भगवान शिव के मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप अधिकतर सभी करते हैं। भगवान शिव का यह मंत्र बेहद शक्तिशाली और संकट को पल में दूर करने वाला माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह पूरा मंत्र नहीं है। यह एक मंत्र का महज शॉर्ट फॉर्म है। जी हां, इस मंत्र में ‘नमः शिवाय’ शिव पंचाक्षर मंत्र कहा जाता है। वहीं, इसमें ‘ॐ’ (बीज मंत्र) को जोड़ दें तो यह षडाक्षर मंत्र बन जाता है। यह मंत्र युजर्वेद में लिखा हुआ है। इसके साथ ही शिवपुराण के रुद्रयामल तंत्र में इसका जिक्र देखने को मिलता है। स्कंद पुराण में इस मंत्र को भगवान शिव की उपासना के लिए बताया गया है।
इस मंत्र के हर अक्षर का एक गहरा अर्थ है। इसमें बीज मंत्र ‘ॐ ‘ स्वयं ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक है। यह अ,उ और म से मिलकर बना है। इसमें अ का अर्थ सृ्ष्टि (ब्रह्मा), उ का अर्थ पालन (विष्णु) और म का अर्थ संहार (शंकर) है। वहीं, नमः शिवाय का अर्थ अलग है।
ये है ‘न’ का पूरा मंत्र
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै न काराय नमः शिवाय॥
अर्थ- जो नागराज को हार रूप में धारण करते हैं, तीन नेत्रों वाले हैं, भस्म का श्रृंगार करते हैं, और दिगम्बर रूप में हैं। उन नित्य, पवित्र महेश्वर को नमस्कार है।
‘मः’ का पूरा मंत्र
मन्दाकिनी सलिल चन्दन चर्चिताय
नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय।
मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय
तस्मै म काराय नमः शिवाय॥
अर्थ- जो मंदाकिनी गंगा के जल और चंदन से सुशोभित रहते हैं, नंदी के ईश्वर और प्रमथगणों के स्वामी हैं, और मंदार पुष्पों से जिनक अर्चना की जाती है। उन भगवान शिव को नमन है।
‘शि’ का पूरा मंत्र
शिवाय गौरी वदनाब्ज सूर्याय
दक्षाध्वर नाशकाय स्मरहराय।
त्रिपुरान्तकाय त्रिनेत्राय
तस्मै शि काराय नमः शिवाय॥
अर्थ- जो देवी पार्वती के मुखकमल के सूर्यस्वरूप हैं, दक्ष प्रजापति के यज्ञ का विनाश और कामदेव का संहार करने वाले हैं। त्रिपुरासुर का नाश जिन्होंने किया है। उन त्रिनेत्रधारी शिव को प्रणाम है।
‘व’ का पूरा मंत्र
वशिष्ठ कुम्भोद्भव गौतमार्य
मुनीन्द्र देवार्चित शेखराय।
चन्द्रार्क वैश्वानर लोचनाय
तस्मै व काराय नमः शिवाय॥
अर्थ- जो वशिष्ठ, अगस्त्य, गौतम, और अन्य महर्षियों द्वारा पूजित हैं, जिनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित हैं, और जिनकी दृष्टि सूर्य, चंद्र और अग्नि के समान है। ऐसे भगवान शिव को नमन है।
‘य’ का पूरा मंत्र
यज्ञस्वरूपाय जटाधराय
पिनाकहस्ताय सनातनाय।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय
तस्मै य काराय नमः शिवाय॥
अर्थ- जो यज्ञस्वरूप हैं, जटाओं वाले हैं, धनुषधारी हैं, सनातन हैं, दिव्य हैं और दिगम्बर रूप में विद्यमान हैं। उन परमेश्वर शिव को प्रणाम है।
होता है यह फायदा
पंचाक्षरमिदं पुण्यं
यः पठेत् शिवसंनिधौ।
शिवलोकमवाप्नोति
शिवेन सह मोदते॥
अर्थ- जो भी इस पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ भगवान शिव के समक्ष करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है और सदा शिवजी के साथ आनंदित रहता है।
आदि शंकराचार्य ने लिखा है यह स्त्रोत
इस स्त्रोत को स्वयं आदि शंकराचार्य ने लिखा है। कई सार ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है। इसको शिव पंचाक्षर मंत्र के नाम से जाना जाता है। इसमें पांच अक्षर हैं, इस कारण इस पंचाक्षर कहा जाता है।
इस प्रकार करें जाप
इस मंत्र का जाप वैसे तो शुद्ध और पवित्र होकर करना चाहिए, लेकिन संकट के समय कभी भी इसका जाप कर सकते हैं। इसका जाप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें। शिवलिंग के सामने इस मंत्र का जप तुरंत फलदाई होता है। भगवान शिव के अभिषेक के बाद इस मंत्र का जाप करें।
मिलते हैं ये अद्भुत लाभ!
इस मंत्र का जाप करने मात्र से संकटों का नाश होता है। नकारात्मक शक्ति इस मंत्र का जाप करने वाला कुछ भी नहीं बिगाड़ पाती है। हर प्रकार के कष्ट से मुक्ति पाने का यह सरल उपाय है। इस मंत्र का जाप करने वाला दीर्घायु हो जाता है। रोगों का नाश भी इस मंत्र के जाप से हो जाता है। जो भी मनुष्य इस मंत्र का नियमपूर्वक जपता है। उसको मानसिक शांति मिलती है और तनाव दूर होता है। सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आध्यात्मिक उन्नति भी होती है। माना जाता है इस मंत्र का नियमित जाप करने वाला व्यक्ति शिवलोक को प्राप्त करता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्रों और मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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