Bihar Politics News: बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं, इसे लेकर अभी से राज्य की राजनीति में सरगर्मी पैदा हो गई है। इसी बीच खबर आ रही है कि मुजफ्फरपुर जिले के औराई विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रामसूरत राय के खिलाफ सर्वदलीय सामाजिक विरोध मार्च का आयोजन किया गया है। ऐसे में इस बात पर भी चर्चा होने लगी है कि चुनाव के ठीक पहले एक जाति विशेष का विरोध कहीं भाजपा को भारी न पर जाए।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, औराई विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक ने कुछ दिनों पहले अपने क्षेत्र में एक सभा को संबोधित करते हुए भूमिहार नेताओं के विरोध में बयान दिया था। उन्होंने बोला था कि यहां कितने लोग आए और चले गए। विधायक ने भूमिहार नेता स्वर्गीय रघुनाथ पांडेय, महाचंद्र प्रसाद सिंह और प्रेमचंद मिश्रा सहित कई भूमिहार समाज के गणमान्य लोगों का नाम लेते हुए उनको राजनीतिक रूप से पछाड़ने की बात कही थी। उनके इस बयान ने तूल पकड़ लिया है और इसी को लेकर सर्वदलीय सामाजिक विरोध मार्च का आयोजन किया गया।
रामसूरत राय के विरोध में बैठक
औराई विधायक रामसूरत राय के विरोध में मुजफ्फरपुर के औराई प्रखंड स्थित भैरव स्थान में शुक्रवार को एक बैठक आयोजित किया गया। इस बैठक में भाजपा विधायक पर जातीय नफरत बढ़ाने का आरोप लगाया गया। बैठक में कहा गया कि रामसूरत राय लगातार जाति विशेष और इसके राजनीतिक पूर्वजों का नाम विधानसभा से लेकर पार्टी की बैठकों में लेते हैं और उनपर तंज कसते हैं।
सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने दी चेतावनी
बैठक के बाद मुजफ्फरपुर के भूमिहार नेता सावन पांडेय के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने आक्रोश जताते हुए पैदल मार्च कर आने वाले दिनों में घर-घर जाकर लोगों को विधायक के कुकृत्य को उनके सामने रखने का ऐलान किया है। साथ ही बिहार भाजपा को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर रामसूरत राय को भाजपा भविष्य में उम्मीदवार बनाती है तो उन्हें भाजपा के कोर वोटर जाति द्वारा हराने का काम किया जाएगा।
‘BJP अन्याय नहीं, न्याय करने वाली पार्टी’
बता दें कि बिहार सरकार के हालिया कैबिनेट विस्तार में यादव समाज से किसी को मंत्री न बनाए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। इस मुद्दे पर रामसूरत राय ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा अन्याय करने वाली नहीं बल्कि न्याय करने वाली पार्टी है और सभी जातियों को प्रतिनिधित्व देने के लिए काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर किसी न किसी वजह से यह निर्णय लिया गया होगा, लेकिन इससे यादव समाज के लोगों को भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए। रामसूरत राय ने अपने बयान में कहा कि जब उनकी जाति से कोई मंत्री नहीं था, तब भी उन्हें मंत्री बनाया गया था। अब अगर इस बार किसी यादव को मंत्री नहीं बनाया गया है तो इसका मतलब यह नहीं कि पार्टी किसी के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा एक समावेशी पार्टी है, जो योग्यता और जरूरत के आधार पर निर्णय लेती है।