Nalhar Mahadev Mandir: भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए सावन मास का विशेष महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार सावन मास 22 जुलाई 2024 से लेकर 19 अगस्त 2024 तक रहेगा। इस दौरान साधक व्रत रखने के साथ-साथ शिव जी के प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों के दर्शन भी करते हैं। आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका संबंध भोलेबाबा से तो है ही। इसी के साथ इस मंदिर का रिश्ता संबंध कृष्ण जी और महाभारत काल से भी है।
ऊंचाई पर स्थित है मंदिर
हरियाणा के नूंह में गहमर गांव में भगवान शिव को समर्पित नल्हड़ महादेव नामक मंदिर स्थित है। जहां सावन के दौरान शिव भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है। हालांकि ये मंदिर बहुत ऊंचाई पर है। मंदिर के दर्शन करने के लिए प्रत्येक साधक को कम से कम 287 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
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महाभारत काल से है गहरा रिश्ता
पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में महाभारत युद्ध न हो इसलिए भगवान कृष्ण ने 5 पांडवों और 100 कौरवों के बीच समझौता कराने के लिए नल्हड़ महादेव मंदिर का ही चयन किया था। इसी वजह से इस मंदिर को कृष्ण जी से जोड़ा जाता है। यहां पर भगवान शिव और शिवलिंग के साथ-साथ कृष्ण जी की भी प्रतिमा स्थापित है।
हर साल महाशिवरात्रि के दिन नल्हड़ महादेव मंदिर में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियां भी यहां पर जल चढ़ाने आते हैं।
पेड़ से निकलता है पानी
नल्हड़ महादेव मंदिर को चमत्कारी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां पर एक कदम का पेड़ है, जिसमें से 24 घंटे पानी बहता रहता है। इस पेड़ की लंबाई 500 फीट से ज्यादा है। पेड़ से निकलने वाले पानी को लोग प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। कहा जाता है कि पेड़ से निकलने वाले पानी का स्वाद बेहद मीठा होता है।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
Nalhar Mahadev Mandir: भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए सावन मास का विशेष महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार सावन मास 22 जुलाई 2024 से लेकर 19 अगस्त 2024 तक रहेगा। इस दौरान साधक व्रत रखने के साथ-साथ शिव जी के प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों के दर्शन भी करते हैं। आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका संबंध भोलेबाबा से तो है ही। इसी के साथ इस मंदिर का रिश्ता संबंध कृष्ण जी और महाभारत काल से भी है।
ऊंचाई पर स्थित है मंदिर
हरियाणा के नूंह में गहमर गांव में भगवान शिव को समर्पित नल्हड़ महादेव नामक मंदिर स्थित है। जहां सावन के दौरान शिव भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है। हालांकि ये मंदिर बहुत ऊंचाई पर है। मंदिर के दर्शन करने के लिए प्रत्येक साधक को कम से कम 287 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
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महाभारत काल से है गहरा रिश्ता
पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में महाभारत युद्ध न हो इसलिए भगवान कृष्ण ने 5 पांडवों और 100 कौरवों के बीच समझौता कराने के लिए नल्हड़ महादेव मंदिर का ही चयन किया था। इसी वजह से इस मंदिर को कृष्ण जी से जोड़ा जाता है। यहां पर भगवान शिव और शिवलिंग के साथ-साथ कृष्ण जी की भी प्रतिमा स्थापित है।
हर साल महाशिवरात्रि के दिन नल्हड़ महादेव मंदिर में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियां भी यहां पर जल चढ़ाने आते हैं।
पेड़ से निकलता है पानी
नल्हड़ महादेव मंदिर को चमत्कारी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां पर एक कदम का पेड़ है, जिसमें से 24 घंटे पानी बहता रहता है। इस पेड़ की लंबाई 500 फीट से ज्यादा है। पेड़ से निकलने वाले पानी को लोग प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। कहा जाता है कि पेड़ से निकलने वाले पानी का स्वाद बेहद मीठा होता है।
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