमीनी सच्चाई (मई-जून):

हत्या की घटनाएं:
1.    बक्सर (24 मई): बालू व्यवसाय से जुड़े विवाद में एक ही परिवार के तीन भाइयों की हत्या।
2.    सहरसा: जेडीयू नेता विनोद भगत और उनके साले को गोली मारी गई, नेता की मौके पर मौत।
3.    पटना: दानापुर में युवक की बीच सड़क पर गोली मारकर हत्या; फतुहा और नदी थाना क्षेत्रों में एक सप्ताह में 3 हत्या।
4.    नालंदा: मुख्यमंत्री के गृह जिले में दो लोगों की गोली मारकर हत्या।
5.    आरा: 72 घंटों में अलग-अलग क्षेत्रों में 8 को गोली मारी गई — 3 की मौत, 5 घायल।
6.    बेतिया: दिनदहाड़े मछली व्यवसायी की हत्या; गुस्साए लोगों ने पुलिस वाहन फूंका।
7.    कटिहार: गाली-गलौच में कहासुनी पर 55 वर्षीय व्यक्ति को एयरगन से मार दिया गया।
8.    मुंगेर में ASI संतोष कुमार सिंह- 14 मार्च 2025 को मुंगेर के नंदलालपुर गांव में ASI संतोष कुमार पर चाकू–डण्डे से हमला किया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई ।
9.    अररिया में ASI राजीव रंजन – 13 मार्च 2025 को स्थानीय विवाह समारोह में ASI राजीव रंजन ने एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया, तभी एक समूह ने उन पर हमला कर दिया और मौत के घाट उतार दिया।

बच्चियों के साथ हुए जघन्य अपराध (बीते 15 -20 दिनों में):

1.   दो दिन पहले पटना में नाबालिग बच्ची के साथ गैंग रेप।
2.   मुजफ्फरपुर: 5वीं की छात्रा के साथ बलात्कार, 20 से अधिक चाकू के निशान, गला रेता गया।
3.   छपरा: स्कूल से लौटती छात्रा का अपहरण, सामूहिक बलात्कार और हत्या।
4.   बेतिया: ढाई साल की बच्ची के साथ बलात्कार।
5.   सीतामढ़ी, बगहा, अररिया, मुंगेर: 11–16 वर्ष की कई बच्चियों के साथ सामूहिक बलात्कार।

महिला अपहरण व अत्याचार:

•     प्रत्येक दिन औसतन 28 महिलाओं का अपहरण।
•     प्रतिदिन 55 महिला अपराध।
•     लंबित मामलों की भरमार, 98% से अधिक मामले अभी न्याय के इंतजार में हैं।

First published on: Jul 12, 2025 05:04 PM

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