Premanand Maharaj Viral Video: सनातन धर्म के लोगों के लिए देव लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी को धन का प्रतीक माना जाता है। जो लोग नियमित रूप से देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उन्हें जीवन में कभी भी पैसों की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है। उनके जीवन में सदा सुख, शांति, खुशहाली, समृद्धि, धन, वैभव और यश का वास रहता है।
हालांकि व्यक्ति की कुछ गलतियों के कारण धन की देवी मां लक्ष्मी उनसे रुष्ट यानी नाराज भी हो जाती हैं, जिसका सीधा नकारात्मक असर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। चलिए संत श्री प्रेमानंद महाराज से जानते हैं व्यक्ति की उस एक गलती के बारे में, जिसके कारण उनसे धन की देवी मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं।
किस गलती के कारण रुष्ट जाती हैं देवी लक्ष्मी?
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि, 'आमतौर पर लोग भगवान को लालच देते हैं। कहते हैं ठाकुर जी मेरा ये काम हो जाएगा, तो मैं आपको 56 भोग चढ़ाउंगा। इस मंदिर में इतने का चढ़ावा दूंगा आदि-आदि। जो कि गलत है। भगवान से सदा अपनापन और हक से मांगना चाहिए। कभी उन्हें लालच नहीं देना चाहिए। ऐसा करने से धन की देवी मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। घर में कभी भी देवी लक्ष्मी विराजमान नहीं होती हैं, जिसके कारण साधक को सदा पैसों की कमी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा उनके घर में क्लेश और तनाव की स्थिति भी बनी रहती है।'
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ऐसे प्रसन्न करें देवी-देवताओं को
इसी के आगे प्रेमानंद महाराज ने कहा, 'साधक को हमेशा भगवान से हक से मांगना चाहिए। अपनेपन से उनके सामने अपनी बात को रखें। उनसे कहें- प्रभु जैसा भी हूं आपका हूं। आपके जीवन दिया है। काम दिया है। अब ये समस्या आ रही है, आप जैसे उचित समझें मुझे इस समस्या का हल दें।' महाराज का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह से भगवान से बात करता है, तो वो उनकी बात को हमेशा सुनते हैं। साथ ही उन्हें देवी-देवताओं की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है।'
एकांतिक वार्ता भी करते हैं महाराज
संत श्री प्रेमानंद महाराज एक प्रसिद्ध कथावाचक हैं, जो सत्संग के माध्यम से लोगों को सनातन धर्म से जुड़ी जरूरी बातों के बारे में बताते हैं। सत्संग के अलावा राधाकेली कुंज आश्रम में प्रेमानंद महाराज एकांतिक वार्ता भी करते हैं। जहां पर वह साधकों की परेशानियां सुनते हैं और उन्हें उनका समाधान बताते हैं। महाराज का सत्संग सुनने और अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए दूर-दूर से भक्तजन वृंदावन पहुंचते हैं।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
Premanand Maharaj Viral Video: सनातन धर्म के लोगों के लिए देव लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी को धन का प्रतीक माना जाता है। जो लोग नियमित रूप से देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उन्हें जीवन में कभी भी पैसों की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है। उनके जीवन में सदा सुख, शांति, खुशहाली, समृद्धि, धन, वैभव और यश का वास रहता है।
हालांकि व्यक्ति की कुछ गलतियों के कारण धन की देवी मां लक्ष्मी उनसे रुष्ट यानी नाराज भी हो जाती हैं, जिसका सीधा नकारात्मक असर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। चलिए संत श्री प्रेमानंद महाराज से जानते हैं व्यक्ति की उस एक गलती के बारे में, जिसके कारण उनसे धन की देवी मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं।
किस गलती के कारण रुष्ट जाती हैं देवी लक्ष्मी?
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि, ‘आमतौर पर लोग भगवान को लालच देते हैं। कहते हैं ठाकुर जी मेरा ये काम हो जाएगा, तो मैं आपको 56 भोग चढ़ाउंगा। इस मंदिर में इतने का चढ़ावा दूंगा आदि-आदि। जो कि गलत है। भगवान से सदा अपनापन और हक से मांगना चाहिए। कभी उन्हें लालच नहीं देना चाहिए। ऐसा करने से धन की देवी मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। घर में कभी भी देवी लक्ष्मी विराजमान नहीं होती हैं, जिसके कारण साधक को सदा पैसों की कमी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा उनके घर में क्लेश और तनाव की स्थिति भी बनी रहती है।’
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ऐसे प्रसन्न करें देवी-देवताओं को
इसी के आगे प्रेमानंद महाराज ने कहा, ‘साधक को हमेशा भगवान से हक से मांगना चाहिए। अपनेपन से उनके सामने अपनी बात को रखें। उनसे कहें- प्रभु जैसा भी हूं आपका हूं। आपके जीवन दिया है। काम दिया है। अब ये समस्या आ रही है, आप जैसे उचित समझें मुझे इस समस्या का हल दें।’ महाराज का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह से भगवान से बात करता है, तो वो उनकी बात को हमेशा सुनते हैं। साथ ही उन्हें देवी-देवताओं की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है।’
एकांतिक वार्ता भी करते हैं महाराज
संत श्री प्रेमानंद महाराज एक प्रसिद्ध कथावाचक हैं, जो सत्संग के माध्यम से लोगों को सनातन धर्म से जुड़ी जरूरी बातों के बारे में बताते हैं। सत्संग के अलावा राधाकेली कुंज आश्रम में प्रेमानंद महाराज एकांतिक वार्ता भी करते हैं। जहां पर वह साधकों की परेशानियां सुनते हैं और उन्हें उनका समाधान बताते हैं। महाराज का सत्संग सुनने और अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए दूर-दूर से भक्तजन वृंदावन पहुंचते हैं।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।