---विज्ञापन---

साइंस

अंतरिक्ष से आएगी धरती पर बिजली! चांद पर सोलर पैनल की विशाल बेल्ट लपेटने की तैयारी में ये देश

Science News: जापान की शिमिजु कॉर्पोरेशन ने चांद पर 6,800 मील लंबी सोलर पैनल की रिंग बनाने का प्रस्ताव दिया है. यह प्रोजेक्ट धरती को बिना रुके असीमित और स्वच्छ ऊर्जा प्रदान कर सकता है.

Author
Written By: Raja Alam Updated: May 6, 2026 14:09
अंतरिक्ष से धरती पर कैसे पहुंचेगी बिजली? Photo- AI

Science News in Hindi: जापान की एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी शिमिजु कॉर्पोरेशन ने चांद की भूमध्य रेखा पर सोलर पैनल की एक विशाल बेल्ट लपेटने का बेहद चौंकाने वाला प्रस्ताव दिया है. ‘लूना रिंग’ नाम का यह कॉन्सेप्ट साल 2011 में तब चर्चा में आया जब फुकुशिमा परमाणु हादसे के बाद जापान ऊर्जा के नए विकल्पों की तलाश कर रहा था. चांद पर बादलों, वायुमंडल और रात की बाधा न होने के कारण वहां के सोलर पैनल धरती के मुकाबले बीस गुना ज्यादा बिजली पैदा कर सकते हैं. कंपनी का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के जरिए धरती को बिना रुके और असीमित मात्रा में साफ ऊर्जा मिल सकेगी.

कैसे चांद से धरती तक पहुंचेगी बिजली?

इस तकनीक के तहत चांद के चारों ओर करीब 6800 मील लंबी सोलर सेल्स की एक रिंग बनाई जाएगी जो सूरज की रोशनी को सोखकर बिजली बनाएगी. चूंकि चांद का एक हिस्सा हमेशा सूरज के सामने रहता है, इसलिए वहां बिजली का उत्पादन कभी नहीं रुकेगा. इसके बाद चांद की सतह के नीचे दबे केबल्स के जरिए इस बिजली को धरती की तरफ वाले हिस्से में भेजा जाएगा. वहां से हाई एनर्जी लेजर और माइक्रोवेव बीम के जरिए बिजली को धरती पर बने खास रिसीविंग स्टेशनों तक भेजा जाएगा. धरती पर लगे एंटीना इन तरंगों को वापस बिजली में बदलकर ग्रिड तक पहुंचाएंगे जिससे कोयले और तेल पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो सकती है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: James Webb Telescope: अंतरिक्ष में मिली ‘सुपर अर्थ’! जेम्स वेब टेलीस्कोप ने खोजा आग उगलता हुआ ग्रह, बुध जैसा दिखता है इसका नजारा

रोबोट और चांद की मिट्टी का होगा कमाल

इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए सारा सामान धरती से ले जाना मुमकिन नहीं है, इसलिए कंपनी चांद के संसाधनों का ही इस्तेमाल करना चाहती है. शिमिजु के प्रस्ताव के मुताबिक रोबोटिक मशीनों की मदद से चांद की मिट्टी (रेगोलिथ) को प्रोसेस करके कंक्रीट, कांच और यहां तक कि सोलर सेल भी बनाए जाएंगे. धरती से ऑपरेट होने वाले ये रोबोट ही चांद पर खुदाई और असेंबली का सारा काम करेंगे. इस काम में इंसानों की भूमिका बहुत कम होगी और खुद चलने वाले कारखाने चांद की सतह पर घूम-घूमकर सोलर पैनल लगाते जाएंगे. इस तरह चांद खुद ही अपनी ऊर्जा बेल्ट तैयार करने का साधन बनेगा.

---विज्ञापन---

चुनौतियां और इस प्रोजेक्ट का भविष्य

लूना रिंग सुनने में जितना जादुई लगता है, इसे हकीकत में बदलना उतना ही मुश्किल और महंगा काम है. वैज्ञानिकों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अंतरिक्ष से इतनी दूरी तक बिजली बीम करना अभी टेस्टिंग के दौर में है और इसमें भारी लागत आएगी. यही वजह है कि 10 साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी यह प्रोजेक्ट सिर्फ कागजों पर ही सिमटा हुआ है और किसी बड़ी एजेंसी ने इसे आधिकारिक तौर पर शुरू नहीं किया है. हालांकि धरती पर जमीन की कमी और बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए यह विचार आज भी चर्चा में बना हुआ है. शिमिजु कॉर्पोरेशन को उम्मीद है कि भविष्य की रिसर्च इसे एक दिन सच साबित कर सकती है.

First published on: May 06, 2026 02:09 PM

End of Article
संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.