आज सकट चौथ के अवसर पर अधिकांश शहरों में चंद्र दर्शन संपन्न हुआ। सबसे पहले राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में चांद दिखाई दिया। वहीं दिल्ली, फरीदाबाद, नोएडा, गुड़गांव और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में कोहरे और धुंध के कारण चांद देर से दिखा। इस वजह से पूजा और पारण में थोड़ी देरी हुई। हालांकि, जिन जगहों पर चांद देर से दिखाई दिया, वहाँ व्रतियों ने मोबाइल के जरिए दूसरे शहरों से लाइव चंद्र दर्शन कर वैकल्पिक पूजा पूरी की। इस तरह व्रत का महत्व और फल सुरक्षित रहा।
Sakat Chauth City Wise Moon Rise Timing: मंगलवार 6 जनवरी, 2026 को सकट चौथ का व्रत पूरी श्रद्धा, विश्वास और उल्लास से मनाया गया. सकट चौथ के अवसर पर चांद का दर्शन अधिकांश शहरों में संपन्न हुआ. सबसे पहले पश्चिमी भारत के राज्यों जैसे राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में चांद दिखा.
वहीं दिल्ली, फरीदाबाद, नोएडा, गुड़गांव और उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में कोहरे और धुंध की चादर के कारण चांद देर से दिखाई दिया, जिससे पूजा और पारण में विलंब हुआ. जिन शहरों में चांद देर से दिखा, वहां व्रतियों ने मोबाइल के माध्यम से दूसरे शहरों से लाइव चंद्र दर्शन कर वैकल्पिक पूजा की.
चंद्रदेव की पूजा संपन्न होने के बाद ही व्रतियों ने पारण किया. आपको बता दें कि इस उपाय से व्रत का संपन्न करना अब सही माना जाने लगा है और इससे पूजा का फल भी सुरक्षित माना गया है.
सकट चौथ व्रत भगवान गणेश जी और सकट माता की पूजा के लिए खास होता है. सकट चौथ पर चंद्रोदय के बाद चंद्र देव की पूजा की जाती है. आज अब यह सकट चौथ व्रत अपने समापन की ओर बढ़ चला है. भारत के अधिकांश शहरों में सकट चांद दिख चुका है.
शुभ मुहूर्त और पूजा विधि (Shubh Muhurat, Puja Vidhi)
आज सकट चौथ के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट (अभिजीत मुहूर्त) तक रहा. इसके बाद शाम के समय पूजा का सायाह्न संध्या मुहूर्त शाम को 5 बजकर 39 मिनट से शाम को 7 बजकर 1 मिनट तक रहेगा.
चंद्रोदय का समय (Moon Rise Timing)
सकट चौथ के दिन सभी बड़े शहरों में चंद्रोदय का समय क्या रहेगा आप यहां देख सकते हैं. चंद्रोदय के बाद चंद्र देव को जल अर्पित करें और विधि विधान से पूजा करें.
दिल्ली- रात 09 बजकर 34 मिनट पर
नोएडा- रात 08 बजकर 54 मिनट पर
गाजियाबाद- रात 08 बजकर 54 मिनट पर
मुंबई- रात 09 बजकर 24 मिनट पर
लखनऊ- रात 08 बजकर 41 मिनट पर
चंडीगढ़- रात 08 बजकर 54 मिनट पर
कोलकाता- रात 08 बजकर 15 मिनट पर
जयपुर- रात 09 बजकर 3 मिनट पर
सकट चौथ व्रत कथा (Sakat Chauth Vrat Katha)
प्राचीन समय में एक कुम्हार मिट्टी के बर्तन बनाचा था और अपना जीवन यापन करता था. मिट्टी के बर्तन को पकाने के लिए वह आग भट्ठा जलाता, लेकिन आग में बर्तन नहीं पक रहे थे. तब उसने इसका कारण जानना चाहा. इसके लिए वह एक तांत्रिक के पास गया. तांत्रिक ने इसके पीछे ग्रहों का प्रकोप बताया. तांत्रिक ने उपाय बताते हुए कहा कि, तुम एक बच्चे की बलि दोगे तो भट्ठा जलने लगेगा और बर्तन पकने लगेंगे. कुम्हार ने यह व्यथा राजा को बताई. राजा ने बच्चों को बारी-बारी बली के लिए भेजने का आदेश दिया. इस प्रक्रिया में कई लोगों की गोद सूनी हो गई. एक बार बूढ़ी विधवा मां के इकलौते बेटे को बलि के लिए भेजा गया. बूढ़ी मां ने बेटे को सुपारी और थोड़ी दुर्वा दी और कहा कि, जब तुम्हे भट्ठे में बैठना हो तो इसे मुट्ठी में बंद करके गणपति का नाम लेना. इससे तुम्हारी रक्षा होगी. बच्चे की बलि देने के लिए उसे भट्ठे की आग में बैठाया गया तब बूढ़ी मां उसकी रक्षा की प्रार्थना की. सकट माता और गणेश जी की कृपा से बच्चा बच गया. आग का भट्टा ठंडा होने के बाद वह सुरक्षित बाहर निकला. पहले जितने भी बच्चों की बलि दी गई थी सभी बच्चे जीवित थे. सकट माता और गणेश जी के आशीर्वाद से अग्नि फूल बन गए थे.
आज सकट चौथ के अवसर पर कुछ क्षेत्रों में कोहरे और धुंध के कारण चांद दिखाई नहीं दिया। जिन जगहों पर चांद नहीं दिखा, वहां व्रतियों ने दूर के शहरों से मोबाइल के माध्यम से चंद्र दर्शन कर पूजा की। चंद्रदेव की पूजा संपन्न होने के बाद ही व्रतियों ने पारण किया।
आपको बता दें कि इस उपाय से व्रत का संपन्न करना अब सही माना जाने लगा है और इससे पूजा का फल भी सुरक्षित माना गया है।
हिन्दू धर्म में सकट चौथ और लंबोदर संकष्टी चतुर्थी वास्तव में एक ही त्योहार है। बस क्षेत्रों के अनुसार, इनके अलग-अलग नाम हैं, जो माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। आज इस पर्व के अवसर पर चांद का दर्शन करने में कठिनाई रही, क्योंकि कई शहरों में आसमान में कोहरा और धुंध छाई हुई थी, जिससे पूजा और व्रत में थोड़ी जद्दोजहद हुई।
इस व्रत का मुख्य उद्देश्य संतान की लंबी उम्र, परिवार की सुख-समृद्धि और गणेश जी की कृपा प्राप्त करना है। इस दिन तिल और गुड़ का विशेष महत्व होता है।
आज सकट चौथ के अवसर पर चांद को देखने में परेशानी हुई। कोहरे की चादर ने उसे छिपा रखा है, जिससे कुछ स्थानों पर चांद दिखाई दिया तो कुछ जगहों पर नहीं। दिल्ली में चंद्रोदय का समय 8 बजकर 54 था, लेकिन यह कहीं-कहीं ही दिखा।
आपको बता दें कि नियमानुसार, पूजा और व्रत करने वाले भक्तों के लिए यह जानना आवश्यक है कि चांद कब उगा, क्योंकि इसकी स्थिति के अनुसार ही सकट चौथ का व्रत पूर्ण माना जाता है।
आज दिल्ली में चंद्रमा उदय यानी चांद दिखना लगभग रात को 8:50–8:55 बजे के बीच होगा। द्रिक पंचांग की मानें तो दिल्ली-एनसीआर में चांद लगभग 8:54 PM के आसपास निकलेगा।
वहीं, बादल होने पर समय थोड़ा आगे भी हो सकता है, इसलिए दान-पूजन और अर्घ्य इसी आस-पास के समय से शुरू कर सकते हैं। चांद दिखते ही व्रत पारण के अनुष्ठान कर सकते हैं।
सकट चौथ के दिन तिल, तिलकुट, तिल से बने लड्डू और पकवान का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन तिल का दान, सेवन और पूजा करने से संतान की रक्षा होती है। अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। शनि और राहु के दोष शांत होते हैं। इसलिए इस व्रत में तिल से बने पदार्थ अनिवार्य माने गए। तिल से बने कुटे हुए पकवान के कारण यह दिन “तिलकुटा चौथ” कहलाया।
दिल्ली- रात 09 बजकर 34 मिनट पर
नोएडा- रात 08 बजकर 54 मिनट पर
गाजियाबाद- रात 08 बजकर 54 मिनट पर
मेरठ- रात 08 बजकर 52 मिनट पर
लखनऊ- रात 08 बजकर 41 मिनट पर
वाराणसी- रात 08 बजकर 35 मिनट पर
मथुरा- रात 08 बजकर 55 मिनट पर
इलाहाबाद- रात 08 बजकर 40 मिनट पर
चंडीगढ़- रात 08 बजकर 54 मिनट पर
अमृतसर- रात 09 बजकर 01 मिनट पर
जयपुर- रात 09 बजकर 3 मिनट पर
इंदौर- रात 09 बजकर 7 मिनट पर
कोलकाता- रात 08 बजकर 15 मिनट पर
मुंबई- रात 09 बजकर 24 मिनट पर
पुणे- रात 09 बजकर 20 मिनट पर
बेंगलुरु- रात 09 बजकर 10 मिनट पर
नासिक- रात 09 बजकर 18 मिनट पर
हैदराबाद- रात 09 बजकर 02 मिनट पर
पटना- रात 08 बजकर 25 मिनट पर
नासिक- रात 09 बजकर 18 मिनट पर
कई बार ऐसा होता है कि, आसमान में बादल होने की वजह से चांद दिखना संभव नहीं हो पाता है. ऐसे में आप अपने शहर में चांद निकलने का समय देखें. उस समय मानसिक रूप से चंद्रमा का ध्यान करके अर्घ्य दें. आप निकलने की दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करें. चंद्रमा के चित्र, कलश में जल या दीपक को चंद्र का प्रतीक मानकर भी पूजा कर सकते हैं.
आप आज सकट चौथ के शुभ अवसर पर भगवान गणेश जी के "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र की माला का जाप कर सकते हैं. आप शाम की पूजा के समय इस मंत्र का जाप करें. इस मंत्र का 108 बार जाप करें. गणेश जी के इस मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है. जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं. इस मंत्र के जाप से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है..
आपको सकट चौथ पर कई चीजों का दान करना चाहिए. सकट चौथ व्रत के पर आप आज धन, वस्त्र, कंबल, तिल, गुड़, मूंगफली, फल, घी, मिठाई, चने, मसूर की दाल और तांबे से बनी चीजों का दान करें. इन चीजों का दान करने से आपको पुण्य मिलेगा. आप किसी जरूरतमंद व्यक्ति को या मंदिर में इन चीजों का दान कर सकते हैं.
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी,
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी,
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
सकट चौथ की पूजा शाम के समय की जाती है. आप पूजा के लिए स्नान कर तैयार हो जाएं. घर के मंदिर की सफाई करें और चौकी स्थापित कर लाल कपड़ा बिछाएं. इस पर भगवान गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें. गणेश जी को दूर्वा, रोली, अक्षत, तिल-गुड़ से बने तिलकुट आदि अर्पित करें. सकट चौथ की कथा सुनें और आरती कर भगवान को भोग लगाएं. चंद्रोदय के बाद चांद को जल का अर्घ्य दें.
ओम जय श्री चौथ मैया, बोलो जय श्री चौथ मैया
सच्चे मन से सुमिरे, सब दुःख दूर भया
ओम जय श्री चौथ मैया
ऊंचे पर्वत मंदिर, शोभा अति भारी
देखत रूप मनोहर, असुरन भयकारी
ओम जय श्री चौथ मैया
महासिंगार सुहावन, ऊपर छत्र फिरे
सिंह की सवारी सोहे, कर में खड्ग धरे
ओम जय श्री चौथ मैया
बाजत नौबत द्वारे, अरु मृदंग डैरु
चौसठ जोगन नाचत, नृत्य करे भैरू
ओम जय श्री चौथ मैया
बड़े बड़े बलशाली, तेरा ध्यान धरे
ऋषि मुनि नर देवा, चरणो आन पड़े
ओम जय श्री चौथ मैया
चौथ माता की आरती, जो कोई सुहगन गावे
बढ़त सुहाग की लाली, सुख सम्पति पावे
ओम जय श्री चौथ मैया।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा॥
ओम एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
‘गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।
सर्वार्थ सिद्धि योग - सुबह 07:15 से दोहपर 12:17 तक
प्रीति योग - सुबह से लेकर शाम 08:21 तक
आयुष्मान् योग - रात 08:21 से कल शाम तक
भद्रा - सुबह 07:15 से सुबह 08:01 तक
सकट चौथ के दिन कई बातों का खास ध्यान रखना चाहिए. सकट चौथ पर लोग दान-पुण्य करते हैं. आपको सकट चौथ के दिन कई चीजों का दान करने से बचना चाहिए. आप दूध से बनी चीजों, नुकीली चीजों, कांच की चीजों और काले रंग की वस्तुओं का दान न करें. इन चीजों का दान करने से आपके ऊपर नकारात्मक असर पड़ेगा.
सूर्योदय - सुबह 07 बजकर 15 मिनट पर
सूर्यास्त - शाम 05 बजकर 39 मिनट पर
चंद्रोदय - शाम 08 बजकर 54 मिनट पर
चंद्रास्त - सुबह 09 बजकर 35 मिनट पर










